बांग्लादेश में विकास की दिशा को प्रभावित करने में अमेरिकी सरकार हमेशा एक बड़ी भूमिका निभाती रही है। 2025 में भी, वैसा ही रहेगा, हालांकि प्रक्रिया समय-समय पर बदलती रहती है। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब राष्ट्रपति ट्रंप से बांग्लादेश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री इस पर विचार कर रहे हैं और वे लंबे समय से ऐसा कर रहे हैं। ट्रंप ने प्रतिक्रिया के लिए मोदी की ओर देखा, लेकिन उन्होंने बांग्लादेश के मुद्दे को टाल दिया और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत के रुख पर बात की। ट्रंप की टिप्पणी विस्तृत नहीं थी, यह थोड़ी उलझन भरी थी क्योंकि उन्होंने इस मुद्दे पर विचार करते समय 'सौ साल' कहा था। बांग्लादेश का जन्म 1971 में हुआ था, यानी सिर्फ 53 साल पहले, तो सौ साल का सवाल कहां था?
हालांकि, नरेंद्र मोदी को बांग्लादेश के साथ अपने हिसाब से रिश्ते सुधारने की योजना पर आगे बढ़ने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गयी। यह भारत सरकार के लिए बड़ी राहत की बात थी, क्योंकि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बाद में बताया कि बांग्लादेश पर ट्रंप की टिप्पणी से भारत को अपने पड़ोसी के साथ रिश्ते सुधारने में मदद मिलेगी। यह स्पष्ट नहीं है कि मोदी ने ट्रंप के साथ शेख हसीना के भारत से प्रत्यार्पण की यूनुस सरकार की मांग पर चर्चा की या नहीं, लेकिन संकेत मिले कि भारतीय पक्ष के पास दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों में मौजूदा गिरावट की जड़ में मौजूद जटिल मुद्दों से निपटने के लिए अपनी नीति बनाने के लिए पर्याप्त लचीलापन होगा।
बांग्लादेश सरकार भी व्हाइट हाउस में ट्रंप-मोदी वार्ता पर पैनी नजर रख रही थी। शिखर सम्मेलन के कुछ ही मिनटों बाद, दुबई में एक सम्मेलन में भाग लेने गये डॉ. यूनुस ने एलन मस्क से बात की और वार्ता के बारे में चर्चा की। हालांकि मस्क की सटीक प्रतिक्रिया ज्ञात नहीं है, लेकिन डॉ. यूनुस ने स्टारलिंक के मालिक को बांग्लादेश में स्टारलिंक की सेवाएं स्थापित करने का अधिकार देने की पेशकश की। एलन मस्क पहले ही भूटान में स्टारलिंक सेवाएं स्थापित कर चुके हैं और बांग्लादेश के बारे में पहले भी बातचीत हुई थी। यह जानते हुए कि मस्क एक सख्त व्यवसायी हैं, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार ने राजनीतिक मुद्दों पर बात करते हुए अपने व्यावसायिक प्रस्ताव से मस्क को प्रभावित करने की कोशिश की।
उल्लेखनीय है कि नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद डॉ. मोहम्मद यूनुस के दूतों ने ट्रंप से मुलाकात की कोशिश की थी, लेकिन वे सफल नहीं हुए। ट्रंप के अनुसार डॉ. यूनुस हिलेरी क्लिंटन के मित्र हैं। ट्रंप ने पहले भी उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। बांग्लादेश में डॉ. यूनुस का खेमा ट्रंप-मोदी वार्ता को लेकर चिंतित था। चूंकि ट्रंप से संपर्क नहीं हो पाया, इसलिए डॉ. यूनुस ने एलन मस्क से संपर्क करना शुरू कर दिया, जिन्हें वे पहले से जानते हैं। गुरुवार को टेलीफोन पर बातचीत ट्रंप शासन में दूसरे नंबर के नेता को खुश रखने की इसी प्रक्रिया का हिस्सा थी।
बांग्लादेश एक और घटनाक्रम से चिंतित है। वाशिंगटन दौरे के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री ने पहली बार राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (डीएनआई) तुलसी गबार्ड से मुलाकात की। गबार्ड एक प्रसिद्ध अमेरिकी हिंदू हैं और प्रधानमंत्री की करीबी मित्र हैं। वे सीआईए ऑपरेशन की भी प्रभारी हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप से पिछले साल अगस्त में शेख हसीना को सत्ता से हटाने में 'डीप स्टेट' की भूमिका के बारे में पूछा गया। ट्रंप ने कॉन्फ्रेंस में इस बात से पूरी तरह इनकार किया क्योंकि वे किसी अन्य देश में सत्ता परिवर्तन में सीआईए जैसी अमेरिकी एजंसियों की किसी भी तरह की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर सके। लेकिन सच्चाई यह है कि सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही डीप स्टेट से जुड़े कुछ अधिकारियों को बाहर कर दिया गया। तुलसी गबार्ड अब सीआईए के संचालन पर आगे की निगरानी कर रही हैं ताकि इसे ट्रंप की सोच के अनुरूप नया स्वरूप दिया जा सके।
