आखिर राहुल ने ऐसा क्यों कहा? सच कहा जाय तो राहुल गांधी का ज्ञान बहुत ही छोटा है। अपने अल्पज्ञान के कारण वे कुछ भी बोल सकते हैंं। आज वे नरेन्द्र मोदी पर हमला कर रहे हैं। नरेन्द्र मोदी आरएसएस के हैं और मोदी पर हमला करते हुए उन्होंने आरएसएस को ही गांधी जी का हत्यारा कह डाला। 66 साल के बाद उन्होंने गांधी की हत्या की पड़ताल के मसले को एक बार फिर खोल दिया है।
जवाहर लाल नेहरू, उनकी बेटी इनिदरा गांधी और इनिदरा के बेटे राजीव गांधी ने भी इस मसले को कभी भी राजनैतिक रंग देने की कोशिश नहीं की। संध को प्रतिबंधित करने वाली इनिदरा गांधी ने 1977 में भी इस मसले को चुनाव के पहले नहीं उछाला। लेकिन राहुल गांधी ने मोदी का विरोध करते हुए आरएसएस को ही महात्मा गांधी का हत्यारा बता दिया।
नेहरू, इनिदरा और राजीव यदि गांधी की हत्या के मामले को दबाकर रखते थे, तो इसका कारण यह था कि उन्हें लगता था कि यदि इस मसले का पोस्ट मार्टम किया गया, तो कहीं इस संभावना पर चर्चा न चल जाय कि गांधी की हत्या आरएसएस ने नहीं, बलिक कहीं कांग्रेस तो उसके लिए जिम्मेदार नहीं थी।
आखिर गांधी को किसने मारा? प्रत्यक्षदर्शियों की मानें, तो गांधी की हत्या नाथू राम गोडसे ने की थी। गोडसे ने खुद भी स्वीकार किया कि उसने गांधी को मारा। राहुल गांधी ने गोडसे को आरएसएस का आदमी मानने में गलती कर दी। उन्होंने गांधी के पोते राजमोहन गांधी की वह पुस्तक नहीं पढ़ी है, जिसमें उन्होंने गांधी की हत्या में अपने आरएसएस की भूमिका होने की बात को गलत माना है। विचारधारा की बात मानें, तो नाथू राम गोडसे वीर सावरकर के नजदीक था, आरएसएस के नहीं।
गांधी की हत्या जिस माहौल में हुर्इ थी, उसे भी समझना जरूरी है। उसके कुछ समय पहले देश का विभाजन हुआ था और उस विभाजन के क्रम में लाखों लोग मारे गए थे। एक खास गलतफहमी उस समय यह फैली थी कि गांधी जी के कारण देश का विभाजन हो गया। यह सच्चार्इ से परे था, क्योंकि देश का विभाजन गांधी के कारण नहीं हुआ था। उन्होंने विभाजन को रोकने की हर संभव कोशिश की थी। वे जिन्ना को प्रधानमंत्री तक मानने को तैयार थे, लेकिन विभाजन नहीं चाहते थे। यदि कांग्रेस की ओर से विभाजन के लिए कोर्इ सबसे बड़ा जिम्मेदार था, तो वह खुद जवाहरलाल नेहरू थे, जिनके लिए अखंड भारत से ज्यादा जरूरी प्रधानमंत्री का पद था।
भारत के विभाजन की लकीर नेहरू और जिन्ना के कारण बनी और गांधीजी ने उसका हर संभव विरोध किया। लेकिन भारत छोड़ो आंदोलन के बाद गांधी की पकड़ कांग्रेस पर कमजोर हो चुकी थी। वे अपने आपको जवाहरलाल नेहरू के सामने कमजोर पा रहे थे, हालांकि सच यह भी है कि नेहरू ने उनका इस्तेमाल करके ही सुभाषचन्द्र बोस जैसे अपने संभावित प्रतिद्वंद्वी को कांग्रेस से बाहर किया था। यह एक रहस्य है कि गांधीजी आखिर नेहरू को उतना चाहते क्यों थे।
गांधी का इस्तेमाल कर नेहरू ने अपने आपको कांग्रेस के शीर्ष पर बैठा लिया और फिर गांधी की बात ही मानने से इनकार करने लगे। सबसे खराब बात तो यह हुर्इ कि जब दंगे से प्रभावित लोग गांधी को देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार बता रहे थे, तो नेहरू और उनकी सरकार ने इस गलत धारणा का खंडन करना उचित नहीं समझा, बलिक सच तो यह है कि उस समय की सरकार ने इस धारणा और मजबूती देने का काम ही किया, जिसके कारण दंगा पीडि़त हिंदुओं को लगने लगा कि गांधी जी के कारण बंटवारा हुआ है। शायद नाथू राम गोडसे भी इस गलत धारणा का शिकार हुआ हो। पर सवाल उठता है कि इस गलत धारणा के लिए जिम्मेदार क्या कांग्रेस और उसकी नेहरू सरकार नहीं थी।
30 जनवरी, 1948 के पहले भी गांधी की हत्या की 4 कोशिशें हो चुकी थीं। जाहिर है, उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए था और सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिशिचत करनी चाहिए था। उनके लिए एक सुरक्षित मकान में रखा जाना चाहिए था। सुरक्षा मुहैया कराया जना चाहिए था। पर वैसा कुछ भी नहीं किया गया, जब सरकार को पता था कि उनकी सुरक्षा खतरे में है और उनकी हत्या के प्रयास किए जा रहे हैं।
जाहिर है, जब गांधी की हत्या का मामला उठाया जाएगा, तो उसकी आंच कांग्रेस तक भी पहुंचेगी। (संवाद)
गांधी को किसने मारा
नन्तू बनर्जी - 2014-03-16 08:06
गांधी को किसने मारा? यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है और खड़ा हुआ है राहुल गांधी के उस बयान से जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी के हत्यारे के रुप में आरएसएस की पहचान की है। यह सवाल बहुत पुराना है और इसका जवाब आज तक सही सही तरीके से नहीं मिल पाया है। सच कहा जाय तो गांधी की हत्या अभी तक एक रहस्य है।