गौरतलब है कि व्यापम घोटाले में करीब 2000 लोग जेल में हैं और 1000 से भी ज्यादा लोग फरार हैं। उन आरोपियों में अनेक लोगों की मौत हो गई। मौत के अलग अलग आंकड़े दिए जा रहे हैं। एक अखबार के विश्लेषण के अनुसार मौत के शिकार हुए 37 लोगों में से 23 की मौत अप्राकृतिक थी।
मारने वालों में 9 लोग ऐसे थे, जो भिन्न बीमारियों के शिकार हुए। 10 लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में हुई। 4 के बारे में कहा गया कि उन्होंने आत्महत्या की है। यह विश्लेषण उन आंकड़ों के आधार पर किया है, जिन आंकड़ों को स्पेशल टास्क फोर्स ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के सामने रखा।
27 और 28 जून को दो और लोग मरे। सबसे ताजा मौत नरेन्द्र सिंह तोमर ही है। वह 29 साल का था और इन्दौर सेंट्रल जेल में बंद था। उसकी मौत के दो अलग अलग कारण बताए गए। जेल अधिकारियों ने कहा कि तोमर के सीने में दर्द हुआ था और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं उसकी मौत हो गई। लेकिन अस्पताल का कहना है कि तोमर को पेट में दर्द के बाद भर्ती कराया गया था। तोमर के पिता का कहना है कि 29 साल के युवक की मौत हार्ट अटैक से कैसे हो सकती है।
कुछ सप्ताह पहले विजय सिंह नाम का एक फार्मासिस्ट छत्तीसगढ़ में मृत पाया गया। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि ये हत्याएं उन लोगों द्वारा कराई जा रही है, जो अपने आपको व्यापम घोटाले में बचाना चाहते हैं। जांच करने से पता चलता है कि मरने वालों में 13 ऐसे लोग भी हैं, जिसका उल्लेख एसटीएफ ने नहीं किया है। उनकी मौत रहस्य के परदे से लिपटी हुई है।
मरने वालों मंे 13 वे छात्र हैं जिन्होंने गलत तरीके के इस्तेमाल से मेडिकल प्रवेश की परीक्षा पास की थी। जबलपुर मेडिकल काॅलेज के डीके सकाले भी मरने वालों में शामिल हैं। अपने घर मे ही जल जाने से उनकी मौत हो गई थी। उनकी मौत पर से रहस्य का परदा अभी तक नहीं उठ पाया है।
पुलिस का कहना है कि सकाले ने आत्महत्या की थी। सूत्रों का कहना है कि जब सलाके की मौत हुई थी, तो वे उन मेडिकल छात्रों के दस्तावेजों की जांच कर रहे थे, जिन पर घोटालों में शामिल होने का शक था। एक डाॅक्टर के दावे के अनुसार सकाले की हत्या की गई थी और उन्हें जलाने के लिए लेजर टेक्नालाॅजी का इस्तेमाल किया गया था। उनका पूछना है कि सलाके खुद एक डाॅक्टर थे और यदि उन्हें आत्महत्या करनी ही होती, तो अपने को जलाने जैसे दुखदायी तरीका क्यों अपनाते? वे आत्महत्या का वह तरीका अपनाते, जिससे मरने के पहले कष्ट नहीं होता हो।
प्रदेश के गृहमंत्री बाबूलाल गौर ने उन मौतों को स्वाभाविक बताया है। उनका कहना है कि जो आया है, सो जाएगा। लेकिन एसटीएफ ने कोर्ट में जो हलफनामा दिया है, उसमें हत्याओं के पीछे साजिश का भी हाथ बताया है। जांचकत्र्ताओं का कहना है कि इन मौतों के कारण जांच में बाधाएं आ रही हैं। जांच के तार बीच में टूट जाते हैं और अन्य घोटालेबाज जांच की जद से बाहर हो जाते हैं। मरने वालों में वे भी शामिल हैं, जिन्होंने इन घोटालों का पर्दाफाश किया। घोटाले में शामिल और उनके सहयोगी तो मर ही रहे हैं। उनके साथ साथ गवाहों की भी मौत हो रही है। (संवाद)
भारत
व्यापम घोटाले के आरोपियों की मौत
मध्यप्रदेश सरकार सांसत में
एल एस हरदेनिया - 2015-07-04 14:15
भोपालः व्यापम घोटाले में फंसे आरोपियों की एक के बाद एक मौत ने मध्यप्रदेश को हिलाकर रख दिया है। उनकी मौत बहुत ही रहस्यमय परिस्थितियों में हो रही है।