बीजेपी और संघ परिवार के कार्यकर्ता प्रमुख वोट बैंक कहे जाने वाले इन लाभार्थियों तक पहुंच रहे हैं और उनसे बीजेपी और गठबंधन सहयोगियों को वोट देने की अपील कर रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं और संघ परिवार के सदस्यों से कहा गया है कि वे अपना ऑनलाइन पंजीकरण कराएं और फिर लाभार्थियों से संपर्क करें और उन्हें पार्टी उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए मनाएं। यूपी में लोगों को महीने में दो बार राशन मिलता है - एक केंद्र सरकार द्वारा और दूसरा राज्य सरकार द्वारा। राज्य में लाभार्थी वर्ग बहुत बड़ा है।

कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत राज्य में लगभग 15 करोड़ लोगों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। पिछले साल अगस्त में पीएम नरेंद्र मोदी ने यूपी के महोबा जिले से उज्ज्वला 2 की शुरुआत की थी। इससे पहले उज्ज्वला 1 को 2016 में यूपी के बलिया से लॉन्च किया गया था।

गौरतलब है कि उज्ज्वला भाजपा के लिए गेम चेंजर रही हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है। हालांकि जीत के अन्य अनेक कारण भी थे। बीजेपी की योजना पीएम आवास योजना ग्रामीण और पीएम आवास योजना शहरी, पीएम किसान और जल जीवन मिशन के लाभार्थियों तक पहुंचने की भी है।

भाजपा ने किसानों तक यह संदेश भी पहुँचाया कि सभी तीन विवादास्पद कानून वापस ले लिए गए और पीएम किसान सम्मान निधि के संदेश को फैलाने के लिए, जिसने प्रत्येक जमींदार किसान को 2000 रुपये की तीन किस्तों में प्रति वर्ष 6000 रुपये प्राप्त करने में सक्षम बनाया। अब यह देखना होगा कि विधानसभा चुनाव में मोदी और योगी सरकारों द्वारा घोषित विभिन्न योजनाओं का लाभ भाजपा को मिलता है या नहीं। यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है, वैसे आमतौर पर वह हर चुनाव को गंभीरता से लेती है और जीतने के जितने तरीके हो सकते हैं, उन सभी का इस्तेमाल करती है। पश्चिम बंगाल में भी उसने सारी ताकत लगा दी थी, लेकिन वहां करारी हार मिलने के कारण बुरी तरह तिलमिला गई है। इसलिए इस बार उत्तर प्रदेश चुनाव में वह और भी ज्यादा सतर्क और गंभीर है।

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 80 बनाम 20 का नारा उछाला था और उसे लग रहा था कि यह नारा बड़े काम का होगा, लेकिन इसी बीच ओबीसी के अनेक नेता, जिनमें तीन मंत्री भी शामिल थे, पार्टी से यह कहते हुए बाहर हो गए कि भाजपा सरकार दलितों और पिछड़ों की विरोधी है। चुनाव की तिथियों की घोषणा होने के तुरंत बाद ये इस्तीफे होने लगे और इसने भाजपा नेताओ को असहज कर दिया और उसके 80 बनाम 20 के नारे की तीव्रता को कमजोर कर दिया। (संवाद)