राजपूत ने कहा कि नए साल को सेलिब्रेट करने के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया गया और इसका डिनर डिप्लोमेसी ’से कोई लेना-देना नहीं है जैसा कि राज्य के मीडिया के एक हिस्से में कहा जा रहा है।

राज्य विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए राजपूत ने कहा कि वे खुश हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया रात्रि भोज में भाग लेंगे जहां सरकार का समर्थन करने वाले सभी मंत्री, मुख्यमंत्री और विधायक मौजूद रहेंगे। ष्रात के खाने में कोई राजनीति शामिल नहीं है।

रात के खाने और पीसीसी कार्यालय सिंधिया की विजिट के अलावा कुछ अन्य व्यक्तिगत व्यस्तताओं में सिंधिया शामिल हुए। पिछले साल 10-11 जुलाई को जब वह शहर आए थे, तब उनकी यात्रा का कार्यक्रम भी ऐसा ही था। तब स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावत ने रात्रिभोज की मेजबानी की थी जिसमें मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों ने हिस्सा लिया था। उस दौरान सिंधिया कैंप ने खुले तौर पर ‘उपेक्षित’ होने की शिकायत की थी।

सिलावत ने तब कहा था कि रात्रिभोज का आयोजन कांग्रेस में एकता दिखाने और बीजेपी द्वारा प्रचारित इस धारणा को दूर करने के लिए किया गया था कि यह सरकार नहीं बचेगी। राजनीतिक स्थिति कमोबेश वैसी ही बनी हुई है, सिवाय इस तथ्य के कि कमलनाथ सरकार अब और अधिक स्थिर और आश्वस्त दिखती है, लेकिन अप्रैल में होने वाले चुनाव में पीसीसी प्रमुख और सिंधिया के उच्च सदन में नामांकन जैसे मुद्दे अभी भी एजेंडे में शीर्ष पर हैं।

राजपूत जो भी कहें, डिनर और सिंधिया की पीसीसी कार्यालय की यात्रा दोनों को सिंधिया को पीसीसी अध्यक्ष पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में पेश करने के उद्देश्य से शक्ति प्रदर्शन के रूप में माना जा रहा है। वर्तमान में कमलनाथ मुख्यमंत्री और पीसीसी प्रमुख दोनों का कार्यभार संभाल रहे हैं। लेकिन राज्य कांग्रेस में कुछ ऐसी मजबूत ताकतें हैं जो नहीं चाहती हैं कि सिंधिया पीसीसी प्रमुख बनें।

अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए हजारों सिंधिया समर्थक भोपाल में पीसीसी कार्यालय पहुंचे और उनका जोरदार स्वागत किया। अति उत्साही समर्थकों ने नेता से मिलने के लिए दरवाजा तोड़ दिया। समर्थकों या प्रशंसकों ने नेता पर गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा की और उन्हें पीसीसी अध्यक्ष नियुक्त करने का नारा बुलंद किया। उनमें से कुछ ने उन्हें राज्यसभा का टिकट देने की मांग की।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मैं राजनीतिज्ञ नहीं हूं, मैं जनसेवक हूं।’

कुछ समर्थकों ने दरवाजा तोड़ दिया और हॉल में प्रवेश किया जहां सिंधिया बैठे थे। सिंधिया ने समर्थकों को शांत किया और उनसे मिलने के लिए एक-एक कर आने को कहा।

एआईसीसी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ बैठक के बारे में मीडिया से बात करते हुए, उन्होंने कहा, “दिसंबर 2018 से मैंने एक राजनीतिज्ञ के रूप में नहीं, बल्कि एक जनसेवक के रूप में खुद को ढालना तय किया। मैं किसी पद (पीसीसी अध्यक्ष और राज्यसभा के सदस्य) की दौड़ में नहीं हूं।

उन्होंने पीसीसी कार्यालय का दौरा करने और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने के अपने मकसद के बारे में जानकारी दी, “मप्र में आम लोगों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों की आवाज सुनी जानी चाहिए। जब भी मैं भोपाल आता हूं, मैं हमेशा पार्टी के लोगों से मिलने की कोशिश करता हूं।

सरकार के खिलाफ मजदूरों की पीड़ा पर भी चर्चा हुई। ‘सरकार को श्रमिकों की अपील सुननी चाहिए’ उन्होंने कहा।

केवल कांग्रेस ही नहीं, यहाँ तक कि भाजपा को भी अपना प्रदेश अध्यक्ष चुनने में गंभीर कठिनाई हो रही है। वर्तमान प्रभारी राकेश सिंह का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका है। राज्य प्रमुख के पद के लिए वरिष्ठ नेताओं के बीच गहन लाॅबिइंग ने शुक्रवार को पार्टी के मुख्यालय में बुलाई गई बैठक के दौरान गहरे विभाजन को उजागर किया है।

बीजेपी में इस बात को लेकर लोग आश्चर्यचकित हो रहे हैं कि हाईकमान ने संगठनात्मक चुनाव कराने के बजाय नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा करने का फैसला किया है।

देर रात पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाया गया। अटकलें लगाई जा रही हैं कि वर्तमान प्रमुख राकेश सिंह के लिए इस पद को फिर से बनाए रखना मुश्किल होगा। (संवाद)