इसमें सबसे दिलचस्ल बात यह है कि भारत इस मसले पर बांग्लादेश को वही जवाब दे रहा है, जिस तरह का जवाब वह अपनी इसी तरह की आपत्तियों पर चीन से पाता है। गौरतलब है कि चीन भी अपने अधिकार क्षेत्र वाले ब्रह्मपुत्र पर एक बड़ा बांध बना रहा है। भारत ने उस पर आपत्ति जताई थी। भारत की आपत्ति के जवाब में चीन ने कहा था कि बांध के निर्माण में वह भारत की चिंताओं का ख्याल रखेगा। अब जब भारत द्वारा उसी ब्रह्मपुत्र पर बनाए जा रहे बांधों पर बांग्लादेश आपत्ति कर रहा है, तो भारत भी यही कह रहा हे कि वह बांग्लादेश के हितों का ख्याल रखेगा। लेकिन बांग्लादेश भारत द्वारा दिलाए जा रहे दिलासों पर विश्वास नहीं कर रहा है।
अगले कुछ सालों में भारत सरकार अरुणाचल प्रदेश की नदियांे पर 718 बांध बनाने की योजना बना रहा है। इस पर 2 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे। अनुमान है कि इससे 40 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन प्रतिदिन होगा, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी। कोलकाता स्थित पर्यावरणविदों के अनुसार कम से कम 124 मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर दस्तखत किए जा चुके हैं। इनमें से तो 70 फीसदी ऑर्डर निजी क्षेत्र को दिए गए हैं, जबकि शेष 30 फीसदी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को दिए गए हैं।
पर्यावरणविद व मणिपुर, असम, और मिजोरम के सिविल समाज के प्रवक्ता इसका विरोध कर रहे हैं। बांग्लादेश का पूरा जनमत इसके खिलाफ है। यदि प्रस्ताव पर पूरा अमल हुआ, तो इसका मतलबत्र भारत-चीन, भारत- मलाया और भारतऋ बर्मा की भौगोलिक पट्टी से बायो डायवर्सिटीज का खात्मा। इसके कारण पूर्वात्तर राज्यों की अनेक जनजातियों के लोगों को अपनी इलाकों से हटना पड़ेगा। नगा, कूकी, मिजोए हमार्स, जेलियांग्रोंग्स जैसी पहाड़ी जनजातियां अपने इलाकों को छोड़कर कहीं और बसने के लिए अभिशप्त हो जाएंगी।
कोलकाता स्थित एक पर्यावरणविद का कहना है कि इसके कारण पूर्वात्तर राज्यों का एक बड़ा हिस्सा लोगांे के रहने लायक नहीं रह जाएगा। यानी भारत के दूसरे इलाकों की औद्योगिक और आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए देश के पूर्वात्तर राज्यों के एक बड़े हिस्से को तबाह कर दिया जाएगा। गौहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति अमरज्योति चौधरी ने केन्द्र सरकार को कहा है कि वह इन परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाए और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह के साथ खिलवाड़ न करे। (संवाद)
अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित बांधों से पर्यावरण को खतरा
विशेषज्ञों की राय उनके निर्माण के खिलाफ
आशीष बिश्वास - 2010-07-12 12:58
कोलकाताः केन्द्र सरकार अरुणाचल की नदियों पर 700 से भी ज्यादा बांध बनाने जा रही है। ये बांध ब्रह्मपुत्र, कमेंग व अन्य नदियों पर बनाए जाने हैं। पूर्वात्तर राज्यों के पर्यावरणविद इन बांधों के बनाए जाने के सख्त ख्लिाफ हैं। उनका कहना है कि इसके कारण पर्यापरण को भारी खतरा पैदा होगा और पूरे इलाके का जनजीवन तहस नहस हो जाएगा। पड़ोसी बांग्लादेश ने भी इस पर सख्त आपत्ति जलाई है।