यह एक राजनैतिक तथ्य है कि मतदाताओं का एक तबका, जो करीब 5 फीसदी का होता है, वह मतदान करने को लेकर अनिर्णय का शिकार होता है। वह अंत में उधर ही वोट देता है, जिधर की हवा या लहर होती है। वह अंत अंत तक इंतजार करता है और जिसे जीतता हुआ दिखाई देता है, उसे वोट दे देता है या भावना में बहकर भी वह वोट देता है। पांच राज्यों में हो रहे चुनावों में भी इन फ्लोटिंग वोटरों ने अपना कमाल दिखाया है। पंजाब में तो स्पष्ट दिख रहा था कि आम आम आदमी पार्टी जीत रही है, क्योंकि कांग्रेसी नेता खुद आपस में लड़ रहे थे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू तो खुद अपनी पार्टी की सरकार को ही कटघरे में खड़े रहे थे। इसके कारण वहां का फ्लोटिंग वोट आम आदमी पार्टी की ओर चला गया और उसने बहुत ही शानदार जीत हासिल की।
लेकिन अन्य चार राज्यों में कुछ और ही चल रहा था। वहां भाजपा की सरकारें थीं और फिर से वापस आने की वह जबर्दस्त कोशिश कर रही थी। तीन राज्यों में उसे कांग्रेस से और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से जबर्दस्त टक्कर मिल रही थी। अखिलेश की सभाओं में भीड़ उमड़ रही थी और भाजपा नेताओं के सभा स्थलों पर खाली कुर्सियां देखी जा सकती थीं। कम उपस्थिति के कारण तो एक बार खुद प्रधानमंत्री सभा स्थल पर नहीं पहुंचे और विडियो कान्फ्रेंसिंग से ही काम चला लिया। उत्तराखंड और गोवा में भी भारतीय जनता पार्टी के लिए जीत आसान नहीं लग रही थी। मणिपुर में उसकी स्थिति कुछ बेहतर लग रही थी और त्रिशंकु विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उसके उभरने की संभावना प्रबल दिख रही थी।
लेकिन जनवरी महीने से ही हिजाब विवाद कर्नाटक से बाहर भी मीडिया की सुर्खियां बनना शुरू कर दिया। उसके पक्ष और विरोध में प्रदर्शन होने लगे। मामला कोर्ट में पहुंचा। कर्नाटक से बाहर भी मुस्लिम छात्राएं हिजाब ही नहीं बुर्का पहनने लगी। जो स्कूल या कॉलेज जाते समय हिजाब और बुर्का नहीं पहनती थीं, वे भी जाने लगीं। जहां यूनिफॉर्म कोड का पालन किया जा रहा था, वहां भी मुस्लिम छात्राएं उसका उल्लंघन करने लगीं। उन्हें वैसा करने से रोका गया। और फिर विवाद बढ़ता गया और सुर्खिया बनती गईं। अनेक लड़कियो ने त्याग किए। अनेकों ने तो परीक्षाएं तक नहीं दीं। उनके त्याग की खबरें भी खूब छपी। एक कॉलेज लेक्चरर ने तो आवेश में आकर अपने लेक्चरर के पद से इस्तीफा भी दे दिया, क्योंकि उन्हें भी हिजाब या बुर्का पहनकर कॉलेज आने से रोक दिया गया, हालांकि कॉलेज का ड्रेस कोड सिर्फ छात्रों और छात्राओं पर ही लागू था, शिक्षकों पर नहीं। लेकिन कर्नाटक में भाजपा की सरकार है, इसलिए उसने भी अपनी तरफ से मामले को भड़काया।
इन सबका असर चुनावी राज्यों में पड़ना ही था। मुस्लिम मतदाताओं को इससे भाजपा के खिलाफ गुस्सा आना था, क्योंकि कर्नाटक में उसी की सरकार है और उसके समर्थन संगठन ही हिजाब का विरोध कर रहे थे। लेकिन मुस्लिम गुस्से से भाजपा को कोई चुनावी हानि होनी नहीं थी, क्योकि वे तो पहले से ही भाजपा के खिलाफ थे। भाजपा इस बात को जानती है, इसलिए चुनावों में आमतौर पर मुसलमानों को टिकट नहीं देती। पर दूसरी तरफ हिन्दुओं को लगने लगा