लेकिन सबूज चीख चीख कर कह रहे हैं कि वह आत्महत्या का ही मामला है। यह कह देने से कि संत आत्महत्या नहीं कर सकते, आत्महत्या हत्या में नहीं बदल जाती। उत्तर प्रदेश की पुलिस तमाम सबूतों और गवाहों के मद्दे नजर लोगो को यह बताने ही वाले थे कि वह वस्तुतः आत्महत्या का मामला है, इसी बीच इसकी जांच का काम सीबीआई को सुपूर्द करने का फैसला एक अन्य महंत कर दिया। वह महंत और कोई नहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही हैं, जिन्होंने 28 सदस्यों की एक एसआइटी यानी स्पेशल जांच टीम का गठन उस मामले की जांच के लिए 24 घंटे पहले ही किया था।
आत्महत्या का वह मामला है। इसमें संदेह की कोई गुंजायश ही नहीं रह गई है। इस केस में कोई संशलिष्टता ही नहीं है। सबकुछ आइने की तरह साफ है। महंत ने एक लंबा सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या की। उसमें आत्महत्या का कारण ही नहीं लिखा हुआ है, बल्कि उन्होंन अपना वसीयतनामा भी लिख रहा है। अपनी गद्दी और हनुमान मंदिर का वारिस भी उन्होंने किसी बलवीर गिरि को नियुक्त किया है और आत्महत्या के लिए जिम्मेदार तीन लोगों का नाम भी उसमें लिखा है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिस बलवीर गिरि को उन्होंने अपना उत्तराधिकारी बनाया, उन्होंने पहले तो यही कहा कि सुसाइड नोट महंत नरेन्द्र गिरि की हैंडराइटिंग में ही है। लेकिन आत्महत्या के विरोधियो ने उन पर इतना दबाव डाला कि उत्तराधिकार के अपने दावे से पीछे हटते हुए उन्होंने कह दिया कि वह हैंडराइटिंग उनके गुरू की नहीं है।
संत आत्महत्या नहीं करते, इस थ्योरी को चलाने वाले लोग कहने लगे कि नरेन्द्र गिरि तो अनपढ़ थे। मुश्किल से वे अपना दस्तखत कर लेते थे, उतना बड़ा नोट वे लिख ही नहीं सकते। लेकिन यह दावा गलत निकला, क्योंकि नरेन्द्र गिरि जिस परिवार में पैदा हुए थे, उन्होंने बताया कि स्वर्गीय गिरि 10वीं पास थे। अब दसंवी पास व्यक्ति कोई पत्र क्या, चाहे तो मोटी मोटी किताब लिखता है। स्कूल के शुरुआती वर्षो में ही छात्रों को चिट्ठी लिखने और आवेदन पत्र लिखने की कला सिखाई जाती है और दसंवी पास व्यक्ति के लिए यह कोई मुश्किल काम नहीं है।
एक और मूर्खतापूर्ण तर्क दिया गया कि महंत अपनी सारी चिट्ठियां किसी और से लिखाते थे और उसपर अपना सिर्फ दस्तखत कर दिया करते थे। उनका कहना है कि उन्हें अपना सुसाइड नोट भी किसी और से लिखवाना चाहिए था। यही नहीं, एक गोदी मीडिया के चैनल ने सुसाइड नोट पर लिखे उनके दस्तखत से पुलिस को दिए गए एक आवेदन पत्र के दस्तखत को बेमेल बताकर उस नोट को फर्जी बताने की कोशिश की, लेकिन मजे की बात कि दोनों दस्तखत मिलते जुलते थे। दोनों दस्तखतों को बेमेल बताते हुए, जो सबूत पेश किए गए, उससे ही पता चलता है कि वह सुसाइड नोट महंत नरेन्द्र गिरि का ही लिखा हुआ है।
