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मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की व्यक्तिगत जीत

भाजपा के प्रभावशाली प्रदर्शन में कांग्रेस की असफलताओं की भी भूमिका
एल. एस. हरदेनिया - 2021-11-05 09:32 UTC
भोपालः मध्य प्रदेश में 30 अक्टूबर को हुए उपचुनाव में बीजेपी की इतनी बड़ी जीत की किसी को उम्मीद नहीं थी। ज्यादातर पर्यवेक्षकों का मानना था कि डीजल, पेट्रोल, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि और बुवाई के समय उर्वरकों की कमी के कारण. मतदाता भाजपा को सबक सिखाएंगे। लेकिन उन्होंने पर्यवेक्षकों को तीन में से दो विधानसभा और एक लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवारों को जिताकर बहुत बुरी तरह से निराश किया। इन जीत का श्रेय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जाता है, जिन्होंने 40 जनसभाओं को संबोधित किया और हजारों मतदाताओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, अज्ञात मतदाताओं के घरों में रात बिताई और साबित किया कि वह एक मास्टर चुनावी रणनीतिकार हैं।

बिहार के दो उपचुनाव: समीकरण की राजनीति फिर हारी

उपेन्द्र प्रसाद - 2021-11-03 11:09 UTC
बिहार के दो विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनावों के नतीजों से लालू यादव की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होने की आकांक्षा को ध्वस्त कर दिया है। बहुत दिनों तक जेल में रहने और जेल से बाहर आकर स्वास्थ्य लाभ करने के बाद लालू यादव राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाह रहे थे। उनका राष्ट्रीय जनता दल बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है। दोनों उपचुनावों को जीतने के बाद राजद और उसके सुप्रीमो की प्रासंगिकता और भी केन्द्रीय राजनीति के लिए बढ़ जाती, इसलिए उन्होंने दोनों चुनाव जीतने के सपने पाल रखे थे और कांग्रेस से गठबंधन तोड़ने देने का खतरा लेकर भी उन्होंने दोनो सीटों से अपने उम्मीदवार उतार डाले। उन्हें लगा कि जातीय समीकरण की राजनीति कर दोनों सीटों से अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित कर देंगे।

पंजाब में कांग्रेस का गृहयुद्ध जारी

सिद्धू को अध्यक्ष बनाना पार्टी पर पड़ रहा है भारी
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-11-02 11:14 UTC
पंजाब में कांग्रेस की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। विधानसभा के चुनाव सिर पर हैं, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के बीच चल रहा जंग रुकने का नाम नहीं ले रहे है। प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं और कांग्रेस आलाकमान चुपपाप तमाशा देख रहा है। ताजा मामलों में सिद्धू ने अपनी सरकार की आलोचना इस बात के लिए कर दी कि सरकार बिजली सस्ती या मुफ्त क्यों दे रही है।

नई पार्टी बना कर कैप्टन खुद का और मनप्रीत बादल का इतिहास दोहराएंगे!

यह कांग्रेस के लिए बड़ी राहत की बात होगी
अनिल जैन - 2021-11-01 09:47 UTC
कांग्रेस से अलग हो चुके पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है। नई पार्टी के पंजीकरण और चुनाव चिन्ह हासिल करने के लिए उनकी ओर से चुनाव आयोग में आवेदन भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा है कि चुनाव चिन्ह आबंटित होने के बाद वे अपनी नई पार्टी का औपचारिक ऐलान करेंगे और उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ तालमेल करके पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। उनकी इस पहलकदमी को कॉरपोरेट नियंत्रित मीडिया कांग्रेस के लिए नुकसानदेह बता रहा है लेकिन पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात बताते हैं कि अगर कैप्टन अपने इस ऐलान पर सचमुच अमल करते हैं, यह कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी राहत की बात होगी।

त्रिपुरा में भाजपा सरकार विपक्ष के नेताओं के खिलाफ हमलों के प्रति असंवेदनशील

राज्य की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के प्रवेश ने हालात बदतर कर दिए हैं
सागरनील सिन्हा - 2021-10-30 10:20 UTC
पश्चिम बंगाल में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद त्रिपुरा में पैर जमाने की कोशिश कर रही तृणमूल कांग्रेस दावा करती रही है कि उसके नेताओं को अपने राजनीतिक कार्यक्रमों को अंजाम देते हुए पूर्वोत्तर राज्य में हमलों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में पश्चिम त्रिपुरा के आमतली बाजार में पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव की कार पर हमला किया गया। टीएमसी के आरोप सत्तारूढ़ भाजपा पर हैं।

