शुक्रवार, 8 सितंबर, 2006
उम्मीदें जगाकर सपने चुराने का खेल
बढ़ रही है औरतों और लड़कियों की तस्करी
ज्ञान पाठक
मादक पदार्थों और हथियारों के बाद आदमियों का अवैध व्यापार तीसरा सर्वाधिक लाभ का (अवैध) पेशा है जिसका विश्व बाजार सात से 12 अरब डालर के बीच का है। आदमियों के अवैध व्यापार में औरतों और लड़कियों की संख्या लगभग 80 प्रतिशत होती है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यू एन एफ पी ए) की ताजा रपट के अनुसार उम्मीदें जगाकर सपने चुराने का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। भारत के लिए चिंता की बात यह कि इन अवैध व्यापारों में यहां के लोग अगली पांत में चल रहे हैं।
आदमियों की तस्करी और खरीद फरोख्त का धंधा अन्य किसी भी अवैध धंधे की तरह इतना गुपचुप ढंग से होता है कि इसके बारे में सही आंकड़ों का पता नहीं है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आई एल ओ) का कहना है कि 24.5 लाख लोग इस समय इस धंधे का शिकार होकर भारी शोषण और पीड़ा की जिंदगी जी रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या में प्रत्येक साल 12 लाख की वृद्धि हो रही है, देशी और अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर चलाये जाने वाले इस धंधे में। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रति वर्ष छह से आठ लाख औरतों, बच्चों और मर्दों की तस्तरी होती है जिनमें से अधिकांश का व्यापारिक यौन शोषण होता है। उसके अनुसार इनमें 50 प्रति शत बच्चे होते हैं तथा औरतों के मिलाकर यह 80 प्रति शत तक पहुंच जाता है।
रपट के अनुसार तस्करी से ले जायी जाने वाली औरतों से अमूमन वेश्यावृत्ति करवायी जाती है। पतन के इस नये युग में ‘सेक्स टूरिज्म’ में भी उन्हें लगाया जाता है। कुछ की ‘वाणिज्यिक विवाह’ करवायी जाती है। इनसे निपटने के बाद या किन्हीं अन्य कारणों से शेष को घरेलू या अन्य ऐसे ही कार्यों में लगाया जाता है।
रपट में इस बात का खुलासा किया गया है कि मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी की तरह आदमियों की तस्करी और अवैध व्यापार भी संगठित अपराधी गिरोहों द्वारा की जाती है। रपट में यह जरुर बताया गया कि सालाना 12 अरब डालर तक की कमाई आदमियों को बेचकर की जाती है, लेकिन साथ में यह भी जोड़ दिया गया कि सही आंकड़ा बताना मुश्किल है। कमाई का यह आंकड़ा तो पहली बार आदमियों को बेचकर की जाने वाली प्रारंभिक कमाई है।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन का आकलन है कि एक बार तस्करी से विदेशों में पहुंच जाने के बाद इस धंधे से अतिरिक्त सालाना कमाई 32 अरब डालर की होने लगती है। आधा धन विकसित औद्यौगिक देशों में सृजित होता है जबकि एक तिहाई एशिया के देशों में।
रपट में बताया गया कि वैश्वीरण के नये दौर में अपराध के बाजार का भी अंतर्राष्ट्रीयकरण हो जाने से स्तिति गंभीर हो गयी है। अपराध जगत का सिंडिकेशन इतना विस्तृत हो गया है जितना की पहले कभी नहीं था।
अधिकांश लोग बेहतर जिंदगी की तलाश में अच्छी नौकरी के आश्वासनों के जाल में फंसकर इसके शिकार हो जाते हैं, रपट में बताया गया। विभिन्न देशों द्वारा प्रव्रजन के नियमों को कठोर किये जाने के कारण भी अवैध ढंग से प्रव्रजन का धंधा तेजी से बढ़ा है।
मानव तस्करी कानूनी और गैरकानूनी दोनों तराकों से हो रही है। ‘मेल-आर्डर दुल्हन’ एक नया स्वरुप है। कानूनी तरीके से औरतें मंगायी जाती हैं और बाद में उन्हें यौन व्यापार में धकेल दिया जाता है। अन्य देशों की नागरिकता के लिए भी ‘व्यापारिक विवाह’ का धंधा चलाया जा रहा है।
सभ्य होती जा रही दुनिया का दावा करने वाले आज के धनी वर्गें या देशों में इस धंधे से आदमी, विशेषकर औरतों और बच्चियों, को हासिल करने की मांग पिछले कुछ समय से बढ़ती गयी है। उधर गरीबी और बेरोजगारी भी बेइंतहा है। इनको रोजगार का लालच देकर ठगा जाता है। ठगने वाले अधिकांश लोग पूर्व परिचित होते हैं – जो सर्बिया और मोंटेनिग्रो में 64 प्रति शत तक है। मानव तस्करी के नेटवर्क में अपराधी सरगनों के साथ भारी संख्या में भ्रष्ट अधिकारी भी शामिल हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया तस्करी किये गये लोगों के सबसे बड़े क्षेत्र हैं, जहां इनकी संख्या क्रमशः 2.25 और 1.50 लाख बतायी गयी है। अमेरिकी विदेश विभाग के आकलन के अनुसार पूर्व सोवियत संघ क्षेत्र के देशों से प्रति वर्ष 100000, पूर्वी यूरोप के देशों से 75000, अफ्रीका से 50000 तथा लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों से लगभग 100000 लोगों की तस्करी होती है।
एशिया में तस्करी से ले जायी गयी अधिकांश औरतें एशिया में ही रह जाती हैं। ग्रेटर मिकांग और इंडोनेशिया प्रमुख मानव तस्करी क्षेत्र हैं। थाइलैंड इनका प्रमुख ट्रांजिट ठिकाना होता है जहां से इन्हें अन्य एशियाई देशों, आस्ट्रेलिया, अमेरिका और पश्चिम यूरोप के देशों में भेज दिया जाता है।
भारत और पाकिस्तान तस्तरी की औरतों और लड़कियों का प्रमुख ठिकाना भी है और ट्रंजिट पाइंट भी। यहां से इनमें से अधिकांश को दक्षिण-पूर्व के देशों में भेजा जाता है। लड़कियों की तस्करी की सबसे बड़ी समस्या दक्षिण एशिया में ही है।
इस समय अमेरिका में 50 से ज्यादा देशों से औरतों और लड़कियों की तस्करी हो रही है। #
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से
उम्मीदें जगाकर सपने ...
System Administrator - 2007-10-20 04:54
मादक पदार्थों और हथियारों के बाद आदमियों का अवैध व्यापार तीसरा सर्वाधिक लाभ का (अवैध) पेशा है जिसका विश्व बाजार सात से 12 अरब डालर के बीच का है। आदमियों के अवैध व्यापार में औरतों और लड़कियों की संख्या लगभग 80 प्रतिशत होती है।