इससे पहले यह महसूस किया गया था कि मायावती दलित-मुस्लिम कार्ड खेल रही हैं। यही कारण है कि उन्होंने लोकसभा में दानिश अली को पार्टी का नेता नियुक्त किया। लेकिन मायावती अब बुरी तरह से डरी हुई हैं, क्योंकि बड़ी तेजी से भीम आर्मी के चंद्र शेखर रावण बड़े पैमाने पर दलित नेता के रूप में उभरे हैं। रावण ने हाल ही में सीएए और एनआरसी के खिलाफ जामा मस्जिद के पास बड़े पैमाने पर प्रदर्शन के माध्यम से अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था। हजारों दलित युवा रावण के साथ वहां एकत्र हो गए थे। उसके पहले दिल्ली में ही रविदास मंदिर के लिए हुए आंदोलन में भी रावण ने दलितों का नेतृत्व किया था।
निराश मायावती ने रावण पर भाजपा का दामन थामने का आरोप लगाया और उत्तर प्रदेश के लोगों को दिल्ली में धरना देने पर आपत्ति जताई। आधार के तीव्र क्षरण और एक के बाद एक वरिष्ठ नेताओं के चले जाने से मायावती चिंतित हैं।
मायावती किसी से भी नहीं मिलती। उसके ठीक विपरीत चंद्रशेखर रावण हमेशा नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए उपलब्ध रहते हैं। बसपा प्रमुख मायावती को तब एक और बड़ा झटका लगा था, जब उनकी पार्टी के सभी विधायक उन्हें छोड़कर राजस्थान में कांग्रेस में शामिल हो गए। अन्य राज्यों में भी बसपा पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बड़े पलायन का सामना कर रही है। हताशा से बाहर आने के लिए मायावती पार्टी संगठन में प्रयोग करने में व्यस्त हैं।
इससे पहले मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को सक्रिय राजनीति में लाकर उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बना दिया था। लेकिन जब उनका नाम कुछ विवादों में जुड़ा हुआ था, तो उन्होंने उन्हें हटा दिया और उनके बेटे आकाश को लाकर एक महत्वपूर्ण पद दिया गया है।
कुछ समय पहले, उन्होंने पार्टी समन्वयकों को महत्व दिया, लेकिन जब यह प्रणाली चुनावों में फायदा पहुंचाने में विफल रही, तो उन्होंने तुरंत जोनल सिस्टम का निर्माण कर दिया।
अपने गुरु कांशीराम के विपरीत, जो अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए उपलब्ध थे, मायावती ने खुद को पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए दुर्गम बना दिया है। वह बहुत कम नेताओं से मिलती हैं और जनता के साथ पूरी तरह से अलग हो गई हैं। मायावती ने संसद के अंदर और बाहर सीएए और एनआरसी का विरोध किया है, लेकिन उन्होंने किसी भी विरोध प्रदर्शन या विरोध की बैठक से जाने से इनकार कर दिया।
मायावती चिंतित हैं कि भाजपा और समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने उनके गैर-जाटव समर्थन आधार को खाने में सफलता हासिल की है, यही कारण है कि कभी-कभी वह राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाए रखने के लिए मुस्लिमों और अब ब्राह्मणों की ओर देखती हैं।
मायावती का मानना है कि शक्तिशाली ब्राह्मण समुदाय बीजेपी से नाराज है क्योकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रशासन में उन्हें महत्वपूर्ण पद देने के लिए आक्रामक ठाकुर कार्ड खेल रहे हैं। (संवाद)
अपना आधार मजबूत करने के लिए माया ने खेला ब्राह्मण कार्ड
भीम आर्मी की चुनौती का सामना करने के लिए नई रणनीति
प्रदीप कपूर - 2020-01-17 12:05
लखनऊः भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण के उदय और अपने समर्थन आधार में तीव्र क्षरण से त्रस्त बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने युवा रितेश पांडे को लोकसभा में बसपा का नेता नियुक्त करके आक्रामक ब्राह्मण कार्ड खेला है। लोकसभा चुनाव के बाद से शीर्ष से लेकर राज्य स्तर तक के पार्टी नेताओं में यह चैथा फेरबदल है।