उनके लिए, देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य में अपने आपको राजनीतिक रूप से जीवित बनाए रखना सबसे मुख्य मुद्दा है। और उन्होंने महामारी के दौरान फैसला किया है कि प्रियंका गांधी द्वारा कांग्रेस के संगठन को मजबूत करना उनकी बसपा के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है। वह अब भाजपा को अपने लिए बड़ा खतरा नहीं मानतीं। यूपी में प्रवासी कामगारों के परिवहन के लिए बसों के आयोजन के विवाद पर उनका सार्वजनिक बयान उनके नीतिगत यूटर्ऩ का ताजा उदाहरण है।

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती महामारी संकट के दौरान किसी भी अन्य पार्टी की तुलना में कांग्रेस के खिलाफ अधिक कटु हो रही हैं। श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई विपक्षी पार्टियों की सम्मेलन से मायावती की अनुपस्थिति ने भी राजनीतिक हलके में चर्चाएं छेड़ दी हैं।

क्या मायावती को प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को उठाने में उनकी भूमिका के लिए प्रियंका गांधी के नेतृत्व में एक आक्रामक कांग्रेस को अपना आधार खोने का डर है। प्रवासी मजदूरों के प्रति कांग्रेस की सहानुभूति को मायावती ने नाटक करार दिया है।

इतना ही मायावती ने प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के लिए 1000 बसों की पेशकश के लिए प्रियंका गांधी को दोषी ठहराया। उन्होंने प्रस्ताव को बड़ा नाटक करार दिया। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस शासित राज्यों खासकर महाराष्ट्र में कोई बस क्यों नहीं भेजी गई।

केंद्र और राज्य में मायावती और बीजेपी सरकार के बीच हालिया संबंधों ने राजनीतिक वैज्ञानिकों को चैंका दिया है। गौरतलब है कि प्रवासी मजदूरों को संभालने के मुद्दे पर मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों को भी बख्शा था। उलटे मायावती ने पूरे संकट के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।

मायावती ने उन प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया जो रास्ते में कठिनाई का सामना करते हुए घर पहुंचने के लिए सड़कों पर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। बसपा अध्यक्ष ने बार-बार कहा कि कांग्रेस ने अपने शासन के दौरान गांवों का विकास किया होता, तो इन प्रवासी मजदूरों ने अपने घरों को नहीं छोड़ा होता। दिल्ली में प्रवासी मजदूरों के साथ राहुल गांधी की हाल की बैठक को भी मायावती ने महज नाटक करार दिया।

दलित नेताओं सहित कांग्रेस के राज्य नेतृत्व ने भी मायावती पर बीजेपी के साथ गठबंधन करने के लिए हमला किया। इतना ही कांग्रेस के नेताओं ने मायावती पर भाजपा द्वारा तैयार किए गए बयान बोलने का आरोप लगाया और कहा कि वह भाजपा की प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रही हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए मायावती और भाजपा के बीच संभावित गठजोड़ के बारे में कांग्रेस नेताओं ने इशारा किया।

मायावती को पता है कि कांशीराम और उनके द्वारा छीन लिए गए दलितों के अपने पहले के आधार को वापस लाने के लिए कांग्रेस विशेष रूप से यूपी में बहुत मेहनत कर रही है।

प्रियंका गांधी की आक्रामक मुद्रा ने खोए हुए समर्थन आधार को वापस लाने और प्रवासी मजदूरों की लड़ाई को सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के लिए भी चुनौती पेश कर दी है। (संवाद)