ताजा संकट लंदन स्थित संडे टाइम्स नाम के अखबार में छपी एक खबर से शुरू हुआ, जिसमें छपा था कि भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने विवादास्पद ललित मोदी को इंग्लैंड के प्रशासन से यात्रा दस्तावेज दिलाने में सहायता की थी। ललित मोदी 2010 में ही भारत से लंदन चले गए थे। आइपीएल के एक घोटाले का पर्दाफाश करने के कारण उनपर ही घोटालों के अनेक मुकदमे ठोंक दिए गए थे। उनके लंदन भागने के बाद उनके खिलाफ ब्लू काॅर्नर नोटिस जारी कर दिया गया था।

अब ललित मोदी सार्वजनिक तौर पर अपनी गंदगी साफ करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा है कि लड़ाई तो अभी शुरू हुई है और आगे क्या होता है मजे लेकर देखते रहिए। अपने एक ट्विट में उन्होंने यह भी कहा है कि यूपीए सरकार के पीएमओ के खिलाफ वे एक से एक बड़ी और सनसनीखेज जानकारी सार्वजनिक करने जा रहे हैं।

नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए परेशानी का सबब यह है कि भारतीय जनता पार्टी के भी अनेक लोग ललित के खेल में शामिल थे। राहत की बात यह है कि ललित मोदी का संबंध अन्य पार्टियों के नेताओं के साथ भी रहे हैं।

कांग्रेस ने मांग की है कि ललित मोदी से जुड़े सारे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की माॅनिटरिंग में एक विशेष जांच दल के द्वारा कराई जाय। उसका मानना है कि मोदी सरकार खुद ललित मोदी की सहायता कर रही है। वह कह रही है कि सुषमा स्वराज ने जो कुछ भी किया, उसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सहमति थी। कांग्रेस को भाजपा की सहयोगी शिवसेना का समर्थन मिल रहा है, हालांकि उसका समर्थन अन्य कारणों से है। शिवसेना का कहना है कि कुछ ताकतें नरेन्द्र मोदी सरकार का अस्थिर करने की साजिश रच रही है और विशष्ेा जांच दल से जांच करवाकर उन साजिशों का भंडाफोड़ किया जा सकता है।

कांग्रेस का इस मामले पर उत्साह दिखाना अनायास नहीं है। सच तो यह है कि लोकसभा चुनाव में बुरी तरह पराजित होने के बाद कांग्रेस को कोई बड़ा मुद्दा सरकार को घेरने के लिए नहीं मिल रहा था। इस मुद्दे ने उसे नई उम्मीदें दी हैं और उसके उपाध्यक्ष राहुल गांधी बहुत उत्साह के साथ इस मसले को अपनी पार्टी में जान फूंकने के लिए भुना रहे हैं।

राहुल गांधी ने सुषमा स्वराज को ही नहीं, बल्कि खुद नरेन्द्र मोदी को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि सुषमा स्वराज ने सोनिया गांधी के साथ अपने निजी संबंध अच्छे कर लिए हैं, पर राहुल गांधी इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहते। इसलिए वे सुषमा स्वराज की बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं।

नरेन्द्र मोदी की समस्या को और गहराते हुए ललित मोदी ने ही कुछ और ऐसे दस्तावेज जारी कर दिए हैं, जिनसे पता चलता है कि राजनस्था की भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने भी लंदन में उनके बने रहने में उनकी सहायता की थी। वसुंधरा राजे ने भी ललित मोदी से अपने पारिवारिक रिश्ते होने की पुष्टि की है।

यह तो अभी शुरुआत है। ललित मोदी का यह प्रकरण आने वाले दिनों मंे और भी व्यापक रूप प्राप्त कर सकता है। उनके पास अनेक पार्टियों के नेताओं से संबंधित गुप्त जानकारियां है, जिनका खुलासा होने पर भारत की राजनीति में हलचल और भी तेज हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सुषमा स्वराज को मंत्रिमंडल से नहीं बाहर करना चाहते, लेकिन इसके कारण संसद का आगामी मानसून सत्र हंगामापूर्ण हो सकता है। (संवाद)