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यूक्रेन पर रूस-नाटो टकराव का स्वास्थ्य प्रणाली पर प्रभाव

कोविड अभी भी समाप्त नहीं हुआ है, युद्ध और बीमारियों को लेकर आएगा
डॉ अरुण मित्रा - 2022-02-24 10:38 UTC
कोविड-19 महामारी के कारण मानवीय संकट से पूरी दुनिया प्रभावित हुई है। यह खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है क्योंकि हम अभी भी तेजी से परिवर्तन करने वाले वायरस के नए रूपों के बारे में निश्चित नहीं हैं। भले ही टीकाकरण ने कुछ राहत दी हो, लेकिन विभिन्न देशों में आबादी के टीकाकरण में स्पष्ट असमानता इसके खिलाफ लड़ाई में बाधा उत्पन्न करती है। हमें न केवल महामारी के लिए, बल्कि अन्य बीमारियों के लिए भी चुनौती का सामना करने के लिए अपार संसाधनों की आवश्यकता है, जिन्हें इस अवधि के दौरान बड़े पैमाने पर नजरअंदाज कर दिया गया है। टीबी, डेंगू, मलेरिया, डायरिया, मधुमेह, कैंसर, क्रोनिक किडनी जैसी बीमारियों के मरीजों को बदलती प्राथमिकताओं के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। इसका प्रभाव विकासशील देशों में अधिक देखा गया है, जिनके पास पहले से ही संसाधनों की कमी है।

प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश चुनावों में चौंका सकती हैं

चौथे चरण के अभियान में अधिक से अधिक महिलाएं भाग ले रही हैं
प्रदीप कपूर - 2022-02-23 09:35 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश में 23 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में प्रियंका गांधी अपनी रणनीति, रोड शो और जनसभाओं से कांग्रेस पार्टी को चौंकाने वाले नतीजे दे सकती हैं। प्रियंका गांधी ने रायबरेली में नेहरू-गांधी के गढ़ को बचाने के लिए बहुत मेहनत की और स्थानीय मतदाताओं को परिवार से पुराने संबंध और विकास के लिए किए गए कार्यों की याद दिलाई. प्रियंका उत्तर प्रदेश में एआईसीसी महासचिव के रूप में चुनाव की प्रभारी हैं।

हिजाब पर विवाद

मुस्लिम पहचान की लड़ाई
उपेन्द्र प्रसाद - 2022-02-22 11:08 UTC
हिजाब विवाद का एकाएक उभरकर राष्ट्रीय स्वरूप प्राप्त कर लेना आश्चर्यजनक लग सकता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मुस्लिम समुदाय जिस माहौल का सामना कर रहा है, उसमें यह अप्रत्याशित नहीं है। 2014 में नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद देश भर में मुस्लिमों के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। गौरक्षण आंदोलन हो या लव जिहाद के खिलाफ चलाया गया अभियान, घर वापसी का अभियान हो या सीएए और एनआरसी, भारत के मुस्लिम वह सब कुछ देख रहे थे, जिसे उन्होंने आजादी के बाद कभी नहीं देखा था। अभी कुछ दिन पहले ही तथाकथित धर्म संसदों में तो मुसलमानों के खिलाफ साफ साफ हिंसा की अपील की गई थी। यह सच है कि अपील करने वाले कुछ लोग अभी जेल में बंद हैं। एक पर तो देशद्रोह का ही आरोप लगा हुआ है और कुछ और लोग भी सीखचों के पीछे डाल दिए गए हैं, लेकिन भारत राज्य का उनके खिलाफ जितना कठोर रुख होना चाहिए था, वैसा नहीं देखा गया। उलटे राज्य उनको संरक्षण देता भी दिखाई दे रहा है।

मोदी का यह दावा झूठा है कि वे आपातकाल में भूमिगत होकर काम कर रहे थे!

अपनी नाकामी छिपाने के लिए वे बार बार आपातकाल को याद करते हैं
अनिल जैन - 2022-02-21 15:28 UTC
सैंतालीस साल यानी करीब साढ़े चार दशक पुराने आपातकाल के कालखंड को हर साल 25-26 जून को याद किया जाता है, लेकिन पिछले सात-आठ साल से उस दौर को सत्ता के शीर्ष से कुछ ज्यादा ही याद किया जा रहा है। सिर्फ आपातकाल की सालगिरह पर ही नहीं बल्कि हर मौके-बेमौके याद किया जाता है। आपातकाल के बाद से अब तक देश में सात गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री हुए हैं, जिनमें से दो-तीन के अलावा शेष सभी आपातकाल के दौरान पूरे समय जेल में रहे थे (जेल में रहने वालों में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम भी शामिल किया जा सकता है, हालांकि उन्हें कुछ ही दिन जेल में रहना पड़ा था। बाकी समय उन्होंने पैरोल पर रहते हुए बिताया था) लेकिन उनमें से किसी ने भी कभी आपातकाल को इतना ज्यादा और इतने कर्कश तरीके से याद नहीं किया जितना कि मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते रहते हैं।

