इंडियन यूनियम मुस्लिम लीग यूडीएफ का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल है। उसके पास 20 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 38। 36 विधायकों के बूते कांग्रेस के 10 मंत्री हैं, जबकि 20 विधायकों वाले मुस्लिम लीग को मात्र 4 मंत्रालय ही मिले हैं। लीग चाहता है कि उसके केरल सरकार में 5 मंत्री हों। उसकी यह चाह अपने आपमें गलत नहीं, लेकिन उसने अपने 5वें मंत्री क नाम तक की घोषणा कर दी है और उन्हें क्या मंत्रालय दिया जाएगा, इसके बारे में भी अपनी ओर से बयानबाजी कर डाली है।

लीग की तरफ से की गई वह बयानबाजी केरल की चांडी सरकार के लिए संकट का कारण बनती जा रही है। जिस व्यक्ति को मुत्री बनाया ही नहीं गया, उसके मंत्रालय की घोषणा करना एक अजूबी बात है। किसी को क्या मंत्रालय दिया जाए, यह मुख्यमंत्री का अधिकार है। गठबंधन राजनीति में सहयोगी दल अपनी मांग मंगवाने के लिए मुख्यमंत्री से अपने मंत्री के लिए मंत्रालय विशेष की मांग करें, यह बात तो समझ में आती है, लेकिन खुद मंत्रालय की घोषणा कर दें, यह मुख्यमंत्री के लिए भी अपमानजनक बात है।

मुख्यमंत्री की समस्या यह है कि यदि वे लीग की मांग मानकर उसके कोटे में एक और मंत्री डाल दें, तो केरल कांग्रेस के मणि गुट का दबाव भी उनके ऊपर बढ़ जाएगा। उस गूट के दो मंत्री अभी चांडी सरकार में हैं और उसकी तरफ से तीसरे विधायके को मंत्री बनाने की मांग की जा रही है। मणिगुट अपने लिए स्पीकर के पद की भी मांग कर रहा है, लेकिन कांग्रेस इसके लिए तैयार होगी, इसकी संभावना नहीं के बराबर है। स्पीकर जैसा महत्वपूर्ण पद कांग्रेस अपने किसी विधायक को ही देना चाहेगी।

लीग ने अपने मंत्री को मिले मंत्रालय को तीन भागों में बांट दिया है। इसके कारण भी मुख्यमंत्री की स्थिति असहज हो गई है। एक अतिरिक्त मंत्री की घोषणा लीग के सर्वोच्च नेता सैयद हैदरअली शिहाब थांगल ने की है। उनसे यह घोषणा करवाने के पीछे लीग के महासचिव पी के कुनहालीकु्ट्टी का हाथ है। लीग महासचिव ने यह सोचकर श्री थांगल से यह घोषणा करवा दी है कि उनकी बात को टालना मुख्यमंत्री के लिए बहुत ही कठिन हो जाएगा।

इस घोषणा के बाद अब मुस्लिम लीग को पीछै हटना कठिन हो जाएगा। उसके सर्वोच्च नेता की प्रतिष्ठा दाव पर लग गई है। हालांकि मुख्यमंत्री की ओर से कहा जा रहा है कि उनके किसी विधायक को मुख्य सचेतक बनाकर मंत्री के रैंक में डाल दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए लीग तैयार नहीं है।

लीग की एकतरफा घोषणा की कांग्रेस के अंदर तीव्र प्रतिक्रिया हो रही है। कांग्रेस के विधायक इसे लीग द्वारा गठबंधन धर्म की अवहेलना मान रहे हैं। मुख्यमंत्री के लिए विकट स्थिति पैदा हो गई है। उन्हें सहयोगी दलों ही नहीं बल्कि अपने दल के विधायकों के भी असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। (संवाद)