पिछले साल गर्मी के महीनों में घाटी की हालत खराब हो गई थी। अलगाववादियों द्वारा आयोजित बंद और प्रदर्शनों से माहौल अशांत था। पिछले साल 11 जून को तुफैल अहमद मट्टू की सुरक्षाबलों के हाथांे मौत हो गई थी। उसके बाद तो प्रदर्शनों का सिलसिला प्रारंभ हो गया था और उसमें अनेक लोग मारे गए थे। पाकिस्तान समर्थक हुरियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने तो एक कैलेंडर बना रखा था और उसी के अनुसार वह लोगों से आंदोलन करने को कहता था और लोग उसके अनुसार सड़कों पर निकल आते थे।
लेकिन धीरे धीरे स्थिति सुधरने लगी। इसका एक कारण तो यह था कि प्रशासन ने सुरक्षा बलों के उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की, जिनपर ज्यादती के आरोप लग रहे थे। दूसरा कारण यह था कि लोग रोज रोज के प्रदर्शनों और हिंसा से ऊब और थक गए थे। वे गिलानी के कैलेंडर को मानना बंद करने लगे। फिर तो गिलानी ने खुद अपना कैलंडर समेट लिया। स्थिति सुधरने का तीसरा कारण केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकारों की वह समिति भी थी, जो लोगों से मिलमिल कर उनकी समस्या समझने की कोशिश कर रही थी।
2011 के आरंभ होते ही स्थिति बेहतर होने लगी थी। इस साल घाटी में कोई बड़ी राजनैतिक अशांति नहीं हुई है। बंद और प्रदर्शनों की संख्या में भारी गिरावट आई है। चुनी गई सरकार की सत्ता फिर से अपना रंग दिखा रही है। निर्दोष लोगों के मारे जाने की भी कोई घटना नहीं घटी है। पाकिस्तान से घुसपैठ में भी कमी आई है, हालांकि असके बारे मे राज्य प्रशासन और सेना का अलग अलग आकलन है। राज्य सरकार कहती है कि अनेक आतंकवादी इस साल भी घुसपैइ कर चुके हैं, जबकि सेना का कहना है कि इस साल घुसपैठ नहीं हुई है।
लोगों का मूड किस तरह बदल रहा है इसका पता पिछले दिनों हुए स्थानीय निकायांे के चुनावों से भी लगता है। अलगाववादी तत्वों ने लोगों से उस चुनाव के बहिष्कार की अपील की थी। उस अपील के बावजूद लोगों ने भारी पैमाने पर चुनाव में हिस्सा लिया। इस तरह की हिस्सेदारी तो लोगों ने उस समय भी की थी, जब राज्य में विधानसभा के चुनाव हो रहे थे, पर पंचायत चुनावांे में हुई लोगों की भागीदारी देखने लायक थी।े
घाटी की बेहतर स्थिति को देखते हुए लगता है कि केन्द्र और राज्य सरकार के लिए यह सही समय है कि वह लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए और भी ज्यादा कदम उठाए। इससे लोगों का उनमें भरोसा बढ़ेगा और अलगाववादी ताकतें कमजोर होंगी। यदि इस समय उनकी बढ़ती आंकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सही कदम नहीं उठाए गए, तो बाद में फिर पुरानी स्थिति की पुनरावृति भी हो सकती है। (संवाद)
सुधर रही है कश्मीर की हालत
केन्द्र को और राजनैतिक कदम उठाने चाहिए
बी के चम - 2011-06-08 10:44
चंडीगढ़ः पिछले कुछ महीनों से कश्मीर की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सवाल उठता है कि क्या यह स्थिति आगे भी कायम रहेगी और कबतक? पिछले 3 दशकों से पाक स्थित आतंकी ताकतें घाटी में अशांति फेला रही हैं। क्या उन ताकतों का प्रभाव आने वाले दिनों में कम हो पाएगा?