सभा के बाद भारतीय मुस्लिम समन्वय समिति के सदस्य साजिद सिद्दकी ने उन वक्ताओं के भाषणों से असहमति जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री चौहान ने तो साफ साफ शब्दों में सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने से मना कर दिया है। विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि किसी भी परिस्थिति में सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू नहीं किया जाएगा, क्योंकि ऐसा किया गया, तो फिर भारत का एक और विभाजन हो जाएगा।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने मुसलमानों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार के तहत वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उनके इस दावे का खंडन करते हुए अनेक मुस्लिम नेता कहते हैं कि प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने के बाद अबतक 86 दफा सांप्रदायिक दंगे हुए हैं, जिनमें मुसलमानों को ही नुकसान हुआ है। उनमें मुसलमानों के घरों और दुकानों को नुकसान हुआ और लोग भी मारे गए। हिंसा के दौरान और उसके बाद प्रशासन का रवैया आपत्तिजनक रहा। दोषियों को दंडित करने के लिए गंभीर प्रयास नहीं हुए।

मुख्यमंत्री की सराहना में वह रैली राजधानी के इकबाल मैदान में आयोजित हुई थी। गौरतलब है कि यह मैदान डाक्टर इकबाल के नाम पर है, जिन पर देश के बंटवारे का आरोप लगाया जाता है। मैदान में अटलबिहारी वाजपेयी, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, शाहनवाज हुसेन और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शाहनवाज हुसेन के बड़े बड़े कटआउट लगाए गए थे। उसमें पार्टी के सर्वोच्च नेता लालकृष्ण आडवाणी का कटआउट नहीं था। आडवाणी की छवि मुस्लिम विरोधी और बाबरी मस्जिद विध्वंसक की रही है, इसके कारण ही उस मैदान में हुए मुस्लिम रैली में उनकी तस्वीर गायब थी।

उस विशाल मुस्लिम रैली में आएसएस के पूर्व प्रमुख के एक सुदर्शन भी भाषण करने वालों मे शामिल थे। मुख्यमंत्री ने रैली मे घोषणा की कि राज्य सरकार ने भोपाल और इंदौर में हज हाउस के निर्माण का फैसला किया है। श्री चौहान ने कहा कि उनकी सरकार मुसलमानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम छात्रों के लिए राज्य सरकार ने जो छात्रवृत्ति योजना चला रखी है, उसमें छात्रवृत्ति पाने वाले छात्रों की संख्या 10 हजार से बढ़कर 81 हजार हो गई है और अगले साल बढ़कर यह एक लाख हो जाएगी।

वक्ताओं ने कांग्रेर पर लोगों को घार्मिक आधार पर बांटने का आरोप लगाया और कहा कि उसकी नीति लोगों में फूट डालने की रही है। उन्होने बार बार कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें वे सभी सहूलियतें उपलब्ध हैं, जो हिंदुओं को मिल रही हैं। (संवाद)