इस बीमारी के बचपन में ही इलाज की सुविधा भारत में हालांकि करीब 40 वर्षों से मौजूद है, लेकिन अभी हाल में ही वयस्कों में ग्रोथ हार्मोनों की मौजूदगी के महत्व को समझा गया है। नयी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के अंतःस्राव एवं चयापचय (इंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबोलिज्म) विभाग के प्रमुख डा ए सी अमिनी बताते हैं कि ग्रोथ हार्मोनों की कमी का पता बढ़ रहे बच्चों में आसानी से लगाया जा सकता है। वयस्कों में ग्रोथ हार्मोन की कमी का पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन उनमें यह कमी उनकी सेहत के लिये घातक भी साबित हो सकती है।
एडल्ट ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी से पीड़ित लोगों को कई तरह की समस्यायें हो सकती है। कई लोगों में एडल्ट ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी का प्रभाव उनकी मनोवृतियों एवं भावनाओं पर भी पड़ सकता है। ऐसा इसलिये होता है क्योंकि ग्रोथ हार्मोन भावनाओं और मानसिक स्थितियों को नियंत्राण करने में भी भूमिका निभाते हैं।
एडल्ट ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी (ए जी एच डी) से पीड़ित लोगों के लिये खुशखबरी यह है कि रिकंबिनेंट डी एन ए तकनीक की मदद से उनका इलाज किया जाना संभव हो गया है।
चिकित्सकीय शोधों से पता चलता है कि वयस्क लोगों के शरीर में कालेस्ट्रॉल के स्तर एवं चयापचय को संतुलित रखने के लिये ग्रोथ हार्मोनों की समुचित मात्रा जरूरी होती है।
किसी वयस्क को एडल्ट ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी तब उत्पन्न होती है जब उसे ग्रोथ हार्मोनों की सामान्य मात्रा नहीं मिलती है। इसके कई कारण हो सकते हैं। एक कारण तो यही है कि बचपन में उत्पन्न ग्रोथ हार्मोन की कमी वयस्क होने तक बनी रह सकती है। इसके अलावा पिट्यूटरी ग्रंथि को क्षति पहुंचाने वाली बीमारियांए पिट्यूटरी ट्यूमरए सिर में गंभीर चोट और प्रसव के दौरान भारी रक्त स्राव जैसे कारण पिट्टयूटरी हार्मोन समेत ग्रोथ हार्मोनों की कमी पैदा कर सकते हैं।
एम्स में ग्रोथ हार्मोन की कमी से ग्रस्त मरीजों का इलाज करने वाले डा अमिनी के अनुसार ग्रोथ हार्मोन वयस्क व्यक्ति के शरीर के कालेस्ट्रॉल के स्तर को बरकरार रखने जैसी चयापचय संबंधी कार्यप्रणालियों और हृदय वाहिका तंत्र को सुचारू रखने के लिये जरूरी है। ये हार्मोन शरीर के विकास से संबंधित सभी कार्यप्रणालियोंए तथा उत्पादन और यहां तक कि मनुष्य के कार्य व्यवहार एवं मूड को भी नियंत्रित करते हैं। ग्रोथ हार्मोनों की कमी से शरीर में वसा के स्तरए मांसपेशियों और हड्डियों में भारी बदलाव आ सकते हैं। (फर्स्ट न्यूज)
महिलाओं को अधिक होती है ग्रोथ हार्मोनों की कमी
विशेष संवाददाता - 2010-07-12 12:45
अपने शिशु को स्तनपान नहीं कराने वाली महिलाओं को शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हार्मोनों की कमी अर्थात एडल्ट ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी (ए जी एच डी) से पीड़ित होने की आशंका अधिक होती है। यह आशंका उन महिलाओं को भी अधिक होती है जिन्हें मासिक धर्म के समय अधिक रक्त स्राव होता है।