लेकिन इसे राष्ट्रीय प्रयास बनाने के उनके आह्वान को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। न तो भारतीय जनाता पार्टी (भाजपा), न ही रष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), या विश्व हिंदू परिषद् (वीएचपी), केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को तो भूल ही जाइये, पवन कल्याण के प्रस्तावित ‘सनातन धर्म रक्षण बोर्ड’ पर विचार किया। कल्याण का सनातन बोर्ड एक महीने से ज़्यादा समय तक ख़बरों में रहा और फिर बिना किसी निशान के मिट गया।
अब देवकीनंदन ठाकुर को ‘वक्फ बोर्ड’ के प्रतिद्वंद्वी के रूप में “सनातन बोर्ड” में दिलचस्पी जगाने से कोई नहीं रोक सकता। क्या देवकीनंदन ठाकुर भाजपा/आरएसएस का मुखौटा हैं? यह मत भूलिए कि योगी आदित्यनाथ का 'बटेंगे तो कटेंगे' नारा हिंदू एकता के लिए तरस रहे हिंदुओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है और ठाकुर का 'सनातन बोर्ड' और पवन कल्याण का 'सनातन धर्म रक्षण बोर्ड' हिंदू फूट के दो छोर हैं!
ठाकुर अब 'सनातन बोर्ड' के मुख्य प्रस्तावक हैं, जबकि पवन कल्याण ने 'सनातन धर्म रक्षण बोर्ड' के बारे में बात करना बंद कर दिया है, हालांकि अभिनेता से नेता बने पवन कल्याण महाराष्ट्र के 'निजामी जिलों' में एनडीए के लिए प्रचार करते हुए योगी आदित्यनाथ के 'बटेंगे तो कटेंगे' के नारे को दोहरा रहे हैं। हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी हिंदुत्व कार्ड से अलग नहीं होना चाहती है और पवन कल्याण एक शक्तिशाली और लोकप्रिय हिंदुत्व आइकन बन रहे हैं।
क्या हिंदू समुदाय में उत्तर-दक्षिण विभाजन है? ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी, लेकिन निश्चित रूप से एक मुखर हिंदू और एक प्रतिबद्ध हिंदू के बीच अंतर है, बाद वाले का प्रतिनिधित्व पवन कल्याण करते हैं और पहले वाले का प्रतिनिधित्व देवकीनंदन ठाकुर करते हैं, जिन्हें लोगों का ध्यान खींचने में कोई गुरेज नहीं है! उत्तर भारतीय हिंदू कथावाचक ने प्रस्तावित बोर्ड पर पूर्ण स्वामित्व का दावा करने के लिए पवन कल्याण से सनातन बोर्ड की पहल को लगभग हाईजैक कर लिया है।
सनातन बोर्ड पर चर्चा के लिए बुलाई गयी ‘धर्म संसद’ में पवन कल्याण को आमंत्रित नहीं किया गया। ऐसा लग रहा था कि ‘सनातन धर्म के धर्म गुरुओं’ ने पवन कल्याण या ‘सनातन धर्म संरक्षण बोर्ड’ के उनके आह्वान के बारे में सुना ही नहीं था। दिल्ली धर्म संसद में ‘मुख्य अतिथि’ चार महान शंकराचार्यों में से एक थे, और इस पवित्र संत ने भी पवन कल्याण के ‘सनातन धर्म रक्षण बोर्ड’ के बारे में नहीं सुना। क्या यही वह हिंदू एकता है जिसकी योगी आदित्यनाथ बात कर रहे हैं?
