हालाँकि, हम प्रारंभिक अवलोकन कर सकते हैं। पहला यह किअगला राष्ट्रीय चुनाव पिछले दो आम चुनावों से बहुत भिन्न नहीं होगा जो "मोदी बनाम कांग्रेस" और "मोदी बनाम गांधी" जैसे मुद्दों के आसपास ही केन्द्रित रहेंगे। भारत जोड़ो यात्रा अभियान के बाद कांग्रेस ने विपक्ष की बढ़ती जगह पर कब्जा कर लिया है।
इस बीच, पिछले साल राष्ट्रीय मंच पर टीएमसी और आप जैसे क्षेत्रीय दलों का संक्षिप्त उछाल चुनावी उलटफेर और भ्रष्टाचार की जांच के कारण कट गया।भारत जोड़ो यात्रा के बाद की राजनीतिक सुर्खियां, सभी राहुल गांधी की हैं।गांधी वंशज की अयोग्यता, जिसने महाराष्ट्र और बिहार की राज्य विधानसभाओं में क्रॉस पार्टी वॉकआउट को प्रेरित किया, केवल विपक्षी स्थान के भीतर उनकी राजनीतिक स्थिति को बढ़ावा देते दिखायी दिया।यहां तक कि बीआरएस, टीएमसी और आप जैसे पारंपरिक कांग्रेस विरोधी भी इसकी कड़ी निंदा करने लगे - अरविंद केजरीवाल ने भाजपासरकार को ब्रिटिश शासन की तुलना में अधिक "दमनकारी" करार दिया - सभी लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने की कहनी को ही दोहरा रहे थे जो राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का केंद्रीय मुद्दा था।बेशक, कांग्रेस नेजोरदार आरोप लगाया कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के "तानाशाही" कदमों ने न केवल राहुल गांधी को आरोपों की पुष्टि की है बल्कि यह भी की राहुल गांधी की कड़ी आलोचनाके हमले से सरकार भयभीत है।
भाजपा को शायद कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के चुनावों से पहले "मोदी बनाम गांधी" की कहानी को हवा देने से परहेज नहीं है, जहां उसे काफी सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है।इसके कुछ चुनावी तर्क हैं क्योंकि नरेंद्र मोदी अभी भी गांधी की तुलना में बहुत अधिक लोकप्रिय हैं — हाल ही में इंडिया टुडे के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार राहुल गांधी के लिए 43% उत्तरदाताओं ने ही प्रधान मंत्री पद के लिए अपने मत दिये जबकि नरेन्द्र मोदी को53% ने पसंद किया।
दूसरा, अगले साल के चुनाव के लिए नेताओं के कथन तेजी से सत्तारूढ़ भाजपा के "राष्ट्रवादी" दृष्टिकोण तथा विपक्षी दलों के "लोकतांत्रिक" दृष्टिकोण के गिर्द ही घुम रहे हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने दृष्टोकोणों के स्वर को नयी ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।
प्रधान मंत्री मोदी राष्ट्रीय गौरव की तख्ती पर भाजपा के राजनीतिक अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, तथा जी 20 शिखर सम्मेलन को भारत के "चमकदार" उत्थान के लिए "महान शक्ति" के रूप में दिखाते हैं।महामारी के बाद जहां आर्थिक सुधार भारी विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहा है, वहां वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक लो प्रोफाइल रख रही हैं। इसके विपरीत विदेश मंत्री जयशंकर सरकार के पक्ष को आगे बढ़ाने का नेतृत्व कर रहे हैं।
इस बीच, विपक्ष को न केवल "भ्रष्ट" के रूप में चित्रित किया जा रहा है, बल्कि अक्सर इस राष्ट्रीय प्रगति का विरोध करने वाली "राष्ट्र-विरोधी" ताकतों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया जा रहा है।यूके में गांधी की टिप्पणियों पर राजनीतिक तूफान इस उभरते आख्यान का एक उदाहरण था।
विपक्ष जिस समस्या का सामना कर रहा है वह यह है कि भाजपा की एकमात्र दृष्टि की स्पष्ट अभिव्यक्ति के विपरीत, विपक्ष की दृष्टि एक अस्पष्ट, असम्बद्ध सूत्रीकरण है।यह अनिवार्य रूप से उसकी गलती नहीं है- लोकतंत्र स्वाभाविक रूप से एक बहु-मूल्यवान अवधारणा है जो स्वयं को कई अर्थों, अभिव्यक्तियों को जगह देता है।उदाहरण के लिए, भजापा अपनी खुद की लोकतांत्रिक दृष्टि को सशक्तीकरण के रूप में प्रस्तुत करती है, जैसे कि एक आदिवासी राष्ट्रपति का उत्सव, और राष्ट्रीय गौरव भारत को "लोकतंत्र की माता" के रूप में प्रस्तुत करता है।
कहना न होगा कि एक लोकतांत्रिक आख्यान राजनीतिक रूप से निरर्थक है, विशेष रूप से सत्तारूढ़ दल के सामने जो कठोर राष्ट्रवाद का ढिंढोरा पीटता है।1977 और 1989 में कांग्रेस की चुनावी हार इसे साबित करती है।1977 में, कांग्रेस ने आपातकाल का बचाव करते हुए दावा किया कि विपक्षी रैंकों में अराजकतावादी तत्व हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।1989 के चुनावों से पहले, कांग्रेस ने राजीव गांधी के तहत एक आक्रामक विदेश नीति के साथ एक आधुनिक भारत के उदय का जश्न मनाया, जबकि अवसरवादी कश्मीर और पंजाब में राष्ट्रीय अखंडता के लिए "गंभीर चुनौतियों" से निपटने के लिए बिल्कुल योग्य नहीं थे।एक विशेष हमले के अभियान के तहत कांग्रेस ने एक पूरे पृष्ठ के विज्ञापन में एक टूटी हुई गुड़िया दिखायीथी, जिसका शीर्षक था: "मेरा दिल भारत के लिए धड़कता है!और मैं किसी को भी इसके टुकड़े-टुकड़े नहीं करने दूँगा।” (संवाद)
भाजपा को बड़ी उम्मीदें हैं अपने राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के एजेंडे से
विपक्षी दल सहमत हों साझी कहानी और जनता से साझे अपील पर
हरिहर स्वरूप - 2023-04-17 15:07
हाल ही में देश भर में कांग्रेस के दिन भर के विरोध के साथ, संसद से राहुल गांधी की अयोग्यता ने राजनीतिक शतरंज की बिसात को आकार दिया है, जो 2024 की चुनावी लड़ाई के शुरुआती टुकड़ों को स्थापित कर रहा है।घटनाएँ कैसे आगे बढ़ती हैं यह विभिन्न नायकों की बाद की चालों पर निर्भर करेगा।