बजट से जनता की नाउम्मीदी
चारों ओर निराशा का माहौल है
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2022-02-12 11:19 UTC
बजट आ गया। लेकिन उससे उपजने वाली खुशियां नहीं हैं। नाउम्मीदी, असुरक्षा, ध्वस्त होती आर्थिक व्यवस्था में भविष्य का अंधकार ही दीखता है। इसमें बेरोजगार, भूखी जनता के लिये कोई सांत्वना नहीं है। जो कुछ भी इस बजट से आने वाला है, उसे सिर्फ गिरती आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर में भारी खालीपन की ही संज्ञा दी जा सकती है। बुनियादी जरूरतों के साथ भी समझौता करना मजबूरी बन गई है। यहां तक कि मध्यम वर्ग भी इस समझौते से गुजर रहा है। इस हाल में किसी भी माल की खपत एक सपना ही है। बाजार जो रंग-बिरंगी चीजों से भरा है, उन्हें खरीदने की न शक्ति बची है और न इच्छा। इसमें उपभोक्ता के आगे आकर खरीद में हिस्सा लेने की कल्पना भी उनकी गरीबी का उपहास ही है।