मायावती देख चुकी हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में उनके समर्थक मतदाताओं को भी अपनी ओर आकर्षित करने में कांग्रेस के महासचिव सफल हुए थे। वे दलित बस्तियों में जा जाकर उनके बीच अपनी रात बिताते थे और उनके साथ ही खाते पीते भी थे। एक बार तो वह ब्रिटेन के विदेश मंत्री को लेकर एक दलित बस्ती में पहुंच गए थे और उनके बीच अपनी रात बिताई थी।
राहुल गांधी के उस तरह के अभ्रियान के कारण दलितों का भी एक वर्ग कांग्रेस की ओर झुका था और दलितों के लिए आरक्षित अनेक लोकसभा सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत हो गई थी। जीतने वाले दलित कांग्रेसी उम्मीदवारों में पी एल पुनिया भी एक हैं, जो सांसद होने के साथ साथ अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष भी हैं।
पी एल पुनिया ने भी मायावती सरकार के खिलाफ अभियान चला रखा है और वे लगातार इस बात का प्रचार कर रहे हैं कि मायावती के शासन में दलित असुरक्षित हैं। दलितों पर हो रहे अत्याचारों का ब्यौरा वे लोगों के सामने पेश कर रहे हैं। श्री पुनिया प्रदेश के ही शीर्षस्थ नौकरशाह रह चुके हैं और एक समय मायावती के सबसे करीब नौकरशाह थे। इसलिए राहुल की चुनौती की तरह श्री पुनिया की चुनौती को भी मायावती गंभीर मानती है।
मायावती ने अपनी शैली में राहुल और उनकी पार्टी की चुनौतियों का जवाब देना शुरू कर दिया है। उन्होंने भट्टा पारसौल पर किए गए राहुल गांधी की बयाजबाजी को झुठलाना शुरू कर दिया है। मायावती की सरकार ने वहां राहुल गांधी द्वारा लगाए गए नरसंहार के आरोप को गलत बताया है। गौरतलब है कि राहुल ने राख की ढेर में मानव अंगों के होने की आशंका जाहिर की थी। फोरंसिक जांच के हवाले से मायावती की सरकार कह रही है कि राख् की जांच में मानव हड्डियों के वहां होने की बात गलत साबित हो चुकी है।
राहुल गांधी ने वहां के लोगों के हवाले से बताया था कि महिलाओं के साथ भी बलात्कार हुए। मायावती ने उस आरोप को भी गलत बताया है। मुख्यमंत्री आक्रामकता की राजनीति अपनाती हैं। उन्होंने राश्ट्रीय महिला आयोग पर गलत बयानी के आरोप लगाए हैं और कहा कि उसका यह कहना कि उन दोनों गांवों में महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया सरासर गलत है। उन्होंने महिला आयोग को ही भंग कर देने की मांग केन्द्र सरकार से कर दी है।
मायावती केन्द्र सरकार की आलोचना करती हुई कहती हैं कि भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव करना उसकी जिम्मेदारी है, जिसमें वह विफल रही है। उन्होंने राहुल गांधी से कहा है कि केन्द्र सरकार पर दबाव डालकर उस कानून में जल्द से जल्द बदलाव कराएं। उन्होंने यह भी कहा है कि उनकी पार्टी उस कानून में बदलाव करने वाले केन्द्र सरकार के कदमों का समर्थन करेगी।
उत्तर प्रदेश के किसानों को दिए गए मुआवजों को वह देश भर में दिए गए मुआवजों मे ंसबसे बेहतर बताते हुए वे आंकड़े भी पेश कर रही हैं। उनका कहना है कि भट्टा पारसौल मंे किसानों को उनके साथ हुए समझौते के तहत मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है और वह मुआवजा अन्य राज्यों के किसानों को मिले मुआवजे से कहीं ज्यादा है।
मायावती अपनी सरकार की उपलब्ध्यिों के लिए एक बुकलेट भी तैयार करवा रही हैं। वह अपनी पार्टी के नेताओं से कह रही हैं कि सरकार की उपलब्धियों से राज्य की जनता को ज्यादा से ज्यादा अवगत कराएं। (संवाद)
भट्टा पारसौल कांड पर मायावती का पलटवार
केंद्र की भूमि अधिग्रहण कानून न बदलने के लिए आलोचना
प्रदीप कपूर - 2011-05-25 11:06
लखनऊः मुख्यमंत्री मायावती और उनकी बहुजन समाज पार्टी भट्टा पारसौल घटना के बाद राहुल गांधी और उनकी पार्टी द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना करने की तैयारी में जुट गई हैं। ऊपर से देखन पर लगाता है कि मायावती को राहुल गाँधी और उनकी पार्टी की कोई परवाह नहीं है, लेकिन अंदर ही अंदर वे इस बात को समझती है कि यदि उन्होंने राहुल को गंभीरता से नहीं लिया तो वे उनके वोट बैंक को तोड़ सकते हैं।