डा. अंकुर सिंघल एक ऐसे ही हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं जो रोगियों और भगवान के बीच सेतु का कार्य बखूबी कर रहे हैं। वे बाजू के कंकाल तंत्र, खेलों में ध्वस्त हुए कंकाल तंत्र का इलाज बखूबी करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें मदद भी पहुंचाते हैं। डा. सिंघल जन्मजात दोषों को दूर करने में भी माहिर हैं। वह रीढ़ की हड्डी में आए खिंचाव, गठिया रोग, टूट-फूट, जोड़ों की टूट, हिप की हड्डी का बदलने और हड्डी की संरचना नए रूप में लाने के विशेषज्ञ डाॅक्टर हैं।
एक निजी क्लीनिक चला रहे डा. सिंघल हड्डी रोगों के विशेषज्ञ सर्जन हैं जो रोगियों को आंतरिक तौर पर इलाज प्रदान करते हैं वह भी सहजता से। लंबे समय तक कार्य करने के बावजूद भी उनके चेहरे पर परेशानी के भाव नहीं आते और रोगियों को पूर्ण संतुष्टि प्रदान करना ही उनका अंतिम ध्येय है। वह रोगियों का इलाज आत्मीयता और लगन से करते हैं। वह रोगियों की संतुष्टि को अपना परम सौभाग्य समझते हैं और उसमें रम जाते हैं। वह कभी भी डाॅक्टरी पेशे को व्यवसायिक लाभ के रूप में नहीं देखते जैसा कि आजकल प्राइवेट डाॅक्टर रोगियों को उसके पाॅकेट के आधार पर ही इलाज प्रदान कर रहे हैं।
यही नहीं गरीब और बेसहारा रोगियों का इलाज वह बिल्कुल मुफ्त में ही करते हैं। उनका कहना है कि चाहे कोई भी हो उसके लिए बराबर हंै और उनका इलाज उनकी सामाजिक हैसियत के अनुसार नहीं बल्कि डाॅक्टरी पेशे की ईमानदारी के आधार पर किया जाता है। उनके द्वारा इलाज किए गए रोगियों में इलाज के प्रति विश्वास और डाॅक्टर के प्रति कृतज्ञता की झलक स्पष्ट दिखती है। संतुष्टि का स्तर भी उच्च है और वे अपने जीवन में अंतर का अनुभव करते हैं। इन पंक्तियों का लेखक भी डा. सिंघल की उपचार पद्धति का कायल है और उसकी प्रशंसा करना अतिरेक नहीं बल्कि उस डाॅक्टर के कार्यों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है। क्योंकि पिछले पांच सालों में विभिन्न प्रकार के पारिवारिक उपचार में डा. सिंघल की उच्च कोटि की विद्धता और सद्व्यवहार प्रशंसनीय है।
वर्तमान समय में डा. सिंघल एनसीआर क्षेत्र के तीन उत्कृष्ट अस्पतालों इंडो गल्फ हाॅस्पिटल, नोएडा, फोर्टिस हाॅस्पिटल नोएडा और शांति गोपाल हाॅस्पिटल, इंदिरापुरम मंे अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही वह इंदिरापुरम में एक निजी क्लीनिक भी चलाते हैं जहां गरीबों और जरूरतमंदों को बिना हिककिचाहट के मुफ्त इलाज की सुविधा मिल जाती है।
1979 में मेरठ में जन्मे डा. अंकुर ने 2002 में लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल काॅलेज, मेरठ से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की और एमएस आॅर्थोपेडिक की डिग्री श्री देवराज उर्स मेडिकल काॅलेज और आरएलजे हाॅस्पिटल कोलार, कर्नाटक से 2007 में स्वर्ण पदक के साथ प्राप्त किया। उनका शोध पत्र विभिन्न फै्रक्चर्स शैफ्ट आॅॅॅॅॅफ हम्मर्स को जोड़ों के रोगों में उपयोगी साबित हुआ है।
