रोजगार पर सरकार श्वेत पत्र जारी करे
कृष्णा झा
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2022-02-26 12:01 UTC
फरवरी 21, 2022 की बेरोजगारी दर का आंकड़ा इस नये साल के दूसरे महीने का सबसे अधिक का था, जो 7.89 तक पहंच चुका था। सीएमआईई का यह आंकड़ा तो एक संख्यात्मक अभिव्यक्ति है, हकीकत तो पूरी जिन्दगी को समेटती है, और वहां तो भुखमरी और महामारी से जूझती जनता के लिये शायद ही कोई उम्मीद दीखती हो। करीब -करीब सभी नौजवान, और वो भी जो अब नौजवान नहीं है, बेरोजगारी की चुनौती का सामना कर रहे है, किसी भी स्तर का रोजगार उन्हें मान्य है? चाहे उनकी शिक्षा कितनी ही अधिक हो। आज के किशोर, जो तरुणाई तक पहुंचे भी नहीं हैं, निराशा के गहरे अंधकार में डूबते जा रहे हें। यह दशा पूरे मध्यम और निम्न वर्ग की है। जिन्दगी का पूरा अर्थ ही बदलकर मात्र जीविका की खोज रह गया है। यह कोशिश भी अधिकतर विफल ही होती है। इस बार के बजट में घोषणा की गई कि अगले पाचं सालों में पचास लाख रोजगार की व्यवस्था होगी। इसमें कोई भी नई आशा की किरण नहीं दिखाई देती, वादा बहुत बार दुहराया गया एक छलावा ही लगता है, जिसके पूरा होने की कोई संभावना नहीं है।