अब यह स्पष्ट है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भू-राजनीतिक दृष्टि से अपनी रणनीति को नये सिरे से तैयार कर सकती है, जिसमें दोनों पड़ोसियों के बीच मौजूदा तनाव की लड़ाई में भारत को अंतरिम अमेरिकी समर्थन को ध्यान में रखा जायेगा। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पहले ही पाकिस्तान और चीन के साथ अपने संबंधों का विस्तार किया है, लेकिन सरकार ट्रंप के अधीन अमेरिकी प्रशासन को परेशान करने के बारे में नहीं सोच सकती। सरकार चटगांव के पास देश के क्षेत्रीय जल में अमेरिकी बेस की पेशकश करने जैसा कोई रास्ता निकाल सकती है, जो शेख हसीना सरकार और पेंटागन के बीच विवाद का विषय था। अगर अमेरिका इसे बांग्लादेश के साथ किसी भावी सौदे के हिस्से के रूप में चाहता है, तो यह बांग्लादेश सरकार के लिए ट्रम्प प्रशासन की प्राथमिकताओं से भारत को अलग करने के प्रयासों में से एक विकल्प हो सकता है। आखिरकार, कोई स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होते बल्कि सिर्फ़ स्थायी हित होते हैं। इसे कट्टर कारोबारी डोनाल्ड ट्रंप से बेहतर कोई नहीं जानता।
बांग्लादेश के लिए अगला विकल्प पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों को और बेहतर बनाना है। लेकिन पाकिस्तान शायद अंतिम कदम न उठाये क्योंकि मौजूदा पाकिस्तानी सरकार ट्रंप-मोदी के संयुक्त बयान से नाखुश हो सकती है, खास तौर पर आतंकवाद से संबंधित बयान से। हालांकि, पाकिस्तान की मौजूदा सरकार या कोई भी दूसरी सरकार अमेरिका के खिलाफ कोई खुला रुख नहीं अपना सकती, जिसके साथ पाकिस्तान कई क्षेत्रों में जुड़ा हुआ है। चीन भी शायद ऐसी किसी धुरी में शामिल होने में दिलचस्पी न ले, अगर प्रस्तावित हो, क्योंकि चीन की मुख्य प्राथमिकता अब ट्रंप के साथ लेन-देन के आधार पर समझौता करना है। ट्रंप मानते हैं कि सिर्फ़ चीन और रूस ही उनके साथ बराबरी के स्तर पर बात करने की शक्ति रखते हैं। वे इसके लिए तैयार हैं।
चीन बांग्लादेश की राजनीति में खुले तौर पर हस्तक्षेप करने के बजाय व्यापार, खास तौर पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में अपना प्रभाव बढ़ाने में खुश है। ऐसी परिस्थितियों में बांग्लादेश के लिए सबसे अच्छा विकल्प यही है कि वह शेख हसीना के भारत से प्रत्यर्पण की मांग को तत्काल मुद्दा न मानकर भारत के साथ संवाद के द्वार खोले। यदि बांग्लादेश मौजूदा सहयोगी परियोजनाओं में तेजी लाने और पिछले वर्षों में प्रस्तावित नये क्षेत्रों पर चर्चा शुरू करने जैसे शेष मुद्दों पर आगे बढ़ता है, तो द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव के अभूतपूर्व स्तर को कम किया जा सकता है। अंतरिम सरकार वर्ष के अंत तक आम चुनाव कराने की अपनी योजना पर आगे बढ़ सकती है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी हो, जिसमें अवामी लीग के सदस्य भी शामिल हैं, जिनके खिलाफ कोई आपराधिक आरोप नहीं हैं।
यूनुस शासन के लिए बांग्लादेश पर ट्रंप-मोदी वार्ता के मद्देनजर भारत को खुश करने की कोई भी नयी पहल मुश्किल हो गयी है, क्योंकि नयी सरकार के समर्थक, खासकर छात्र, भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर भारत के साथ किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। भारत फिलहाल इस पर सहमत होने के मूड में नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को भारतीय दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कारण बताये होंगे। तो क्या यूनुस सरकार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को दरकिनार करते हुए भारत के साथ बातचीत करने की हिम्मत दिखा सकती है, जो अब हसीना विरोधी गठबंधन के लिए एक भावनात्मक मुद्दा बन गया है? मोदी की ट्रंप के साथ बातचीत के बाद, क्या अमेरिका डॉ. यूनुस पर बिना किसी पूर्व शर्त के प्रत्यर्पण मुद्दे पर भारत के साथ बातचीत के लिए सहमत होने का दबाव बनायेगा? यह एक बड़ा सवाल है।
बांगलादेश की अंतरिम सरकार का भविष्य तत्काल यहीं दांव पर लगा है। छात्र संगठन ने पहले ही यूनुस सरकार को नोटिस दे दिया है कि प्रत्यर्पण मुद्दे को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में बहुत देरी हो चुकी है। यूनुस सरकार आधिकारिक तौर पर इस सप्ताह दिल्ली को चेतावनी के तौर पर एक और रिमाइंडर भेजने वाली है। अंतरिम सरकार के घटकों को आपस में इस नाजुक मुद्दे को सुलझाना होगा और किसी निर्णय पर पहुंचना होगा। इस पर भारत-बांग्लादेश संबंधों का अगला चरण निर्भर करता है। (संवाद)
क्या बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भारत के प्रति अपना रुख नरम करेगी?
यूनुस सरकार दबाव में, दिल्ली को ढाका से निपटने में अमेरिका का समर्थन
नित्य चक्रवर्ती - 2025-02-17 11:30
व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के नतीजे का असर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर पड़ सकता है, जिसका नेतृत्व डॉ. मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं, जो 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार के हटने के तीन दिन बाद 8 अगस्त, 2024 से सत्ता में हैं।