इस आलोक में संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम का निमंत्रण लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला द्वारा प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी को दिया जाना और उन्होंने द्वारा उसे स्वीकार किया जाना, दोनों बातें किसी प्रकार से उचित नहीं हैं।

हमने ब्रिटेन की संसदीय परंपरा को अपनाया है जिसमें हमने राष्ट्रपति को वे ही अधिकार दिये हैं जो ब्रिटेन के राजा को प्राप्त हैं। फिर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को निर्वाचित सांसदों में केवल प्रथम (फर्स्टएमंगईक्वल्स) माना जाता है। हमने भी अपने प्रधानमंत्री को वही स्थान दिया है, अर्थात् बराबरी वाले निर्वाचित सांसदों में पहला। इस तरह प्रधानमंत्री द्वारा संसद भवन का उद्घाटन किसी तरह से उचित नहीं लगता। फिर हमारे देश में जितने भी रस्मी समारोह होते हैं उन सब में राष्ट्रपति ही मुख्य अतिथि होते हैं।

कुछ लोग यह तर्क दे रहे हैं कि चूंकि राष्ट्रपति एक आदिवासी महिला हैं इसलिए उन्हें इस गरिमामय कार्यक्रम से दूर रखा गया है। यह तर्क उचित नहीं है। यदि राष्ट्रपति किसी भी जाति या वर्ग का होता और यदि उसके हाथों से संसद भवन का उद्घाटन नहीं करवाया जाता तो वह भी उतना ही गलत होता।

बात इतनी ही नहीं है। मोदी जी संसद भवन का उद्घाटन करके अमर होना चाहते हैं। राष्ट्रपति भवन और पुराने संसद भवन की चर्चा करते हुए मैंने तत्कालीन राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. शंकरदयाल शर्मा से जानना चाहा था कि अंग्रेजों ने इन भवनों को इतना मजबूत क्यों बनवाया था कि ये सैकड़ों साल तक कायम रहते।

नये भवन की आवश्यकता के पक्ष में यह तर्क दिया जा रहा है कि जब कभी दोनों सदनों की सदस्य संख्या बढ़ेगी तो पुराना भवन सभी सदस्यों के बैठने के लिए पर्याप्त न होता। यहां मैं इस बात का उल्लेख करना चाहूंगा कि ब्रिटेन का संसद भवन सैकड़ों साल पुराना है। इस दरम्यान वहां के दोनों सदनों के सदस्यों की संख्या बढ़ती गयी परंतु वहां नये भवन की जरूरत महसूस नहीं की गयी। यदि किसी दिन हाऊस ऑफ कामन्स के सभी सदस्य आ जाते हैं तो उनमें से अनेकों को फर्श पर बैठना पड़ता है।

आज भी संसद के बजट सत्र, लोकसभा चुनाव के बाद के प्रथम अधिवेशन और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर होने वाले संसद के संयुक्त अधिवेशन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्वारा ही किया जाता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए यह पूर्णतः तर्कसंगत एवं औचित्यपूर्ण होता कि संसद के नये भवन का उद्घाटन भी राष्ट्रपति द्वारा ही किया जाता।

फिर प्रोटोकाल की भी एक समस्या है। प्रोटोकाल के अनुसार उपराष्ट्रपति का दर्जा प्रधानमंत्री से ऊपर है। यदि प्रधानमंत्री किसी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हैं तो उपराष्ट्रपति की उस कार्यक्रम में क्या हैसियत होगी। क्या उपराष्ट्रपति, जो राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, का संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में अनुपस्थित रहना उचित होगा?

सत्ताधारी दल की ओर से यह कहा जा रहा है कि श्रीमती इंदिरा गांधी ने संसद भवन की एनेक्सी का उद्घाटन किया था इसलिए यदि मोदी जी संसद भवन का उद्घाटन कर रहे हैं तो इसमें क्या गलत है। यह तर्क ही अनुचित है क्योंकि संसद भवन और एनेक्सी दोनों की गरिमा और दोनों के महत्व एक ही नहीं हैं। यह तुलना ठीक नहीं। नागरिकों की चिंता यह है कि संविधान का अक्षरशः पालन होना चाहिए, जो नहीं हो रहा है।(संवाद)