खास बात यह थी कि विशेष अधिवेशन में भाषण देने वाले 10 विधायक सत्ताधारी दल के थे और 10 प्रतिपक्ष के। दोनों पक्षों के विधायकों ने अपने-अपने विचार प्रकट किए। विधानसभा में 1956 से लेकर अभी तक राज्य के जितने मुख्यमंत्री रहे, उनके योगदान पर विशेष चर्चा की गई। इन मुख्यमंत्रियों में कांग्रेस के रविशंकर शुक्ल, मंडलोई, कैलाशनाथ काटजू, द्वारका प्रसाद मिश्र, गोविन्द नारायण सिंह आदि शामिल थे। भाजपा (पूर्व में जनसंघ) के जो मुख्यमंत्री बने उनमें कैलाश जोशी, सुन्दरलाल पटवा, उमा भारती, शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल थे। इसके अतिरिक्त अर्जुन सिंह, दिग्विजय सिंह, मोतीलाल वोरा आदि 19 मुख्यमंत्रियों के योगदान का उल्लेख किया गया।
इसके अतिरिक्त विधानसभा कक्ष में प्रदर्शनी लगाई गई। यह प्रदर्शनी मध्यप्रदेश के विकास और विधानसभा के इतिहास पर केन्द्रित थी। मुख्यमंत्री ने स्वयं के दो वर्ष के कार्यकाल की चर्चा की और प्रदेश की जनता से कहा कि वे बताएं कि इन दो वर्षों में क्या हुआ है और क्या नहीं हुआ।
इस समय मध्यप्रदेश में वर्तमान मुख्यमंत्री के पद पर दो वर्ष होने पर तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में कुछ तो बहुत ही अनोखे हैं। जैसे स्पेशल क्विज आयोजित करना। दूसरा अनोखा कार्य था मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र। इस सत्र के माध्यम से आज के मध्यप्रदेश विधानसभा का इतिहास दिया गया है। मध्यप्रदेश का 1956 का मानचित्र भी जारी किया गया जिसमें इंदौर, भोपाल, भिंड प्रदेश, मालवा और महाकौशल छत्तीसगढ़ भी शामिल था, जिस समय मध्यप्रदेश बना था। आज छत्तीसगढ़ हमारे प्रदेश का हिस्सा नहीं है। इस क्विज के माध्यम से कुछ जानकारियां देने का तरीका अपनाया गया था। साधारणतः क्विज स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए खेला जाता है और ऐसा यह पहली बार है कि क्विज आम जनता के बीच में भी खेला गया है। इस क्विज को आम लोगों के बीच में प्रचारित करने के लिए समाचार पत्रों में बड़े-बड़े विज्ञापन छपे हैं। दूसरी इस क्विज से यह जानकारी ली गई है कि मध्यप्रदेश कब बना था? कौन उसके पहले राज्यपाल थे? कौन उसके पहले मुख्यमंत्री थे। कौन विधानसभा के सदस्य थे? आदि
क्विज के माध्यम से आम जनता से इस तरह की जानकारी मांगी गई। इसका उद्देश्य साफ है कि लोगों को यह पता लगे कि पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल थे। जो सिर्फ एक महीने मुख्यमंत्री रहे और जिनकी अचानक दिल्ली में हृदयगति रुकने से मृत्यु हो गई। फिर यह बताया गया है कि मध्यप्रदेश का राज्यपाल कौन थे? फिर बताया जाता है कि डॉ. पट्टाभि सीतारमैया। डॉ. पट्टाभि सीतारमैया ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए सुभाषचंद्र बोस के खिलाफ चुनाव लड़ा था। वो चुनाव में हार गए थे। जब चुनाव का परिणाम घोषित हुआ तो महात्मा गांधी ने कहा कि डॉ. पट्टाभि सीतारमैया की हार मेरी हार है। डॉ. पट्टाभि सीतारमैया का बहुत बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने कांग्रेस की अधिकृत जीवनी लिखी है अर्थात कांग्रेस का इतिहास लिखा है।
इसके साथ ही विधानसभा भवन में एक प्रदर्शनी लगाई गई है जिसमें सन 1956 से लेकर आज तक मध्यप्रदेश की विकास यात्रा को दिखाया गया है। जिसको काफी लोग देखने आए और मध्यप्रदेश के इतिहास को समझे। मिंटों हाल का भी अपना एक इतिहास है। भोपाल इसलिए ही चुना गया कि मिंटों हाल के समान एक बड़ा कक्ष मध्यप्रदेश में कहीं और उपलब्ध नहीं है। मिंटो हाल को पहली विधानसभा के रूप में उपयोग किया गया था। मिंटो हाल तत्कालीन वायसराय गवर्नर जनरल जब भोपाल आए तो उनके सम्मान में बनाया गया था।
