इस राज्य की वर्तमान सरकार बेरोजगारी दूर करने की दिशा में स्वरोजगार को एक बेहतर उपाय बता रही है पर केवल स्वरोजगार से ही इस ज्वलंत समस्या का समाधान होता दिखाई नहीं दे रहा है। आज उŸाराखंड के लाखों बेरोजगार युवा उŸाराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले सड़क पर उतर आये है, जो वर्तमान सरकार की नीतियों को बेरोजगारी दूर करने की दिशा में एक छलावा बता रहे है। इस राज्य के बेरोजगार युवको का कहना है कि सरकार खाली पड़े पदों को भर नहीं रहीं है और जिनकी विज्ञप्तियां निकली है, उसकी परीक्षाएं आयोजित नहीं कर रही है। प्रधानमंत्री कौशल रोजगार योजना केवल दिखावा मात्र है जिससे यहां की बेरोजगारी की ज्वलंत समस्या का निदान कतई संभव नहीं ।

यहां उद्योग की कमी है और यहां का भौगालिक परिवेश उबड़ - खाबड़ होने के कारण खेती हो पाना संभव नहीं । यह पूरा प्रदेश पहाड़ों ,घाटियों नदियों, तालाब एवं झीलों से भरापूरा है। बाढ़ की आई आपदा इस प्रदेश के हालात को और बिगाड़ देती है। भूस्खलन एवं भूकंप की घटनाएं भी आम जनजीवन को संकट में बराबर डाले रहती है। प्रदेश की सरकारें बदलती रही पर बेरोजगारी निदान के ठोस उपाय आज तक नहीं हो पाये जिससे यहां पलायन की स्थिति बनी हुई है। इसके लिये वहां का विपक्ष कांगे्रस एवं भाजपा दोनों को जिम्मेवार मानता है ।

ऐसा नहीं कि इस राज्य में रोजगार की कोई संभावनाएं नहीं पर इस दिशा में आने वाली किसी भी पार्टी की सरकार ने सकरात्मक कदम उठाने के बजाय एक दूसरे पर आरोप लगाती रही है। चुनाव के समय सभी राजनीतिक पार्टियां रोजगार देने की नई - नई योजनाएं लाने की घोषणएं तो करती है पर सŸाा में आते ही सारी योजनाएं कागजी बनकर रह जाती है। जिससे आज तक इस प्रदेश में बेराजगारी की समस्याएं लगातार बड़ती ही जा रही है। एक आकड़े के मुताबिक आज से 18 वर्ष पूर्व जब राज्य की स्थापना हुई, बेरोजगारों की संख्या 3 लाख के आस - पास थी जो अब यह बढ़कर 10 लाख के आस - पास पहुंच गई। इस तरह के हालात यदि बने रहे जहां प्रति वर्ष एक लाख युवा बेराजगार की सूची में शामिल होते जा रहे है, बेरोजगारों की एक ऐसी लम्बी फौज प्रदेश में खड़ी हो जायेगी जो किसी भी सरकार के लिये मुसीबत बन सकती है जिसका समाधान करना आसान नहीं रह जायेगा । केवल कागजी योजनाएं इस ज्वलंत समस्या का निदान नहीं हो सकती। आज वर्तमान सरकार की इस दिशा में चल रही तमाम योजनाएं स्वरोजगार के नाम बेरोजगारी को और बढ़ावा दे रही है। इन योजनाओ में सरकारी कोष से काफी धन कर्ज के रूप में दिया तो जा रहा पर इसका कितना उपयोग सही दिशा में हो रहा है , इसका कोई निरीक्षण नहीं । जिससे आने वाले समय में वीआरएस की तरह विभिन्न योजनाओं के तहत बेरोजगार युवाओं को लुभाने की दिशा में कर्ज रूप में दी जा रही सौगात नये रोजगार सृृजित करने के बजाय बेराजगारी एक नया पैमाना खड़ कर सकती है। जिससे इस प्रदेश से पलायन की स्थिति पहले से भी ज्यदा हो सकती है।

यह प्रदेश मंदिरों एवं प्राकृृतिक छटा से अच्छादित रंग - विरंगी दृृश्य से भरपूर घाटियों का मनोरम स्थल है जहां प्रतिवर्ष लाखों सैलानी एवं धार्मिक भावनाओं से जुड़े लोग लगातार आते रहते है। इनके लिये सरकार प्रदेश में जगह - जगह बेहतर पर्यटन केन्द्र खोलकर बेरोजगारो को नियमित रोजगार देने का सुअवसर उपलब्ध करा सकती है। इस प्रदेश में मार्ग की भी ज्वलंत समस्याएं है जिसे सही कर उद्यमियों को नये उद्योग लगाने की दिशा में प्रेरित कर बेरोजगारी दूर की जा सकती है। इस प्रदेश की सबसे बड़ी ज्वलंत समस्या बाढ, भूकंप एवं भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का है जिसका सही हल निकालकर रोजगार देनेे के संसाधन उद्योग लगाने की संभावनाएं बनाई जा सकती है । जिससे प्रदेश में बेराजगारी की ज्वलंत समस्याएं दूर कर पलायन को रोका जा सकता है। आज भी लोग अपने प्रदेश, अपनी मिट््टी, अपने गांव से बहुत प्यार करते है जिसे किसी भी हालत में छोड़ना नहीं चाहते पर पेट के लिये सब कुछ नहीं चाहते हुए भी करना पड़ता है। यदि प्रदेश की सरकार सही मायने में बेरोजगारी दूर करने के सकरात्मक प्रयास करेगी तो इस प्रदेश में अन्य प्रदेश से रोजगार उपलब्ध कराने की बहुत संभावनाएं है जिसपर सच्चे मन से कार्य करने की आवश्यकता है। प्रदेश में धारचूला और मुनस्यारी जैसे अनेक स्थल है जहां के पूर्वजों से कालीन, कंबल, ऊनी वस्त्र बनाने के हुनर मिले है जिन्हें घरेलू उद्योग में विकसित कर रोजगार के अवसर दिये जा सकते है। पहाड़ो पर अनेक जडी बुटियां , फल - फूल ऐसे उपलब्ध है जिनका प्रयोग दवाई कंपनियां खोलकर किया जा सकता है। इस तरह प्रदेश में रोजगार के अवसर तलाश कर प्रदेश को बेरोजगारी जैसी ज्वलंत समस्याओं से मुक्ति दिलाई जा सकती है। (संवाद)