कि मुसलमान सब जगह अपनी मनमानी करते हैं और जहां उन्हें ड्रेस कोड का पालन करना चाहिए, वहां वे इसका उल्लंघन करके अपने को खास दिखाने की कोशिश करते हैं। हिजाब समर्थकों ने अपने हिजाब समर्थन के पक्ष में हिन्दू विवाहित लड़कियों की सिंदूर और बिंदी का मामला उठाना शुरू कर दिया। वे कहने लगे कि यदि हम पर हिजाब पहनने की बंदिश है, तो फिर हिन्दू लड़कियों को सिंदूर लगाकर स्कूल आने की इजाजत क्यों दी जाती है। सिंदूर पोशाक का हिस्सा नहीं, इसका भी ख्याल हिजाब समर्थकों ने नहीं किया। भारत में विवाहित महिलाओं के लिए सिंदूर लगाना अति आवश्यक माना जाता है और मान्यता है कि जो विवाहित महिलाएं सिंदूर नहीं लगातीं, उनकी सुहाग को खतरा होता है यानि वह अपने पति की जान से ही हाथ धो सकती है। हिजाब से सिन्दूर की तुलना करने का असर हिन्दुओं पर बहुत हुआ और उन्हें एक बार फिर लगने लगा कि उनके हिन्दुत्व पर ही खतरा है और रक्षा सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ही कर सकती है।
यही कारण है कि फ्लोटिंग मतदाता भाजपा की ओर मुड़े। मणिपुर और गोवा में हिन्दु मतदाता उतने ज्यादा नहीं हैं, जितने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हैं। लेकिन वहां भी उनकी संख्या निर्णायक है और हिन्दुओं में जिन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि भाजपा को क्यों वोट दें, क्योंकि उसके कार्यकाल को वे ठीक नहीं मान रहे थे, एकाएक उन्हें भाजपा को वोट देने का एक नया कारण मिल गया और वे चुपचाप भाजपा को वोट दे बैठे। वैसे फ्लोटिंग वोटर्स शांत ही होते हैं और उन्होंने शांतिपूर्ण वोट देकर भाजपा की जीत सुनिश्चित कर दी। उत्तर प्रदेश में अखिलेश की बड़ी बड़ी सभाएं उनके काम नहीं आईं। उत्तराखंड में तो कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे हरीश रावत ही चुनाव हार गए। मणिपुर में भाजपा को अपने बूते पूर्ण बहुमत मिल गया और गोवा में उसे 40 में से 20 सीटों पर जीत हासिल हो गईं। इस तरह से भाजपा हारती बाजी जीत गई। (संवाद)
हिजाब विवाद के कारण ही भाजपा जीती
अनिर्णित मतदाताओं ने इसके असर से अपने मत भाजपा को दे डाले
उपेन्द्र प्रसाद - 2022-03-15 09:55
पंजाब के अलावा अन्य राज्यों में भाजपा की जीत को मोदी के कारण हुई जीत बताई जा रही है। चूंकि मोदी के चेहरे पर यह चुनाव भाजपा लड़ रही थी, इसलिए इसे गलत भी नहीं कहा जा सकता, लेकिन जीत में यदि किसी ने सबसे ज्यादा भूमिका निभाई तो वह भूमिका हिजाब विवाद की थी। यह विवाद कर्नाटक में शुरू हुआ, जहां चुनाव नहीं था, लेकिन वहां भाजपा की सरकार थी। यह विवाद सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राष्ट्रीय आयाम प्राप्त कर लिया। वैसे मीडिया के कारण एक छोटे से स्थानीय विवाद के राष्ट्रीय स्वरूप में आ जाना अब बहुत कठिन नहीं है, लेकिन यहां तो चुनाव हो रहे थे और इसमें भारतीय जनता पार्टी को फायदा होना था, तो इसे राष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण करने में देर नहीं लगी। हिजाब समर्थकों ने भी अति उत्साह दिखाया और उन्होंने तो इसका अंतरराष्ट्रीयकरण तक कर दिया। और इसका राजनैतिक फायदा भारतीय जनता पार्टी को हुआ।