सीपीएम को गहरी निराशा का सामना करना पड़ा। उसके उम्मीदवार की वहां से 10 हजार से भी ज्यादा मतों से हार हो गई। कार्तिकेयन के बेटे सबरीनाथन को कांग्रेस ने वहां से अपना उम्मीदवार बनाया था और उनकी जीत हो गई।
यह जीत कांग्रेस और खासकर उसके नेता मुख्यमंत्री चांडी के लिए काफी उत्साहवर्धक है। चांडी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे थे। उन्हें विपक्ष से ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के अंदर से भी चुनौती मिल रही थी। उनकी सरकार के गृहमंत्री रमेश चेनिंथाला उनका सिरदर्द बढ़ाते जा रहे थे। लेकिन इस उपचुनाव में मिली शानदार जीत के कारण चांडी के सभी विरोधियों की हालत पस्त होने लगी है।
अरुविक्कारा की हार चांडी के लिए घातक हो सकती थी। उनको मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग चल रही थी। इस उपचुनाव में हार के बाद उनके खिलाफ चल रही यह मांग और भी तेज हो जाती। अपने वित्त मंत्री मणि के कारण भी चांडी अपने विरोधियों का निशाना बन रहे हैं। हार के बाद वे और भी उग्र होकर चांडी को अपना निशाना बनाते। पूरे सत्तारूढ़ मोर्चे पर ही हमला काफी तीव्र हो जाता। लेकिन अब कुछ समय तक चांडी चैन की सांस ले सकते हैं।
सीपीएम के लिए यह चुनाव इसलिए भी बहुत निराशाजनक रहा, क्योंकि विधानसभा के अंदर आने वाली 8 पंचायतों मे से 7 पंचायतों मे उसके उम्मीदवार को कांग्रेस उम्मीदवार से पीछे रहना पड़ा। इनमें कई पंचायत को कांग्रेस की गढ़ हुआ करती थीं। लेकिन कांग्रेस के युवा उम्मीदवार ने उन गढ़ों को ढहा दिया। लगता है कि युवाओं को उन्होंने खासतौर से अपनी ओर आकर्षित किया।
सीपीएम ने अपनी जीत पक्की करने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था। इस उपचुनाव में जीत हासिल करने के लिए वीएस अच्युतानंदन और पी विजयन एक साथ मिलकर काम कर रहे थे। पूरे क्षेत्र की चुनाव कमान पी विजयन ने खुद अपने हाथ में थाम रखी थी और वीएस अच्युतानंदन अपनी पार्टी के उम्मीदवार के मुख्य प्रचारक बने हुए थे। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पार्टी की बुरी तरह हार हुई और 2011 से कोई भी उपचुनाव नहीं जीतने का धब्बा पार्टी अपने ऊपर से मिटा नहीं सकी।
सीपीएम और एलडीएफ को इस चुनावी हार के बाद गहन आत्ममंथन करना होगा कि आखिर पार्टी किस दिशा में जा रही है और उसका आधार क्यो कमजोर होता जा रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव मे सीपीएम को इस विधानसभा क्षेत्र के कुल 39 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे, जो घटकर 32 रह गए। 7 फीसदी वोट क्यों गिरे, इसके कारणों को उसे विश्लेषण करना होगा।
सीपीएम नेताओं का कहना है कि कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में अल्पसंख्यक मतों का ध्रुवीकरण हो गया और सीपीएम के अपने आधार में भी कमजोरी आ गई।
सीपीएम की हार के लिए भाजपा को जिम्मेदार मानना गलत नहीं होगा। भाजपा के उम्मीदवार ओ राजगोपाल तो रहे तीसरे स्थान पर, लेकिन उन्हें 34 हजार से भी ज्यादा मत मिले, जबकि लोकसभा चुनाव के दौरान इस क्षेत्र से भाजपा को 6900 वोट ही मिले थे। इसका मतलब है कि सीपीएम को मिलने वाले हिन्दू वोटों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर शिफ्ट हो गया और भाजपा की प्रतिक्रिया में सीपीएम का अल्पसंख्यक वोट कांग्रेस की ओर खिसक गया।
यह स्थिति सीपीएम के लिए काफी खतरनाक है। ऐसी स्थिति पश्चिम बंगाल में भी पैदा हो गई है, जिसके कारण सीपीएम वहां लगातार अपना आधार खोती जा रही है। (संवाद)
भारत: केरल
अरुविक्कारा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत
सीपीएम का सच्चाई से सामना
पी श्रीकुमारन - 2015-07-01 16:11
तिरुअनंतपुरमः अरुविक्कारा विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव से सीपीएम और उसके नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को बहुत उम्मीद थी। वह सीट विधानसभा के अध्यक्ष जी कार्तिकेयन के इस्तीफे से खाली हुई थी।