ऐसे ही गुणों से भरपूर डाक्टर पवन वासुदेवा भी वर्तमान समय के अन्यों की तुलना मानवीय गुणों से भरे हुए रोगी की पीड़ा को अपनी पीड़ा की तरह समझकर उसका उपचार करते हैं। यही कारण है कि उनके पास आने वाले रोगियों में ज्यादातर बुजुर्ग लोग हैं जो उनके इन्हीं गुणों के कारण उनसे मिलकर बात करने को लालायित रहते हैं। यानी इन रोगियों को डा वासुदेवा से मिलकर दवा से ज्यादा उनके मधुर और आत्मीय व्यवहार से मुग्ध रहते हैं।

वर्तमान समय में डा वासुदेवा नई दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल काॅलेज में सहायक प्रोफेसर हैं और सफदरजंग अस्पताल में मूत्र संबंधी रोगों के प्रख्यात ज्ञाता हैं। उन्होंने अपने पूर्व वरिष्ठ डाक्टर एनके मोहंती की जगह पर तैनात हैं।

1977 में जन्में डाक्टर पवन बहुत ही गहराई तक ज्ञान रखने वाले मू़त्र संबंधी रोगों के जानकार हैं। इनका अकेडमिक और व्यवहारिक क्लीनिकल जानकारी बहुत ही उम्दा है और उन्होंने 2001 में इंदिरा गांधी मेडिकल काॅलेज हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी। 2005 डा पवन ने एडिनवर्ग राॅयल काॅलेज से एमएस की डिग्री हासिल की उसके बाद में 2006 में सीएसएमएमयू लखनउ से एमसीएच की डिग्री हासिल की। उन्होंने छह माह तक एम्स में जटिल गुर्दा प्रत्यारोपण की क्लीनिकल ट्रेनिंग हासिल की। इसके अलावा डाक्टर वासुदेवा ने 2012 में आस्ट्रिया के इंसब्रक अस्पताल में न्यूरो यूरोलाॅजी और पफीमेल यूरोलाॅजी पर गहन अध्ययन किया यह कार्य उन्होंने यूरोपियन स्काॅलशिप कार्यक्रम के तहत किया था। इसके अलावा बाल ग्रिस्ट यूनिवर्सिटी ज्यूरिख, स्विटजरलैंड में रहे इसके अलावा इन्होंने न्यूरोलाॅजिस्ट के रूप में क्रेंकेनहाॅस में भी 2012 में रहे और विभिन्न प्रकार के शोध कार्यों को अंजाम दिया।

डाक्टर पवन वासुदेव की अन्य उपलब्धियों में अनगिनत पुरस्कार और सम्मान हैं। 2013 में प्रोस्टेट को लेकर इनके कई सार तथ्य प्रकाशित हो चुके हैं। इनकी 34 प्रोफेशनल आर्टिकल्स भी प्रकाशित हो चुके हैं जिसमें से 21 पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। इसके अलावा दर्जनों सार तथ्य भी विभिन्न राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में छाए रहे हैं।

भारत में शायद पहले डाॅक्टर हैं जिन्हें न्यूरो यूरोलाॅजी के क्षेत्र में यूरोपियन यूनियन की ओर से फेलोशिप मिला है जिसमें इन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की। डाक्ट पवन आस्ट्रिया के मशहूर न्यूरा यूरोलाॅजिस्ट हेलमुंट मादरशर के अधीन गहन शोध को पूरा किया है।

न्यूरा यूरोलाॅजी में समस्या के कई कारण हो सकते हैं जिसमें स्ट्रोक, रीढ़ कर हडृडी में चोट लगना, पार्किंसन आदि से संबंधित है। डाक्टर पवन का नाम उन डाक्टरों की सूची में शामिल हैं। सरकारी दस्तावेजों से मिली जानकारी के अनुसार डाक्टर पवन का नाम उन मेहनती और अत्यधिक ध्यान देने वाले डाक्टरों की सूची में शामिल है। हरेक सोमवार को डाक्टर वासुदेवा रोगियों से मिलते हैं और बिना किसी भेदभाव के सभी के साथ मित्रवत व्यवहार रखते हुए अपनों की तरह उपचार का मंत्र देते हैं। मानों वह डाक्टर न होकर ऐसा अध्यात्मिक व्यक्ति हो जो उपचार से ज्यादा अपने सद्व्यहार से मरीजों की आधी पीड़ा यूं ही हर लेता है।

डाक्टर वासुदेवा की अन्य महत्ती जानकारी और ज्ञान का क्षेत्र प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करना है। सफदर जंग अस्पताल में रोगियों की इच्छा होती है कि उन्हें डाक्टर वासुदेवा ही देखें, उपचार करें। अस्पताल में उनकी मांग को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अस्पताल के स्वागत कक्ष पर बैठी महिला को लोगों को यह आश्वासन देते हुए देखा जा सकता है कि आप धैर्य रखें आपका इलाज निश्चित रूप डाक्टर वासुदेवा ही करेंगे। लेकिन लोगों का धैर्य सैलाब बन जाता है खासकर सोमवार को। यह उनकी अप्रतिम लोकप्रियता को दर्शाता है।

यही कारण है कि डाक्टर पवन वासुदेव के रोगियों में उच्चतम स्तर तक पूर्णतः संतुष्टि का भाव देखा जा सकता है। उनके साथ कार्य करने वाले कर्मचारी भी उनकी इस लोकप्रियता को अपने पक्ष में कुछ पाने की कोशिश करते देखे जा सकते है। डाक्टर पवन के रोगियों में ़अवसाद के लक्षण अपने आप खत्म हो जाता है यह उनकी कार्य दक्षता और जीवन को नए सिरे जीने की अदम्य साहस प्रदान करने वाली बातों का प्रभाव कहें या उनके व्यवहार में झलकती आत्मविश्वास को लेकिन यह तो तय है कि धरती के भगवान कहे जाने वाले डाक्टरों की सूची में डाक्टर वासुदेवा का नाम सरकारी रिकार्ड से नहीं बल्कि उनके रोगियों में जीवन जीने की जिजीविषा की बढ़ती भावना को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। अपने जीवन के तीस बसंत देख चुके डाक्टर पवन की लोकप्रियता और उनकी यूरालाॅजी में दक्षता का लोहा तो मानना ही पड़ेगा क्योंकि रोगी को जो आत्मसंतोष मिलता है उसकी कल्पना केवल और रोगी ही कर सकता है। उनके महत्ती कार्य को देश एक दिन जरूर देखेगा और उसका इनाम भी देगा। एक सरकारी अस्पताल में रहते हुए जिस सेवा भाव से वह रोगियों का दिल जीतते हैं वह किसी प्राइवेट अस्पताल में भी नहीं मिल सकता। यह हमारे देश का सौभाग्य है कि हमारे सरकारी अस्पतालों में डाक्टर पवन वासदेवा जैसे डाक्टर भी लोगों से यश और आशीर्वाद पा रहे हैं। आज के व्यवसायिक उपचार सेवा में जो विद्रूपताएं घुस आई हैं शायद डाक्टर पवन जैसे लोगों के कारण उसकी उच्च भावना आज भी जिंदा हैं।