ऐसा लगता है कि देवकीनंदन ठाकुर का अपना एजंडा है। उनके प्रस्तावित “सनातन बोर्ड” की रूपरेखा क्या होगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं है, यहां तक कि देवकीनंदन ठाकुर को भी नहीं। लेकिन पवन कल्याण ने 'सनातन धर्म संरक्षण बोर्ड' का प्रारूप तैयार किया है:
एक, धर्मनिरपेक्षता को इस तरह से बनाये रखा जाना चाहिए कि किसी भी धर्म या आस्था को होने वाले किसी भी खतरे या नुकसान के लिए एक समान प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो।
दो, सनातन धर्म की रक्षा करने और उसकी मान्यताओं को नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाइयों को रोकने के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय अधिनियम की आवश्यकता है। इस अधिनियम को तुरंत लागू किया जाना चाहिए और पूरे देश में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
तीन, इस अधिनियम के कार्यान्वयन की देखरेख के लिए राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर एक 'सनातन धर्म संरक्षण बोर्ड' की स्थापना की जानी चाहिए।
चार, इस बोर्ड और इसकी गतिविधियों का समर्थन करने के लिए वार्षिक निधि आवंटित की जानी चाहिए।
पांच, सनातन धर्म को बदनाम करने या उसके खिलाफ नफरत फैलाने वाले व्यक्तियों या संगठनों के साथ असहयोग किया जाना चाहिए।
छह, मंदिरों में चढ़ावे और प्रसाद में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सनातन धर्म प्रमाणन लागू किया जाना चाहिए।
सात, मंदिरों को न केवल आध्यात्मिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, बल्कि व्यापक योजना के साथ कला और संस्कृति, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और कल्याण को बढ़ावा देने के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाना चाहिए।
इसकी तुलना देवकीनंदन ठाकुर के 'सनातन बोर्ड' और उसके उद्देश्यों से करें। 'धर्म संसद' में की गयी तीन मुख्य मांगें थीं - 'सनातन बोर्ड' का गठन, कृष्ण जन्मभूमि को मुस्लिम कब्जे से मुक्त कराना, और तिरुपति तिरुमाला लड्डू में मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना।
मांगें बहुत आक्रामक तरीके से रखी गयीं और दिल्ली धर्म संसद में 'साधु-संत' अपनी बयानबाजी को कम करने को तैयार नहीं थे। उनके निशाने पर था वक्फ बोर्ड! यह पूछे जाने पर कि क्या वे वक्फ बोर्ड को खत्म करना चाहते हैं या 'सनातन बोर्ड' का गठन, देवकीनंदन ठाकुर ने दूसरा विकल्प चुना। अन्य पूज्य 'संतों' ने भी यही कहा।
जब तक सनातन बोर्ड है, तब तक वे वक्फ बोर्ड से भी परहेज नहीं करेंगे। मंदिरों, मंदिरों के सोने-चांदी और मंदिर की जमीनों पर नियंत्रण रखने वाला सनातन बोर्ड इन "संतों और महात्माओं" के लिए एक सपना सच होने जैसा है, जिनमें से कई के पास लाखों पुरुषों और महिलाओं के दैनिक जीवन पर असीमित अधिकार हैं। देवकीनंदन ठाकुर जैसे हिंदू संतों के समूह को यह सोचकर लार टपक रही होगी कि सनातन बोर्ड के पास मंदिर और उनसे जुड़ी अनेक एकड़ जमीन होगी। वे सनातनी बच्चों को गुरुकुल शिक्षा देना चाहते हैं। धर्मांतरण और लव जिहाद, ठग जिहाद और भूमि जिहाद को खत्म करना चाहते हैं। साथ ही सर-तन से जुदा को भी खत्म करना चाहते हैं। कुछ उग्र प्रचारकों ने तौकीर रजा जैसे लोगों को सबक सिखाने की बात कही। देवकीनंदन ठाकुर ने नारा दिया, “अभी नहीं तो कभी नहीं, हिंदू हक लेकर रहेंगे”।
आखिरकार, धर्म संसद के अंत में, अपने अंतिम उग्र क्षणों में, वायदा और अल्टीमेटम आया: “वक्फ बोर्ड मिटा के रहेंगे; या फिर सनातन बोर्ड बना के रहेंगे।” धर्म संसद ने उन लोगों के आर्थिक बहिष्कार पर भी चर्चा की जिन्हें “हत्या करना सिखाया जाता है” और एक संत ने पूछा, “सोचो अगर सभी हिंदू धर्मनिरपेक्ष हो जायें तो क्या होगा!” (संवाद)
हिंदू धर्म प्रचारकों को चाहिए वक्फ बोर्ड की तर्ज पर सनातन बोर्ड
साधुओं के आक्रामक रुख से अनभिज्ञ भाजपा और आरएसएस
सुशील कुट्टी - 2024-11-19 10:54
दिल्ली में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया, जिसमें “उग्र” हिंदू धार्मिक प्रचारकों और ‘हिंदू संतों’ ने वक्फ बोर्ड की तर्ज पर ‘सनातन बोर्ड’ के गठन का आह्वान किया। धर्म संसद में ‘वक्फ बोर्ड’ को नष्ट करने या सनातन बोर्ड की स्थापना (“अभी नहीं तो कभी नहीं”) के आह्वान के साथ उग्र भाषण दिये गये। “संतों” और उनके अनुयायियों की सभा का नेतृत्व एक हिंदू उपदेशक देवकीनंदन ठाकुर ने किया, जिन्होंने ‘धर्म संसद’ का नेतृत्व संभाला। ठाकुर ने आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण से ‘सनातन बोर्ड’ के बारे में सुना होगा, जिन्होंने प्रयोगशाला परीक्षणों में “तिरुपति लड्डू प्रसादम” में पशु वसा की मौजूदगी का पता चलने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर ‘सनातन धर्म रक्षण बोर्ड’ के निर्माण का प्रस्ताव रखा था। कल्याण ने ‘सनातन धर्म रक्षण बोर्ड’ की रूपरेखा प्रसारित की।