एक अरब से अधिक टीकाकरण का सच

केंद्र ने नागरिकों को मुफ्त खुराक देने से इनकार किया
बिनॉय विश्वम - 2021-10-29 10:04 UTC
अचानक सरकार विज्ञान प्रधान हो गई है। वे नाटकीय रूप से टीकाकरण के पैरोकार बन गए। 100 करोड़ के टीकों का वितरण उनका अनमोल अभियान बिंदु बन गया। यहां तक कि 100 करोड़ की महिमा का प्रचार करने के लिए मोबाइल रिंगटोन को भी ट्यून किया गया है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विशिष्ट अंदाज में दावा किया कि कोविद -19 के खिलाफ युद्ध सफलतापूर्वक छेड़ा गया है और भारत दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। इस वैक्सीन उत्सव पर करीबी नजर रखने से सरकार के प्रचार कौशल का पता चल जाएगा। वे नरेंद्र मोदी की स्वयंभू विश्व गुरु छवि को प्रोजेक्ट करने का प्रयास कर रहे हैं।

वानखेड़े का बखेड़ा

फर्जी एससी सर्टिफिकेट का स्पष्ट मामला है
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-10-28 11:29 UTC
आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद अब विवाद का असली मसला ड्रग और उसका सेवन नहीं रह गया है, बल्कि असली मामला नरकोटिक्स ब्यूरो के जोनल डाइरेक्टर समीर वानखेड़े का जाति सर्टिफिकेट हो गया है, जिसकी सहायता से उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा देकर भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी पाई। हालांकि उन पर फिरौती का आरोप भी लगा है। नवाब मलिक की मानें, तो उन्होंने बॉलीवुड के लोगों से करीब 1000 करोड़ रुपये की फिरौती प्राप्त की। दीपिका पादुकोन, श्रद्धा कपूर जैसे लोगों को उन्होंने सुशांत सिंह की मौत के मामले में अपनी जांच के दायरे में लाया था और उनसे पूछताछ के अलावा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी का उल्लेख कर नवाब आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें गिरफ्तारी और मुकदमे का डर दिखाकर उनसे उगाही की गई और फिर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं। आर्यन की गिरफ्तारी मामले में भी एक गवाह ने आरोप लगाया कि शाहरुख परिवार से 25 करोड़ रुपये की मांग की गई थी।

मध्य प्रदेश उपचुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर

ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह भी चुनाव प्रचार में जुटे
एल. एस. हर्देनिया - 2021-10-27 09:32 UTC
भोपालः चार उपचुनावों के लिए व्यस्त चुनावी प्रचार के बीच - एक लोकसभा और तीन विधानसभा के लिए - कांग्रेस को उस समय गंभीर झटका लगा जब उसका एक विधायक भाजपा में शामिल हो गया। वह 27 वें कांग्रेस विधायक हैं जिन्होंने मार्च 2020 के बाद पार्टी छोड़ दी है जब भाजपा ने तत्कालीन सत्तारूढ़ दल में दलबदल से कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार को हटा दिया था।

उत्तर प्रदेश में गठबंधन पर काम कर रही भाजपा और सपा

कांग्रेस और बसपा का कहना है कि वे अपने दम पर लड़ेंगी
प्रदीप कपूर - 2021-10-26 11:04 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल फरवरी-मार्च 2022 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल करने के लिए अपने प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाने के लिए गठबंधन सहयोगियों की तलाश कर रहे हैं।

समावेशी नीतियों की शक्ति के लिए टीकाकरण आंख खोलने वाला

सत्ता पक्ष सफलता से संकेत लेने के लिए अच्छा करेंगे
के रवींद्रन - 2021-10-25 14:11 UTC
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी बिल्कुल सही कि 1 अरब टीकाकरण की उपलब्धि राष्ट्रीय एकता और ताकत का प्रतीक है। टीकाकरण अभियान के कोई रंग नहीं हैं, कोई केसर नहीं, हरा नहीं, लाल नहीं। न कोई जाति थी, न कोई धर्म। यह वीआईपी संस्कृति से भी मुक्त था, जो सरकार द्वारा प्रायोजित अनेक कार्यक्रमों का अभिशाप रहा है।