उमा भारती को पार्टी में लेने का फैसला लखनऊ में संपन्न पार्टी की दो दिवसीय कार्यकारिणी बैठक में किया गया। उमा को पार्टी में लेने के लिए आरएसएस की ओर से दबाव था।

2012 के विधानसभा चुनाव की बागडोर भी पार्टी ने सुश्री भारती के हाथों में दे दी है। अभियान समिति का उन्हें नेता बना दिया गया है। उनकी सहायता से पार्टी उनकी जाति लोधों व अन्य पिछड़े वर्गो का समर्थन हासिल करना चाह रही है।

गौरतलब है कि लोध राजपूत पिछड़े वर्ग में आते हैं। पार्टी को पहले उनका पूरा समर्थन मिलता था, लेकिन कल्याण सिंह द्वारा पार्टी से बाहर जाने के बाद लोधों ने भी भाजपा को त्याग दिया। अब उमा भारती को कल्याण सिंह की काट के लिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश के मोर्चे पर लगा दिया है। एक लोध राजपूत को दूसरे लोध राजपूत के खिलाफ खड़ा कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश की 45 विधानसभा क्षेत्रों में लोध राजपूतों की संख्या निर्णायक है। जालौन, झांसी, हमीरपुर, आगरा, अलीगढ़, और फीरोजाबाद जिले में लोध नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। लोध राजपूतों के अलावा पिछड़े वर्गों की कुछ अन्य जातियों पर भी कल्याण सिंह की पकड़ है। उमा भारती के द्वारा भाजपा कल्याण सिंह की उस पकड़ को ढीला करना चाहती है।

पिछड़े वर्ग के होने के अलावा उमा भारती की कुछ अन्य विशेषताएं भी हैं, जिनके कारण पार्टी सभी समुदायों के वोटरों को लुभाने के लिए उनका इस्तेमाल करती रही है। वे एक प्रखर वक्ता है। बोलने की उनकी आक्रामक शैली है। इसका इस्तेमाल उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के समय जमकर किया था और ऊंची जाति के लोगों को भी पार्टी से जोड़ने का काम किया था।

पार्टी कार्यकर्त्ताओं में जोश होने के बावजूद प्रदेश के नेता उमा के कारण परेशान हैं। राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र, लालजी टंडन, ओम प्रकाश सिंह, सूर्यप्रताप शाही व कुछ अन्य नेताओं में उनकी वापसी और प्रदेश में राजनीति की बागडोर उनके हाथ में देने से सकते में हैं। उनके लिए उमा भारती के साथ तालमेल बैठाना आसान नहीं होगा।

चूंकि उमा भारती को आरएसएस का समर्थन हासिल है, इसलिए राज्य के नेता खुलकर उनके खिलाफ बोल नहीं सकते, लेकिन इसके कारण पार्टी में अंदरूनी फूट स्वाभाविक है और गुटबाजी को भी बढ़ावा मिलेगा।

पार्टी नेताओं ने दिखावे के लिए उमा भारती की पार्टी में वापसी पर उनकी सराहना में बयान दिए और पार्टी दफ्तर में मिठाइयां भी बांटी गई। प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही ने कहा कि उमा भारती के कारण पार्टी कार्यकर्त्ताओं में मायावती सरकार के खिलाफ आक्रमकता बढ़ेगी।

उमा भारती की भाजपा में वापसी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा वेटिलेटर पर है। कोई भी नेता इस पार्टी को यहां अब मरने से बचा नहीं सकती। उनहोंने कहा कि राज्य में पाटी्र उन लोगो के हाथों में है, जो बार बार पराजित हो रहे हैं। इन पराजित नेताओं की सहायता से पार्टी फिर से जीने का फार्मूला नहीं पा सकती।

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने उमा भारती की भाजपा में वापसी पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनकी पार्टी को कोई समस्या नहीं आने वाली है। यदि किसी को उमा भारती से समस्या आने वाली है, तो वे खुद राजनाथ सिंह और कलराज मिश्र हैं। (संवाद)