ऐसी स्थिति में लॉकडाउन से प्रभावित लोगों के जीवन एवं आजीविका की जवाबदेही की मांग और सरकारी उपेक्षा से असमय हुई मौतों को लेकर रोजी रोटी अधिकार अभियान ने आज 1 जून को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाया। सुबह से ही पूरे देश में रोजी रोटी अधिकार अभियान से जुड़ी संस्थाएं शहर से लेकर ग्रामीण स्तर तक विरोध प्रदर्शन किया। सरकारों को उत्तरदायी बनाने के लिए दोपहर बाद से ट्विटर हैशटैग के साथ विरोध प्रदर्शन के फोटो, वीडियो, मांगों के पोस्टर, संदेश आदि को स्ट्रोम किया गया।

रोजी रोटी अधिकार अभियान राष्ट्रीय सचिवालय की समन्वयक सुश्री आयशा ने बताया, ‘‘दिल्ली, बिहार, राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश एवं झारखंड में बड़े पैमाने पर लोगों ने शोक दिवस मनाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। लगभग 5 हजार संस्थाएं इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई। दिल्ली में नीति आयोग के बाहर भी अभियान से जुड़े साथियों ने प्रदर्शन किया। गांवों में पंचायत, मनरेगा कार्यस्थल और विकासखंड के सामने विरोध प्रदर्शन किया गया। विरोध प्रदर्शन में छोटे-छोटे समूह में, सुरक्षित दूरी का ध्यान रखते हुए मृतकों की याद में 2 मिनट का मौन भी रखा गया। कई जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रैलियां निकाली गई। शहरों में भी कलेक्टर ऑफिस के सामने, जिला पंचायत के सामने और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन की खबरें हैं। सांस्कृतिक प्रतिरोध करते हुए लोगों ने जनगीत गाए। इन विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें एवं वीडियो को सोशल मीडिया पर लोग साझा कर रहे हैं। ट्विटर पर #शोकदिवस #DayOfMourning हैशटैग के साथ स्ट्रोम किया जा रहा है।’’

इस विरोध प्रदर्शन में रोजी रोटी अभियान ने सरकार से मांग की है कि -
1. सार्वभौमिक रूप से प्रति माह अगले छह महीने तक पीडीएस से 10 किलो अनाज, 1.5 किलो दाल एवं 800 ग्राम तेल मुफ्त दिया जाए।
2. आंगनवाड़ी एवं शालाओं में मध्याह्न भोजन के माध्यम से पका हुआ भोजन सुनिश्चित किया जाए।
3. प्रवासी मजदूरों एवं देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित घर जाने की मुफ्त व्यवस्था की जाए।
4. प्रत्येक गरीब परिवार को हर माह 7 हजार रुपए दिया जाए।
5. मनरेगा के तहत प्रत्येक व्यक्ति एवं गांव लौटे सभी प्रवासी मजदूरों को 240 दिन काम दिया जाए। शहरों में भी काम दिया जाए।
6. सभी को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएं।

इस विरोध प्रदर्शन और शोक दिवस के लिए रोजी रोटी अधिकार अभियान ने एक बयान जारी किया था, जिसमें कहा गया है, ‘‘पिछले 2 महीनों से पूरे देश में लागू किये गए लॉकडाउन ने देश भर के लोगों को खासकर गरीब, बेघर, हाशिए पर खडे लोगों को एवं प्रवासी मजदूरों को अभूतपूर्भूव संकट में डाला है। 22 मई तक देश में कुल 667 मौतें हुई हैं जिनका कारण कोविड संक्रमण नहीं है, बल्कि सड़क दुर्घटना (205 मौतें), भूख और लॉकडाउन (114 मौतें) के चलते हुई पीड़ा है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में चक्रवात अम्फान द्वारा आई प्राकृतिक आपदा ने लोगों पर दोहरी मार डाली है। इन मसलों पर केंद्रीय सरकार की प्रतिक्रिया बहुत ही निर्दयी है। ऐसी परिस्थिति में शोक सिर्फ लोगों की मौत एवं उनकी आजीविका और आकांक्षाओं के दमन का नहीं है, बल्कि यह एक तरीका है सरकार को आइना दिखाने का, जवाबदेही तय करने का, सवाल पूछने का और लोगों की परेशानियों पर बेरहम प्रतिक्रिया पर जवाब मांगने का।’’ अभियान का कहना है कि अभी तक हमने ’थाली बजाओ’, ’दिया जलाओ’, ’फूल बरसाओ’ और न जाने कैसे कैसे बिना मतलब के उत्सव एवं समारोह देखे हैं। उस पर सरकार ने राहत कार्य की घोषणा करने में देरी भी की और वह सारी घोषणाएं अभी की स्थिति के लिए अपर्याप्त है। पहले तो सरकार ने प्रवासी मजदूरों की परेशानियों से मूंह मोड़ा और फिर मजदूरों को उनके राज्य एवं घर पहुंचाने के लिए श्रमिक ट्रेन एवं बस चलाने में काफी देरी की। दुर्भाग्य से आगे जो कुछ हुआ वह बहुत ही दुखद था, चाहे वह मजदूरों की सड़क एवं ट्रेन से मौत की खबर या फिर श्रमिक ट्रेनों में खाने एवं पीने के पानी की कमी। मजदूरों की परेशानी ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। ऐसे में मजदूरों की समस्याओं के समाधान और उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया गया।

इस अभियान में रोजी रोटी अधिकार अभियान के साथ भारत ज्ञान विज्ञान समिति, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, जन संगठनों का राष्ट्रीय समन्वय, पीयूसीएल, एनसीपीआरआई, एमकेएसएस, सूचना एवं रोजगार अभियान, सेवा भारत, असंगठित क्षेत्र के मजदूर अभियान, राष्ट्रीय विकलांग आंदोलन, समग्र टिकाऊ खेती के लिए समन्वय, जन स्वास्थ्य अभियान, एनएफआईडब्ल्यू, पश्चिम बंग खेत मजदूर समिति, एचआरएलएन, भारत मुस्लिम महिला आंदोलन, मातृत्व स्वास्थ्य व मानव अधिकार का राष्ट्रीय समन्वय, एकता नारी शक्ति संगठन, नेशनल फिशरवर्कर्स फोरम सहित कई आंदोलन एवं संस्थाएं शामिल हुईं। (संवाद)