इस कक्ष में इतनी जगह थी कि पहली विधानसभा का अधिवेशन इसमें किया गया था। प्रथम अधिवेशन में गवर्नर ने अपने उद्घाटन भाषण में यह दावा किया था कि नए राज्यों का निर्माण अत्यधिक शांतिपूर्ण ढ़ंग से हुआ। गर्वनर के इस भाषण को चुनौती दी थी विंध्य प्रदेश के आने वाले विधायक सी.पी. तिवारी ने। उन्होंने कहा कि यह बात गलत है। तथ्य यह है कि नए राज्यों के बनने के साथ ही बहुत खून खराबा हुआ। क्योंकि महाराष्ट्र के लोग नाराज थे। इतना समृद्ध राज्य जो भाषा के लिहाज से, उद्योग के लिहाज से, शिक्षा के लिहाज से आगे होने के बाद भी महाराष्ट्र को एक पृथक राज्य का दर्जा नहीं दिया गया था। बाम्बे प्रेसिडेन्सी में महाराष्ट्र और गुजरात शामिल रहे। ज्यों ही रिपोर्ट जाहिर हुई तब महाराष्ट्र और खासकर बंबई में भयंकर विरोध प्रारंभ हो गया। यहां तक कि इस विरोध को दबाने के लिए पुलिस को गोलियां चलानी पड़ीं। यहां तक कि होटल में बैठे लोगों पर भी गोलियां चलीं। कई स्थानों पर गोलियां चलीं। इसलिए सीपी तिवारी ने कहा कि यह कहना उचित नहीं है कि राज्यों का निर्माण बिना खून-खराबे के हो रहा है।
जो कार्यक्रम आयोजित किए गए उनमें मुख्यमंत्री ने अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनायीं। शिक्षा के क्षेत्र में, उद्योग के क्षेत्र में, बिजली के क्षेत्र में, कृषि के क्षेत्र में क्या विकास हुआ है, उसे अभ्युदय के नाम से मुख्यमंत्री के द्वारा और स्वयं उनके मंत्रियों द्वारा बताया गया। मुख्यमंत्री ने भोपाल के लगभग सभी अखबारों को इंटरव्यू दिए और स्वयं अपने द्वारा किए गए विकास से खासकर उद्योगों में निवेश को लोगों को समझाया। बहुत सारी सूचनाएं दी गईं। उसके बाद उन्होंने अपने मंत्रियों से कहा कि वे पूरे प्रदेश में जाकर अपने-अपने जिलों में जहां वो रहते हैं और उन्हें जिस जिले का प्रभारी बनाया गया है वहां जाकर बताएं कि उन जिलों में क्या-क्या कार्य हुए हैं। मंत्रियों के अलावा विधानसभा के विधायकों और पार्टी के नेताओं को भी आदेश दिया गया कि वे रात गांव में गुजारें। उनके दावों को कांग्रेस ने लगभग गलत बताया। कांग्रेस ने कहा कि ये सब गुब्बारे हैं जिन्हें फोड़ा जा सकता है। यह एक संयोग है कि कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी अपने कार्यकाल के दो साल इसी माह पूरे किए हैं। (संवाद)
मध्यप्रदेश विधान सभा का एक-दिवसीय विशेष सत्र विकास को समर्पित
प्रदेश के विकास का पथ सबके विचारों से निर्धारित करने का आश्वासन
एल.एस. हरदेनिया - 2025-12-18 12:28 UTC
मध्यप्रदेश विधानसभा का एक-दिवसीय विशेष सत्र 17 दिसंबर को आयोजित किया गया। यह सत्र दो उद्देश्यों से बुलाया गया था। पहला था मध्यप्रदेश विधानसभा का 70 वर्ष पूर्ण होना और दूसरा 2047 तक मध्यप्रदेश के विकास पर एक विजन डाक्यूमेंट पर चर्चा करना। विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विजन डाक्यूमेंट सत्ताधारी विधायकों विचारों पर आधारित तो होगा ही परंतु प्रतिपक्ष के विचारों को भी महत्व दिया जाएगा। मध्यप्रदेश के विकास का पथ सबके विचारों से निर्धारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने भी इसी तरह की इच्छा प्रकट की और मध्यप्रदेश के विकास से संबंधित कुछ मुद्दे रखे।