बजट सत्र की खूबियों पर यदि नजर डाली जाये तो राज्यपाल के अभिभाषण से लेकर बजट भाषण तक 100 से अधिक विधायकों ने सदन के भीतर चर्चा करने में बढ़-चढ़ कर हिस्सेदारी भी की। प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने अध्यक्ष की भूमिका में जितनी निष्पक्षता से सदन का संचालन किया उनकी यह कार्यशैली सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को पसंद आयी।
विपक्ष ने हल्ला तो किया लेकिन हल्ला बोल नहीं पाये। सत्तापक्ष ने अपने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का पक्ष रखने में जितनी शिद्दत से सदन में प्रदर्शन किया वह भी अपने आप में एक रिकार्ड है। इसके लिए यदि बजट सत्र की सफलता का श्रेय उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को दिया जाये तो किसी को आपत्ति नहीं होगी और दूसरे उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला तथा नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय दोनों का प्रदर्शन अद्भुत और अद्वितीय था, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि मुख्यमंत्री ने राज्यपाल मंगूभाई छगनभाई पटेल के अभिभाषण और बजट भाषण दोनों को मिलाकर अपने डेढ़ घंटे के भाषण में विपक्ष की जितनी आलोचना की वह एक रिकार्ड है, वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष उंगम सिंघार ने भी गोविन्द सिंह राजपूत की आलोचना में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। बजट सत्र के समाचार विश्लेषण की व्यापकता केवल यही है कि विधान सभा अध्यक्ष तोमर ने मध्य प्रदेश विधानसभा के सभी सदस्यों को पाठ पढ़ाने में और उन्हें पढ़कर आने की शिक्षा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
जहां तक सवाल है मुख्यमंत्री का तो डॉ. मोहन यादव ने सदन के भीतर टाइम मैनेजमेंट के साथ बल्लेबाजी असरदार की है इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया, लेकिन इस सत्र ने कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और चर्चाओं के साथ अपनी गहरी छाप छोड़ी।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही को विधिवत सफलतापूर्वक संपन्न घोषित करते हुए सभी विधायकों के सहयोग और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि 56 घंटे से अधिक चली इस सार्थक बहस ने प्रदेश के विकास की दिशा में अहम योगदान दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को उनके जन्मदिन की अग्रिम बधाई भी दी गयी, जिससे सदन का समापन एक भावनात्मक और सकारात्मक माहौल में हुआ।
तोमर ने कहा कि 15 दिवसीय इस सत्र में महत्वपूर्ण विधायी कार्य सफलतापूर्वक निपटाये गये, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिली। राज्यपाल के अभिभाषण पर 11 घंटे 30 मिनट, बजट पर सामान्य चर्चा 9 घंटे 44 मिनट, बजट अनुदान मांगो पर 16 घंटे 30 मिनट चर्चा हुई।
कुल 2939 प्रश्न इस सत्र में प्राप्त हुए, जिसमें 1448 तारांकित और 1448 अतारांकित प्रश्न थे। 624 ध्यानाकर्षण सूचना थी, जिसमें 33 सूचनाएं ग्राह्य हुईं। शून्यकाल की 183 सूचनाएं एवं 510 याचिकाएं मिली थी। बजट सत्र में 4 शासकीय विधेयक और 1 अशासकीय संकल्प पारित हुआ।
इस समाचार विश्लेषण का सारांश यह है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में 17 वर्षों बाद मध्य प्रदेश की जनता को पहली बार विधान सभा के महत्व और विधानसभा के भीतर जनहित मुद्दों पर सार्थक बहस परिणामों के साथ देखने को मिली है। (संवाद)
उल्लेखनीय रहा मध्यप्रदेश विधान सभा का बजट सत्र
दो दशक बाद एजंडे के अनुरूप चली मध्यप्रदेश विधान सभा
एल.एस. हरदेनिया - 2025-03-26 11:05
इस बार मध्यप्रदेश विधान सभा का बजट सत्र उल्लेखनीय रहा। लगभग 15-20 वर्षों के अन्तराल के बाद पहली बार विधानसभा ने अपना निर्धारित एजन्डा पूरा किया। पहली बार राज्यपाल को उनके भाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर पूरी बहस हुई। इसी तरह बजट पर भी पूरी बहस हुई। इसका श्रेय स्पीकर को दिया जा रहा है। स्पीकर ने इसके लिए पक्ष और विपक्ष का आभार माना।