उत्तराखंड की भाजपा सरकार की गति सांप-छुछुंदर वाली हो गयी है। उसके सामने यक्ष प्रश्न है कि राहुल गांधी को वह गिरफ्तार करे या नहीं, क्योंकि अगर, गिरफ्तार करती है तो उन्हें अदालत ले जाना पड़ेगा। वहां क्या जवाब देगी कि उन्हें एस सी, एस टी एक्ट में किस अपराध में गिरफ्तार किया गया। उनका अपराध क्या है और उस मंच का शुद्धिकरण करने वाले लोग क्यों आजाद घूम रहे हैं तथा उनके खिलाफ अभी तक कोई भी रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं हुई, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल ही में एक रैली को संबोधित किया था।
दूसरी बात यह कि भाजपा को इस मुद्दे पर कहीं कोई राजनीतिक या चुनावी फायदा मिलता नहीं दिख रहा है क्योंकि मुद्दे से आम मतदाता भाजपा को समर्थन के प्रति उत्साहित नहीं हैं, बल्कि इसके उलट राहुल गांधी की मांग को वे उचित मानते हैं।
प्रदेश के सामाजिक कार्यों से सरोकार रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो यह कहा जा सकता है कि यदि भाजपा ने शुद्धिकरण मसले का और ज्यादा बचाव किया तो पार्टी को दूसरे राज्यों में खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
साथ ही राज्य में इससे कोई चुनावी लाभ नहीं होना है। कारण है धामी सरकार के खिलाफ बह रही भयंकर सत्ताविरोधी नाराज़गी की लहर। इस लहर को यह जातिवाद कार्ड शांत कर देगा इसकी संभावना लगभग क्षीण है।
अब तक भाजपा के प्रदेश स्तरीय नेतृत्व की हरकतों और मुख्यमंत्री पुष्कर धामी की गैर जरूरती बयानबाजी को लेकर पार्टी आलाकमान की खामोशी ने यह साफ कर दिया है कि उसको कुछ सूझ नहीं रहा है कि वह क्या करे।
धामी और उनके गुट के लोगों का दावा है कि शुद्धिकरण का समर्थन करने से उत्तराखंड का सवर्ण वर्ग पार्टी के पीछे लामबंद हो जायेगा। पर, क्यों, और कैसे इसका उनके पास कोई जवाब नहीं है क्योंकि खड़गे ने तो सिर्फ भाषण दिया था। किसी के खिलाफ कुछ नहीं बोला था। यही कांग्रेस भी कह रही है।
उधर, कांग्रेस ने समूचे प्रदेश में इस मामले को लेकर बवाल मचा रखा है। जगह जगह धरने, प्रदर्शन हो रहे। ऐसा माहौल दिख रहा है जैसे कि पार्टी नेतृत्व आपसी मतभेद भूलकर भाजपा की घेराबंदी में लग गया है। प्रदेश कांग्रेस नेता जहां एक ओर राज्य में आंदोलनरत हैं वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कल दक्षिण दिल्ली के संत रविदास मंदिर में दलित उत्पीड़न को लेकर एक घंटे का मौन व्रत धारण किया। रावत ने कहा कि वे इस मुद्दे पर हल्द्वानी में भी उपवास पर बैठेंगे। इससे प्रदेश की राजनीति में खलबली मच गई है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड की जनता को शुद्धिकरण से कोई लेना देना नहीं है। वह इसे कोई मुद्दा नहीं मानती। प्रदेश के युवाओं की नजर में यह सिर्फ दो वर्गों के बीच तनाव पैदा करके बांटने और ज्वलंत सवालों से जनता का ध्यान बटाने का सरकारी साजिश है।
"शुद्धिकरण के लिए हवन की कोई जरूरत नहीं थी। यह एक षड्यंत्र के तहत सरकार ने कराया है ताकि नौजवानों और आम जनता का ध्यान असली मांगों से भटकाया जा सके। इससे किसी को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। जनता जानती है कि उसे क्या करना है," यह कहना है हल्द्वानी निवासी एक युवक हरीश भाकुनी का।
सनद रहे कि कुछ समय पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी में कांग्रेस की एक रैली का आयोजन करके पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत की थी। कुछ असामाजिक तत्वों ने रैली के पश्चात सभा स्थल पर एक हवन करके शुद्धिकरण किया था जिससे यह विवाद खड़ा हुआ।
विपक्ष और खासतौर पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कृत्य संघ ने करवाया था। बाद में राहुल द्वारा इस मामले में एफ आई आर दर्ज करने की मांग उठाए जाने पर संघ एक कार्यकर्ता ने उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
फिलहाल, प्रदेश में हालात तनावपूर्ण हैं। ऐसे में यदि पुलिस ने राहुल की गिरफ्तारी के लिए कोई पहल की या फिर राहुल खुद गिरफ्तार होने के लिए उत्तराखंड आ गए तो हालात को प्रशासन द्वारा नियंत्रण में रखना एक टेढ़ी खीर हो सकती है।
राहुल पर कार्रवाई को लेकर असमंजस में भाजपा, आखिर करे तो क्या करे?
कुशाल जीना - 2026-09-04 13:52 UTC
नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्दवानी रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष एवं दलित नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद उसके शुद्धिकरण के मामले में राहुल गांधी द्वारा कार्रवाई की मांग करने के ठीक एक दिन बाद उलटे उनके खिलाफ जातिवादी बयान देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने के मामले में राज्य की भाजपा सरकार भारी असमंजस में फंस गयी है।