जबतक आडवाणी ने यह नहीं कहा कि कांग्रेस ने 1975 के आपातकाल के लिए अभी भी खेद व्यक्त नहीं किया है, भाजपा के अंदर माना जा रहा था कि उसके सबसे वरिष्ठ नेता अभी भी नरेन्द्र मोदी द्वारा दरकिनार कर दिए जाने का रोना रो रहे हैं और वे नरेन्द्र मोदी को अपना निशाना बना रहे हैं।
आडवाणी का दुखी होना स्वाभाविक है। उनका पूरा राजनैतिक जीवन पद से वंचित रहने का है। जब 1990 में वे सोमनाथ से अयोध्या तक की रामरथ यात्रा कर रहे थे, तो उन्होंने सोचा होगा कि उनकी वह यात्रा उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी दिला देगी।
लेकिन वैसा हुआ नहीं। पहले वे अटलबिहारी वाजपेयी के द्वारा उस पद पर पहुंचने से वंचित कर दिए गए। हालांकि सच यह भी है कि अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के अंदर हमेशा आडवाणी से बड़े नेता माने जाते थे। लेकिन अटल के बाद आडवाणी ने नरेन्द्र मोदी के हाथों भी पटकनी खाई और भाजपा के सत्ता मे आने के बावजूद वे प्रधानमंत्री नहीं बन पाए।
यही कारण है कि उनकी आपातकाल के खतरे वाली टिप्पणी को नरेन्द्र मोदी के खिलाफ उनकी भड़ास समझी गई। अभी भी अनेक लोग ऐसा ही समझ रहे हैं।
बाद में बहुत सोच विचार कर उन्होंने सफाई भी दे दी, क्योंकि वे भारतीय जनता पार्टी के अंदर के नेताओं को और नाराज नहीं कर सकते थे। हालांकि सच यह भी है कि इन्दिरा गांधी और नरेन्द्र मोदी के बीच बहुत फर्क है और दोनों के समय की परिस्थितियों में भी बहुत फर्क है।
इन्दिरा गांधी कांग्रेस की एकछत्र नेता थीं, लेकिन नरेन्द्र मोदी के साथ ऐसी बात नहीं है। इन्दिरा गांधी अपे निर्णय को अपनी पार्टी के ऊपर थोप सकती थीं, लेकिन नरेन्द्र मोदी वैसा करने में सक्षम नहीं हैं।
अब मीडिया का विस्तार भी बहुत ज्यादा हो गया है और अब मीडिया के दफ्तरों की बिजली काटना आसान नहीं रह गया है और पत्रकारों पर अंकुश लगाना भी कठिन हो गया है।
इसलिए सवाल यह नहीं है कि जो इन्दिरा गांधी ने किया, क्या मोदी भी वही करेंगे, बल्कि असली सवाल यह है कि इन्दिरा गांधी की पार्टी अब आपातकाल के बारे में क्या सोचती है। आडवाणी ने सच ही कहा है कि कांग्रेस के किसी भी व्यक्ति ने आपातकाल लगाने के लिए अभी तक खेद जाहिर नहीं किया है। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस आज राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करने जा रही है और राहुल गांधी ने कहा है कि उनके आदर्श उनकी दादी इन्दिरा गांधी हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वे अपनी मां सोनिया गांधी की तरह उदार नहीं हैं।
अपनी दादी के प्रति राहुल का वह भाव समझने योग्य है, क्योंकि उन्होंने अपनी उस दादी को उनकी ही अंगरक्षकों द्वारा गोली खाते देखा था और वे अंगरक्षक वे थे, जिनके साथ राहुल क्रिकेट खेला करते थे।
राहुल गांधी का यह मानना है कि आपातकाल लगाकर इन्दिरा गांधी ने अपने राजनैतिक विरोधियों का मुकाबला किया था, लेकिन राहुल इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं कि इन्दिरा गांधी ने वह कदम सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए उठाया था।
आडवाणी की सफाई के बाद अब राहुल गांधी की बारी है। आपातकाल जब लगा था, तो उनकी उम्र मात्र 5 साल की थी, इसलिए उनको खुद उसके बारे में स्मरण नहीं होगा, लेकिन इतिहास उनके सामने है और इतिहास को समझकर उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे उस आपातकाल का समर्थन करते हैं या विरोध। (संवाद)
भारत
राहुल को आपातकाल पर अपनी राय स्पष्ट करनी होगी
आडवाणी की टिप्पणी सही सवाल खड़े कर रही है
अमूल्य गांगुली - 2015-06-24 06:15
आपातकाल भारत में फिर से लगने की संभावना व्यक्त करने वाला आडवाणी का बयान भाजपा के अंदर खलबली मचा रहा था। श्री आडवाणी ने उस पर सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान राहुल गांधी की ओर संकेत करते हुए दिया गया था। उनकी इस सफाई से भारतीय जनता पार्टी के अंदर राहत की सांस ली जा रही है।