सुसाइड नोट ही नहीं, एक सुसाइड विडियो भी नरेन्द्र गिरि छोड़ गए हैं। उस वीडियो में वही बातें कही गई हैं, जो उन्होंने सुसाइड नोट में लिखी है। वह आत्महत्या के एक घंटा पहले ही सेल्फी मोड में रिकॉर्ड किया गया। डिजिटल विश्लेषण से पता चला है कि उसके पहले उन्होंने अपनी रिकॉर्डिंग को दो बार चेक किया। खर्च किए गए मोबाइल इंटरनेट डेटा से यह पता चल चुका है। यह भी पता चल चुका है कि एक दिन पहले ही उन्होंने सेल्फी मोड में विडियो रिकॉर्डिंग की कला अपने एक शिष्य से सीखी थी। इस विडियो रिकॉर्डिंग के बाद किसी तरह के शक की कोई गुंजायश नहीं रह जाती, लेकिन ‘संत आत्महत्या नहीं करते’’ का सिद्धांत पेश करने वाले इसे मानने को तैयार नहीं।
तीसरा बड़ा सबूत नायलोन की वह रस्सी है, जिसे महंत ने एक दिन पहले ही अपने एक शिष्य से बाजार से यह कहकर मंगवाई थी कि कपड़ा सुखाने के लिए वह चाहिए। वही रस्सी उनके गले में पुलिस को मिली। जब आत्महत्या का सामान भी खुद महंत का ही मंगवाया हुआ था, फिर आत्महत्या पर किसी तरह का संदेश करने का कोई कारण नहीं बचता।
आत्महत्या का कारण महंत ने ब्लैकमेलिंग बताया है। आनंद गिरी, आद्या तिवारी और उनके पुत्र उनको ब्लैकमेल कर रहे थे। आनंद पर तो आरोप है कि एक लड़की के साथ आपत्तिजनक अवस्था में एक मॉर्फ्ड फोटो उनके पास है, जो एक-दो दिन में सार्वजनिक होने वाला है। आत्महत्या के लिए इस तरह का कारण काफी होता है। क्या पता वह मॉर्फ्ड फोटो नहीं हो, सही फोटो हो, जिसे जीते जी महंत गलत साबित नहीं कर सकते थे। उन्हांने खुद लिखा है कि उसके बाद उनकी भारी बदनामी होती और वे बदनाम होकर कैसे जी सकते थे, इसलिए वे आत्महत्या कर रहे हैं।
सबकुछ इतना स्पष्ट हो जाने के बाद भी जो उनकी आत्महत्या पर संदेह कर रहे हैं, वे सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। साधु, संतों और महंतों के संप्रदाय में हो रहे काले कारनामों पर पर्दा डालने का यह कुत्सित प्रयास है, जो सफल नहीं होगी। जब किसी ने हत्या ही नहीं की है, तो सीबीआई कहां से हत्यारा ढूंढ़ लाएगा? बाकी आत्महत्या के लिए प्रेरित करने वाले तो पहले से ही जेल में हैं। (संवाद)
महंत नरेन्द्र गिरि की मौत
सबूत चीख चीख कर कह रहे हैं वह आत्महत्या का मामला है
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-09-24 09:44
प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर के महंत नरेन्द्र गिरि की मौत हो गई। वे फांसी से झूलते हुए पाए गए और पुलिस ने प्राथमिक तौर पर पाया की महंत ने आत्महत्या कर ली है। वह आत्महत्या का मामला पुलिस को इसलिए लगा कि जिस कमरे में महंत फांसी पर झूलते हुए पाए गए थे, वह कमरा अंदर से बंद था और आश्रम के लोग उस कमरे के दरवाजे को तोड़कर ही अंदर पहुंचे थे। जैसे ही उस मौत की खबर कमरे से बाहर निकली, कुछ कथित और तथाकथित संतों ने एक सिद्धांत जारी कर दिया कि संत आत्महत्या नहीं कर सकते और उसी सिद्धांत को सत्य साबित करने के लिए कथित संतों का एक बहुत बड़ा हुजूम तैयार हो गया, जो चीख चीख कर कह रहे हैं कि नरेन्द्र गिरि महंत हैं, तो फिर वे आत्महत्या नहीं कर सकते, वह पूरी तरह से हत्या का मामला है।