सुप्रसिद्ध कथाकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती प्रतिभा राय की अध्यक्षता के हुई प्रवर परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में चयन समिति के अन्य सदस्य श्री माधव कौशिक, श्री दामोदर मावजो, श्री प्रभा वर्मा, डॉ. अनामिका, डॉ. ए॰ कृष्णा राव, श्री प्रफ्फुल शिलेदार, डॉ. जानकी प्रसाद शर्मा और ज्ञानपीठ के निदेशक श्री मधुसूदन आनन्द शामिल थे।

विनोद कुमार शुक्ल (जन्म: 1 जनवरी 1937) हिंदी साहित्य के एक प्रतिष्ठित लेखक, कवि और उपन्यासकार हैं। उनका लेखन सरल भाषा, गहरी संवेदनशीलता और अद्वितीय शैली के लिए जाना जाता है। वे मुख्य रूप से आधुनिक हिंदी साहित्य में प्रयोगधर्मी लेखन के लिए प्रसिद्ध हैं। विनोद कुमार शुक्ल की पहली कविता पुस्तिका वर्ष 1771 में ‘लगभग जयहिंद’ शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। उनके प्रमुख उपन्यासों में "नौकर की कमीज़", "दीवार में एक खिड़की रहती थी", और "खिलेगा तो देखेंगे" शामिल हैं। उनकी कविताएँ और कहानियाँ आम जीवन की बारीकियों को सहज भाषा में प्रस्तुत करती हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। उनका लेखन आम आदमी की भावनाओं, उसकी रोजमर्रा की जिंदगी और समाज की जटिलताओं को खूबसूरती से व्यक्त करता है।

ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जिसे भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्य रचने वाले रचनाकारों को प्रदान किया जाता है। इस प्रतिष्ठित सम्मान के अंतर्गत 11 लाख रुपये की राशि, वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।

हिंदी साहित्य प्रेमियों और संपूर्ण साहित्य जगत के लिए यह हर्ष और गर्व का विषय है कि विनोद कुमार शुक्ल को यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है। यह पुरस्कार उनकी साहित्यिक साधना और सृजनशीलता का सम्मान है, जिससे हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयाँ मिली हैं।