इधर कुछ दिनों से श्री नाईक ने प्रदेश सरकार की आलोचना सार्वजनिक मंचों से भी करनी शुरू कर दी है। वे युवा मुख्यमंत्री को खासतौर से अपनी आलोचना का निशाना बना रहे हैं। वे सरकार के कामकाज को लेकर प्रदेश की विपक्षी पार्टियों के नेताओं को पत्र भी लिख रहे हैं। वे सार्वजनिक तौर पर कह रहे हैं कि कानून और सुरक्षा की स्थापना करने मे मुख्यमंत्री असफल रहे हैं और आम आदमी राजनैतिक गुंडों के सामने असहाय हो गया है।
राज्यपाल द्वारा बार बार पत्र लिखे जाने से परेशान होकर समाजवादी पार्टी ने अपने राष्ट्रीय अधिवेशन मे एक प्रस्ताव भी पारित कर दिया, जिसमें कहा गया कि राज्यपाल को सवंैधानिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए और उन्हें अपने हद में ही रहना चाहिए। जवाब मे राज्यपाल ने कहा कि उनका काम यह देखना है कि सरकार संवैधानिक प्रावधानों के तहत काम कर रही है या नहीं।
इतना ही नहीं, राज्यपाल ने अपना पद संभालने के बाद तीन महीना पूरे होने पर अपने कामकाज का लेखा देते हुए एक रिपोर्ट जारी कर दी। उसमें उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सलाह दे डाली कि वे कानून व्यवस्था के मामले पर ज्यादा गंभीरता दिखाएं। श्री नाईक भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हुआ करते थे। वे महाराष्ट्र से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। वे अटल बिहारी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
श्री नाईक ने मुख्यमंत्री को अनेक पत्र लिखे और कहा कि मायावती सरकार के दौरान लोकायुक्त ने जिन राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले पकड़े थे, उनके खिलाफ अखिलेश सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। राज्यपाल ने पत्र लिखकर अखिलेश यादव को नया लोकायुक्त नियुक्त करने को कहा, क्योंकि पुराने लोकायुक्त की कार्यावधि बहुत पहले समाप्त हो चुकी है।
पिछले दिनों प्रदेश सरकार की हालत उस समय दयनीय हो गई, जब राज्यपाल ने विधान परिषद में मनोनयन के लिए भेजी गई 10 लोगों की सूची को वापस कर दिया। मुलायम सिंह यादव को भी उसके कारण झटका लगा। अखिलेश और मुलायम राज्यपाल से कई बार मिले और उन्हें विधानपार्षदों को मनोनित करने के लिए आदेश जारी करने को कहा। लेकिन राज्यपाल ने बाप और बेटे की बात नहीं मानी और उस सूची में शामिल लोगों की योग्यता पर सवाल उठाते रहे। उसी बीच उस सूची में शामिल एक बिल्डर के ठिकानों पर आय कर अधिकारियों ने छापामारी भी की।
राज्यपाल ने उस समय अखिलेश को और भी क्रोधित कर दिया, जब उन्होंने चिट्ठी लिखकर प्रदेश में एक पत्रकार की हत्या का मामला उठाया। कहा जाता है कि एक मंत्री भ्रष्टाचार को उजागर करने के कारण उस पत्रकार की हत्या हुई थी। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि जिस तरह से उस हत्या की जांच की जा रही है, उससे वे खुश नहीं हैं। उसके पहले उन्होंने यादव सिंह के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। गौरतलब है कि यादव सिंह के ठिकानों पर छापामारी कर आयकर विभाग ने करोडों रूपये की उनकी संपत्ति का पता लगाया था।
राज्यपाल की अति सक्रियता से मुख्यमंत्री खुश नहीं हैं और दूसरी तरफ भाजपा नेताओं की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। (संवाद)
भारत
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का मुख्यमंत्री से टकराव
समाजवादी पार्टी बता रही है भाजपा को जिम्मेदार
प्रदीप कपूर - 2015-07-02 15:13
लखनऊः उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक उत्तर प्रदेश सरकार और खासकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ लगातार टकराव की मुद्रा में रहते हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ साथ इस टकराव के राजनैतिक मायने निकाले जाने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि राज्यपाल नाईक भारतीय जनता पार्टी को राजनैतिक लाभ पहुंचाने के इरादे से ऐसा कर रहे हैं और वैसा कर श्री नाईक एक संवैधानिक पद की अवमानना कर रहे हैं।