उनके शोध में मुख्य रूप से बड़े और महीन रोगों को दूर करने की पद्धति है जिसमें ट्राॅमा से लेकर शीत रोगों में कार्य आने वाले नुस्खे शामिल हैं। उनके शोध के मुख्य बिंदुओं में आपातकालीन स्थिति मंे संधिस्थलों पर स्नायुतंत्र का इलाज, मुलायम उत्तक पद्धति, चर्म का बदलाव, लटकते चर्म को पुराने रूप में लाना आदि कार्य शामिल हैं। सभी प्रकार के जोड़ों का इलाज के अलावा उन्होंने अनगिनत वर्कशाॅप में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किया जिसमें विभिन्न प्रकार के हड्डी रोग विशेषज्ञता के साथ ही जीवन रक्षक पद्धति पर सामग्री है। उन्होंने अमेरिकन काॅलेज आॅफ सर्जन, एडवांस ट्राॅमा लाइफ सपोर्ट कोर्स का सफलतापूर्वक पूरा किया है। डा. सिंघल ने छह साल का एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में पढ़ाने का अनुभव है। वह डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली में तीन साल तक रेजिडेंट डाॅक्टर रहे हैं।
डा. अंकुर की ख्याति एक अच्छे हड्डी रोग विशेषज्ञ होने के साथ ही निरंतर अध्ययनरत रहन वाले ईमानदार, दयालु, विनीत, ऊर्जावान, उत्साही, आशावादी और दक्ष डाॅक्टर हैं। वह निरंतर ही अपने रोगियों के साथ जादू वाला रिश्ता बनाते हैं ताकि उनका ध्यान इलाज में और बेहतर तरीके से लगा रहे और रोगी पूरी तरह संतुष्ट हो और उनके अच्छे इलाज के लिए वह कृतज्ञ रहे।
उनकी पत्नी डा. प्रेरणा सिंघल भी एक जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, अपने पति के निजी पक्ष को बयां करते हुए कहती हैं कि डा. सिंघल एक संपूर्ण व्यक्ति हैं जो हमेशा अपने रोगियों की बेहतरी के बारे में सोचते हैं और प्रयास करते हैं कि उनसे बहुत अच्छा ही हो। वह एक अच्छे परिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं और उनकी सोच भी लोगों को जल्द से जल्द अच्छा करने की होती है।
बहुत सारे रोगियों से बातचीत के बाद इन पंक्तियों के लेखक को डा. सिंघल के बारे में गरीब और अमीर रोगियों की धारणा का पता चला जिसमें यह तथ्य निकलकर सामने आई कि वह अच्छी देखभाल करने वाले, आशावादी, खुले विचारों वाले, जिम्मेदार और मरीजों के दोस्त हंै। वह मरीजों को सलाह देते हैं कि वह अपना मन छोटा न करें और आशावादी बनें। तीस वर्ष की अवस्था में डा. अंकुर ने हड्डी रोग के विभिन्न पहलुआंे का बारीकी से अध्ययन करके इसका लाभ लोगों तक पहुंचाने का बखूबी कार्य किया है। आज के व्यवसायिक डाॅक्टरी पेशे से दूर रहकर उन्होंने जो नजीर बनाई है निश्चित रूप से इसका लाभ गरीबों को मिला है और भविष्य में भी मिलता रहेगा। वह अपने शपथ को बखूबी हकीकत की जिंदगी में उतारा है। हम डा. सिंघल जैसे डाॅक्टरों की संख्या बढ़ते देखना चाहेंगे और उन्हें शुभकामनाएं देते हैं कि उनके कारण हमारा देश स्वस्थ रहेगा।
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असाधारण हृदय का धनी है यह हड्डी रोग विशेषज्ञ
एम.वाई. सिद्दीकी - 2015-05-14 15:20
डाॅक्टर होने का अर्थ केवल यह नहीं है कि वह केवल मरीजों को दवा दे या पट्टी बांधे या टूटे-फूटे मांस के लोथड़े को पुराने रूप में पहुंचाने का कार्य करे या फिर फटे सिर को सही रूप में लाए। जी हां, डाॅक्टर होने का मतलब यह है कि वह आदमी मानव और भगवान के बीच एक सेतु है, उक्त बातें फेलिक्स मार्टिन इबानेज ने अपनी किताब टू बी ए डाॅक्टर में लिखी है।