कांग्रेस का पिछले लोकसभा चुनाव में लगभग सफाया हो गया था। चुनाव के बाद पार्टी में चैतरफा मायूसी और हताशा का माहौल था। बाद में कुछ राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों मे भी पार्टी को धूल चाटनी पड़ी। उसके नेताओं को यह उम्मीद नहीं थी कि केन्द्र सरकार एक साल के अन्दर ही कुछ ऐसे मुद्दे उसे थमा देगी, जिसके बूते उनकी पार्टी में जान आ जाएगी। भूमि अधिग्रहण को लेकर बार बार जारी किए गए अध्यादेशों में कांग्रेस को एक सुनहरा मौका दे दिया। 2013 में सर्वसहमति से बनाए गए भूमि अधिग्रहण कानून को बदलने की मोदी सरकार की कोशिशों ने कांग्रेस को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया। लेकिन पिछले संसद सत्र में कांग्रेस अकेली पड़ गई सी दिखाई पड़ रही थी, पर इस बार उसे अन्य विपक्षी पार्टियों का साथ मिलने की भी उम्मीद है।

भाजपा की कमजोरियों का फायदा सिर्फ भारतीय जनता पार्टी नहीं उठा रही है, बल्कि अन्य अनेक पार्टियां अपने अपने हितो में इनका फायदा उठा रही है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी हमले तेज कर दिए हैं। बिहार में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा रहे हैं। उन्होंने सुषमा स्वराज व भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अन्य भाजपा नेताओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है और उनके निशाने के रेंज में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी हैं। आम आदमी पार्टी भी देशभर में कांग्रेस के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही है और वह राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने के कार्यक्रम बना रही है।

मानसून सत्र के दौरान सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे, स्मृति ईरानी और पंकजा मुंडे के इस्तीफे की मांग को लेकर भारी हंगामा मचाया जाएगा। प्रधानमंत्री की चुप्पी को तोड़ने के लिए उन्हें उकसाया जाएगा। सुषमा स्वराज पर कानून के भगोड़े ललित मोदी की सहायता करने और उनसे फायदा पाने का आरोप सुषमा स्वराज पर है। गौरतलब है कि सुषमा के पति ललित मोदी के स्वामित्व वाली कंपनी के पेरोल पर हैं और सुषमा ने उन्हें फायदा पहुंचाया है। वसुंधरा राजे सिंधिया पर भी ललित मोदी को देश से भागकर दूसरे देश में ठहरने मे सहायता करने और उनसे खुद वित्तीय सहायता पाने का आरोप है। इन आरोपों के पक्ष में ठोस सबूत भी मौजूद हैं। उधर मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर शपथ देकर निर्वाचन आयोग को गलत जानकारी देने का आरोप है। तीन बार नामांकन दाखिल करते समय उन्होंने तीन तरह की जानकारियां उपलब्ध कराई थीं। पंकजा मुृडे पर गलत तरह से ठेका देने का आरोप है। बिना टेंडर आमंत्रित किए हुए अपनी पसंद के ठेकेदारों को उन्होंने ठेके दे दिए थे।

एक साथ इतने सारे आरोप भारतीय जनता पार्टी पर लग रहे हैं और भाजपा के नेता सही तरीके से इनका जवाब भी नहीं दे पा रहे हैं। वे भ्रष्टाचार को ही परिभाषित करने में लगे हुए हैं और लोगों के बीच उनके द्वारा किया गया बचाव मजाक का कारण बना हुआ है।

सरकार को आगामी सत्र में अनेक विधेयक पारित करवाने हैं। भूमि विधेयक के साथ साथ जीएसटी पर भी सरकार संसद की मुहर चाहती है। लेकिन जिस तरह का राजनैतिक माहौल बना हुआ है, उसे देखते हुए साफ देखा जा सकता है कि संसद बहुत ही हंगामेदार होगी और उससे विधेयक पारित करवाना सरकार के लिए बहुत ही टेढ़ी खीर साबित होगी। (संवाद)