कहने का मतलब कि राज्य में गरीबी और अशिक्षा की जो भी समस्या है, उसका हल राज्य सरकार के पास नहीं, बल्कि हनुमानजी के पास है। पीने के पानी का संकट हो अथवा बिजली का, भ्रष्टाचार की समस्या हो या बढ़ते अपराध की, इन सबका समाधान हनुमानजी के पास है। इसलिए राज्य की जनता को चाहिए कि वे अन समस्याओं के निदान के लिए सीधे हनुमानजी से गुहार लगाएं और राज्य सरकार के मुहताज न बनें।

मध्य प्रदेश की सरकार पहले से सूर्य नमस्कार को अनिवार्य बनाने के लिए आलोचना का सामना कर रही है। मिड डे मील के पहले वह छात्रों से भोजन मंत्र का पाठ करवाती है। उसने अपनी अनेक योजनाआंे का नाम हिंदू देवी देवताओं के नाम पर रख दिया है। बंदे मातरम् के सभी पैराग्राफ का गायन वह सरकारी कर्मचाकरियों से करवा रही है। इतना सब होने के बाद भी उसका मन नहीं भरा, तो अब वह राज्य की जनता से कह रही है कि वह अपनी समस्यओं के लिए हनुमानजी का भजन करें। वह दावा भी कर रही हैं कि हनुमानजी के पास उनकी सभी समस्याओं का समाधान है और वे उनकी समस्याओं का हल कर भी देंगे।

यह किसी भी विवेकशील व्यक्ति के लिए आश्चर्यजनक हो सकता है, लेकिन यह सच है। राज्य सरकार के सूचना जन संपर्क विभाग ने हाल ही में एक पुस्तिका छपवाई है जिसका नाम रखा गया है संकट मोचक हनुमान। पुस्तक के कवर पर पहाड़ हाथ में उठाए हनुमान की तस्वाीर है और उसके नीचे लिखा हुआ है मध्यप्रदेश जनसंपर्क का प्रकाशन।

यह प्रकाशन बहुत ही आपत्तिजनक है। सरकारी पैसे के इस्तेमाल से किसी धर्म विशेष के देवी देवता का महिमा मंडन करना हमारे देश के संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है। यह एक अन्य तरह से भी गैर संवैधानिक है। हमारे संविधान में साफ साफ लिखा हुआ है कि यह राज्य का कर्तव्य है कि वह लोगों में अंधविश्वास की प्रवृति को हतोत्साहित करे और लोगों के बीच वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दे। पर इस तरह का प्रकाशन कर राज्य सरकार लोगों के बीच अंधविश्वास बढ़ाने का काम कर रही है।

पूस्तक में बताया गया है कि आज व्यक्ति, समाज, और देश के सामने जो भी समस्याएं हैं, उन सबका समाधान हनुमानजी के पास है। हनुमानजी भूतों, प्रेतों, राक्षसों और बूरी आत्माओं के दुश्नन हैं। वे उन्हें अपने पैरों तले रौंद देते हैं। यीि कारण है कि वे किसी को परेशान नहीं कर सकते। पुस्तक में यह विस्तार से बताया गया है कि आज के समय और समाज में भी हनुमानजी क्यों प्रासंगिक हैं। पुस्तक में दावा किया गया है कि हमारे देश भारत में जो भी समस्या है, सबका समाधान हनुमानजी के पास है।

लेखक का कहना है कि इस कलियुग मंे ब्रह्मा, विष्णु और महेश की त्रिमूर्ति तक पहुंच के लिए पर्याप्त आघ्यात्मिक शक्ति आज हमारे पास नहीं है, इसलिए अब तो हनुमानजी का ही सहारा है। इस कलियुग में वे ही हमारे तारणहार हैं। हम अपनी सारी इच्छाओं की पूर्ति हनुमानजी की कृपा से कर सकते हैं और सारी समस्याओं से मुक्ति भी उनकी अनुकंपा से कर सकते हैं। (संवाद)