जी राम जी बिल के आधी रात को पास होने के बाद, विपक्षी पार्टियों ने संसद परिसर में 12 घंटे का रात भर धरना प्रदर्शन किया। जब विधेयक को संसदीय समिति को भेजने की विपक्ष की मांग खारिज कर दी गई तब राज्यसभा में हंगामेदार दृश्यों और विपक्ष के वॉकआउट के बाद ध्वनि मत से विधेयक को पारित कर दिया गया।
18 दिसंबर को दिन में, विपक्ष ने लोकसभा और संसद परिसर में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष के सदस्य चाहते थे कि बिल को संसद की स्थायी समिति को भेजा जाए। उन्होंने सदन के अन्दर में विरोध प्रदर्शन किया जब लोकसभा स्पीकर ने कहा कि कानून पर विस्तार से चर्चा की गई है। विपक्षी सांसदों ने बिल की प्रतियां भी फाड़ दीं।
विपक्षी सांसदों ने 18 दिसंबर की सुबह संसद परिसर में वीबी – जी राज जी बिल वापस लेने की मांग को लेकर विरोध मार्च निकाला। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीरों के साथ, जिनके नाम पर मनरेगा का नाम रखा गया था, विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के सांसदों ने प्रेरणा स्थल पर गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक विरोध मार्च निकाला, और पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
19 दिसंबर को शीतकालीन सत्र के समापन दिवस पर, जब लोकसभा में कार्यवाही शुरू हुई, तो स्पीकर ओम बिरला ने सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया। राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने 1 दिसंबर को शुरू हुए शीतकालीन सत्र के दौरान हुए विधायी कामकाज का सारांश पढ़ने के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन ने विपक्ष द्वारा सदनों में बाधा डालने की आलोचना की। फिर भी, विपक्ष ने बिल और जिस तरह से सदन चलाए गए, उसकी आलोचना की है। विपक्ष ने बिल वापस लेने या उसे विस्तृत जांच के लिए संसदीय समिति को भेजने की मांग की थी। सत्ता पक्ष ने विपक्ष की मांग को नज़रअंदाज़ कर दिया और शुरू से ही यह साफ कर दिया था कि वे मौजूदा सत्र में जी राम जी बिल पास करवाना चाहते हैं।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि जी राम जी बिल को बिना ठीक से जांच-पड़ताल किए संसद में जबरदस्ती पास कराया गया। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा, “हम कई कारणों से इससे नाखुश हैं। यह असल में पूरे महात्मा गांधी ग्रामीण रोज़गार कार्यक्रम की आत्मा को खत्म कर देता है।”
बहस का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मनरेगा भ्रष्टाचार का एक ज़रिया था और दावा किया कि नया कानून सभी हितधारकों के साथ चर्चा के बाद लाया गया है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि मनरेगा सबसे गरीब लोगों के लिए एक सहारा था, और नया बिल गरीब विरोधी है।
जी राम जी बिल के खिलाफ कई आपत्तियां उठाई गई हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि यह मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण लोगों के काम मांगने के अधिकार को खत्म कर देता है, जो भारत में एकमात्र ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्यक्रम था। जी राम जी एक्ट लागू होने की तारीख से छह महीने के भीतर, राज्यों को नए कानून के प्रावधानों के अनुसार एक योजना बनानी होगी। राज्य विरोध कर रहे हैं क्योंकि जी राम जी बिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर काफी वित्तीय बोझ डालने की कोशिश करता है। जी राम जी बिल के आलोचकों ने कहा कि यह मनरेगा के मांग-आधारित ढांचे को खत्म कर देगा, इसके सार्वभौमिक कार्यान्वयन प्रावधान को हटा देगा, और निर्णय लेने की प्रक्रिया को केंद्रीकृत कर देगा।
मोदी सरकार के मांग-आधारित मनरेगा को खत्म करने के फैसले की आलोचना न केवल भारत में विपक्ष बल्कि दुनिया भर के स्वतंत्र विचारकों द्वारा भी की जा रही है। मोदी सरकार को लिखे एक खुले पत्र में, विद्वानों, नीति निर्माताओं, वकीलों और नागरिक कार्यकर्ताओं (दुनिया भर से भारत के सभी दोस्त) ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को जल्द ही खत्म किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस ऐतिहासिक कानून के प्रति फिर से प्रतिबद्धता दिखाने की अपील की, जो दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण रोजगार नीति है जो मांग के आधार पर काम के कानूनी अधिकार को लागू करती है। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करना एक ऐतिहासिक गलती होगी।
विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों ने मनरेगा को खत्म करने की आलोचना की है। विपक्षी दल द्वारा शासित पंजाब सरकार ने मनरेगा की जगह लेने वाले कानून पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार गरीबों की रोज़ी-रोटी पर हमला करने की कोशिश कर रही है।
पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी ने मनरेगा को बदलने और इस योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कड़ी आलोचना की है, और इसे "गहरी शर्म" की बात बताया है। उन्होंने कहा कि इसके जवाब में बंगाल अपनी ग्रामीण रोज़गार योजना का नाम गांधी के नाम पर रखेगा। याद दिला दें कि केंद्र ने पश्चिम बंगाल में मनरेगा की फंडिंग रोक दी थी, और अक्टूबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालच ने राज्य में इसे लागू करने का रास्ता साफ कर दिया था। आरोप है कि केंद्र ने न्यायिक आदेश को दरकिनार करने के लिए जी राम जी बिल लाया है।
तमिलनाडु के मुख्य मंत्री एम.के. स्टालिन ने जी राम जी बिल का विरोध किया है और राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ की आलोचना की है। केरल ने भी राज्य पर बढ़ते वित्तीय बोझ की आलोचना की है और नए कानून को गरीब विरोधी, मज़दूर विरोधी और महिला विरोधी बताया है, क्योंकि केरल में मनरेगा के 90 प्रतिशत मज़दूर महिलाएं हैं। यहां तक कि एनजीए सहयोगी टीडीपी ने भी राज्य पर बढ़े हुए वित्तीय बोझ का विरोध किया है और नुकसान की भरपाई के लिए विशेष सहायता की मांग की है।
देश भर में कांग्रेस पार्टी ने इस बिल की निंदा की है और देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है, यह कहते हुए कि यह कदम ग्रामीण रोज़गार के अधिकारों और यूपीए द्वारा शुरू की गई योजना की विरासत को कमज़ोर करता है। इसके नेताओं ने इस बदलाव को गरीब विरोधी बताया और चेतावनी दी कि इससे ग्रामीण गरीबों और महिला मज़दूरों को नुकसान होगा, जो मनरेगा लाभार्थियों का एक बड़ा हिस्सा हैं।
इंडिया गठबंधन के दलों और नरेगा संघर्ष मोर्चा ने पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करने का संकल्प लिया है, जो 19 दिसंबर से शुरू हो गया है। तमिल नाडु में सत्ताधारी डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस ने राज्य में 24 दिसंबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। विपक्ष का कहना है कि फंडिंग रोककर, काम न देकर और मज़दूरों को समय पर भुगतान न करके, मोदी सरकार ने मनरेगा को कमज़ोर कर दिया, जिसे आखिरकार खत्म कर दिया गया है। (संवाद)
राष्ट्रपति की जी राम जी विधेयक को स्वीकृति के बाद ग्रामीण रोजगार गारंटी खत्म
आधी रात को पारित किया गया था विधेयक, इंडिया ब्लॉक विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा
डॉ. ज्ञान पाठक - 2025-12-22 11:25 UTC
दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 की जगह आखिरकार 19 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन विकसित भारत – रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी – जी राम जी) विधेयक 2025 ने ले ली थी, जिसे रविवार 21 दिसम्बर को राष्ट्रपति की स्वीकृति भी मिल गयी है, और इसके साथ ही ग्रामीण भारत की एक मात्र रोजगार गारंटी योजना खत्म हो गयी है। लोकसभा ने 18 दिसंबर को दिन में बिल पास किया, और उसी दिन इसे राज्यसभा में पेश किया गया, जिसने शाम 6.40 बजे के बाद इस पर बहस शुरू की और विपक्ष की गैरमौजूदगी में आधी रात के ठीक बाद 12.32 बजे इसे पास कर दिया। यह विधेयक 16 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया था। यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि इसे जल्दबाजी में पास किया गया।