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गुजरात में भाजपा की बड़ी जीत 2024 के चुनाव का संकेत कदापि नहीं

विपक्ष के पास अभी भी मौका है, बशर्ते कांग्रेस और क्षेत्रीय दल मिलकर काम करें
नित्य चक्रवर्ती - 2022-12-10 10:54 UTC
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गृह राज्य गुजरात के विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी जीत दिलायी है, तथा कांग्रेस को महात्मा गांधी के राज्य में सबसे खराब आपदा का सामना करना पड़ा।लेकिन जिस तरह से पीएम सहित भाजपा नेताओं और राष्ट्रीय मीडिया नतीजों को कांग्रेस के अंत और 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की संभावित जीत के रूप में पेश कर रहे हैं, उसका पर्याप्त आधार नहीं है।

भाजपा की राज्य सरकारें कर रही शैक्षणिक संस्थानों की साम्प्रदायिक सफाई

नरेंद्र मोदी के शासन में हिंदुत्व शासन का असली चेहरा उजागर
प्रकाश कारत - 2022-12-09 11:20 UTC
गवर्नमेंट न्यू लॉ कॉलेज इंदौर और कुछ अन्य जगहों में हाल के दिनों में जो कुछ हुआ है, वह इस बात की ओर इशारा करता है कि समाज में उत्पन्न की गयीगहरी सांप्रदायिकता और ध्रुवीकरण अब शिक्षा व्यवस्था को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।

एमसीडी चुनाव में आप की बड़ी जीत ने दिया उसकी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा

नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के प्रबल दावेदार के रूप में उभरे अरविंद केजरीवाल
डॉ. ज्ञान पाठक - 2022-12-08 10:33 UTC
दिल्ली नगर निगम के चुनाव परिणामों ने उभरते हुए राजनीतिक सितारे - अरविंद केजरीवाल के कद को और चमका दिया है, जिसने न केवल भाजपा को हतोत्साहित किया है, बल्कि इसकी राष्ट्रीय संभावनाओं को भी प्रभावित किया है, जिसके कारण 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले कुछ राजनीतिक मंथन हो सकता है।

सत्ता और विपक्ष के लिए असमान हुए भारतीय चुनाव मैदान के नियम

सत्ताधारी भाजपा ने अपने पक्ष में किया राजनीतिक चंदे की प्रणाली
मृगांक एम भौमिक - 2022-12-07 10:50 UTC
विपक्षी नेताओं पर सिलसिलेवार छापों को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच चल रही खींचातान में विच-हंट (विरोधियों का शिकार करने) के गुण हो भी सकते हैं और नहीं भी।लेकिन एक असहज करने वाला तथ्य जो लोगों की आंखों के सामने आ रहा है वह यह है कि भारतीय राजनीतिक व्यवस्था नकदी अर्थव्यवस्था पर फलती-फूलती रही है।इसमें आजादी के बाद से भारत में अपारदर्शी राजनीतिक फंडिंग प्रणाली को अधिक दोषी ठहराया जा सकता है।इस अपारदर्शिता की घूंघट में व्यक्तिगत धन सृजित होता है।

अवैध आप्रवासियों की बाढ़ ने बनाया नागरिकता अधिनियम का तमाशा

सीएए, एनआरसी पर चुनाव पूर्व राजनीतिक बहस ने मुद्दे को दबा दिया
नन्तु बनर्जी - 2022-12-06 14:39 UTC
राजनीति और राजनीतिक पार्टियां भारत में अवैध आप्रवासियों की बढ़ती संख्या को रहने देने के विवादस्पद मुद्दे पर एक खतरनाक खेल खेलती दिख रही हैं।संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के अनुसार अनुमानित दो महीने के भीतर ही हमारा देश चीन को दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में पछाड़ने के लिए तैयार है।आधिकारिक तौर पर, संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद, भारत अवैध आप्रवासियों के लिए दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय गंतव्य है।

महामारी और दिवालियापन कोड ने ठीक की बैंकों और कार्पोरेट की बैलेंस शीट

पर छोटी कंपनियों को दी जानी चाहिए और अधिक आर्थिक सहायता
के आर सुधामन - 2022-12-05 12:05 UTC
भारत के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कुछ साल पहले अपने आर्थिक सर्वेक्षण में जुड़वां बैलेंस शीट की समस्या को चिह्नित किया था। उन्होंने कहा था कि भारत को इस प्रमुख आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा था जिसमें भारतीय बैंकों को कॉरपोरेट्स द्वारा भारी कर्ज लेकर उसकी अदायगी न करने के कारण भारी नुकसान हो रहा था।

वैश्विक मंदी के रुझान के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था झंझावात झेलने में सक्षम

अभी भी एक प्रमुख समस्या क्षेत्र बना हुआ है विनिर्माण क्षेत्र
अंजन रॉय - 2022-12-03 12:03 UTC
भारत की कुल आय, सकल घरेलू उत्पाद जिसे जीडीपी के नाम से जाना जाता है, के आंकड़ों का नवीनतम सेट दर्शाता है कि कुछ कमजोरियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को लचीली और झंझावातों को झेलने में सक्षम है।यह अलग बात है कि विनिर्माण क्षेत्र में समस्याएं अभी भी बरकरार हैं।

गुजरात में भाजपा का चुनाव प्रचार हुआ और अधिक हिंसक और जहरीला

अमित शाह की टिप्पणी चुनाव आयोग की आचार संहिता का उल्लंघन
प्रकाश कारत - 2022-12-02 10:53 UTC
गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का अभियान इस बात की अंतर्दृष्टि देता है कि कैसे गुजरात हिंदुत्व ताकतों के लिए प्रयोगशाला बन गया और कॉर्पोरेट-सांप्रदायिक धुरी कैसे गढ़ी गयी जो बाद में गुजरात मॉडल के रूप में जानी गयी।

खनिज तेल की कीमतों की भविष्यवाणी की उड़ी धज्जियां

कीमतें अगले साल के मध्य तक आरामदायक रहेंगी
के रवींद्रन - 2022-12-01 10:30 UTC
खनिज तेल के अंतर्राष्ट्रीय तेल मूल्य व्यवहार की भविष्यवाणियों की इस बार धज्जियां उड़ गयीं। कीमतों के तेजी से बढ़ने की सभी अपेक्षाओं को धत्ता बताते हुए, कच्चे तेल की कीमतें इस बार पिछले साल के समान स्तर पर ही मंडरा रही हैं, जिसका मतलब है कि यह $ 70 के दायरे में कारोबार कर रही है। ओपेक+ कार्टेल द्वारा घोषित 2 मिलियन बैरल प्रति दिन उत्पादन कटौती के कारण तेल की लगातार चढ़ती रही कीमतों के मद्देनजर घटी हुई कीमतें एक आश्चर्यजनक घटना है, जिसने सभी तर्कों को झुठला दिया।

2024 के राष्ट्रपति चुनावों में एक और बाइडन-ट्रम्प प्रतियोगिता संभव

बूढ़े नेताओं से तंग आ चुके हैं युवा अमेरिकी पर चलती है उनकी ही
कल्याणी शंकर - 2022-11-30 11:22 UTC
क्या संयुक्त राज्य अमेरिका में 2024 में होने वाला राष्ट्रपति चुनाव फिर जो बाइडन बनाम डोनाल्ड ट्रम्प की दौड़ होगी? यह दो मौजूदा और पूर्व राष्ट्रपतियों द्वारा दो साल पहले ही राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होने की घोषणा के बाद का सवाल है।