उत्तर प्रदेश और केरल के तुलना करें फिर वोट डालें

केरल में क्या है, जो यूपी में नहीं है
बिनय विश्वम - 2022-02-19 11:04 UTC
जब से उत्तर प्रदेश में चुनावी लड़ाई की शुरुआत हुई तब से ही आरएसएस-भाजपा के बड़े नेता अपने राजनीतिक भविष्य के लिए चिंतित हैं। हालांकि उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में भी चुनाव हो रहे हैं, पर संघ परिवार के प्रमुख उत्तर प्रदेश के बारे में ज्यादा उत्कंठित हैं। उनका विश्वास है कि उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों का असर 2024 के महासंग्राम पर पडे़गा। अतः वे संसाधनों, समय और ऊर्जा का बड़ा भाग उत्तर के विशाल राज्य को समर्पित कर रहे हैं। शुरुआत में मोदी-योगी-अमितशाह तिकड़ी ने सोचा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव आसान है। उन्हें भारी जीत मिल जाएगी। जब उन्हांने देखा कि विपक्ष संगठित नहीं है तब संघ परिवार के खेमे का विश्वास आसमान की ओर था और वे योगी काल की निरंतरता की बात कर रहे थे।

मणिपुर विधानसभा चुनाव में कड़ी मेहनत कर रहा कांग्रेस-वाम गठबंधन

भाकपा कमजोर कांग्रेस से कुछ और सीटें ले सकती थी
सागरनील सिन्हा - 2022-02-18 10:43 UTC
मणिपुर विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में 28 फरवरी और 5 मार्च को होना है। कांग्रेस ने चार वाम दलों के साथ एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर चुनावी गठबंधन के लिए समझौता किया है। अभियान तेज कर दिया गया है और वामपंथी कार्यकर्ता भाजपा की हार के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. दूसरी ओर, भाजपा ने इस 60 सदस्यीय विधानसभा में अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए भारी संसाधन जुटाए हैं।

यूपी में तीसरे चरण के मतदान में जाति समीकरण की अहम भूमिका

मूड अखिलेश के पक्ष में लेकिन बीजेपी के पास हैं संसाधन
प्रदीप कपूर - 2022-02-17 16:03 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश में पहले दो चरणों के मतदान के दौरान समाजवादी पार्टी और गठबंधन को अपने पक्ष में गए रुझान का लाभ मिलेगा, लेकिन 20 फरवरी को होने वाले तीसरे चरण के मतदान में अखिलेश यादव को यादव भूमि और बुंदेलखंड में भाजपा से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

बलूचिस्तान विद्रोहियों द्वारा विस्फोट

पाकिस्तान के सुरक्षा बलों को भारी नुकसान
मनीष राय - 2022-02-16 09:59 UTC
बलूचिस्तान में, क्षेत्रफल की दृष्टि से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत, पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों में भारी वृद्धि देखी गई है, बलूच विद्रोहियों ने विभिन्न अभियानों में राज्य बलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। बलूच विद्रोही आमतौर पर छिटपुट लक्ष्य हत्याओं, छोटे घात लगाकर किए गए हमलों और सड़क किनारे बमबारी में शामिल होते हैं। अब हम सैन्य शिविरों पर कुशल हमले देख रहे हैं जिसमें विद्रोही लड़ाके सुरक्षा बलों के शिविरों पर धावा बोल रहे हैं और भारी हताहत कर रहे हैं।

लोकसभा चुनाव तक सभी विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस ही आमने-सामने होंगी

यदि कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, तो बिखराव से बचना मुश्किल
अनिल जैन - 2022-02-15 11:24 UTC
इस समय पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों से लेकर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक जितने भी राज्यों में विधानसभा के चुनाव होना हैं, उनमें से एक उत्तर प्रदेश को छोड़ कर बाकी सभी राज्यों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होना है। इनमें से एक उत्तर प्रदेश को छोड़ कर बाकी सभी राज्यो मे कांग्रेस या तो सरकार में है या मुख्य विपक्षी पार्टी है। इन राज्यों में प्रादेशिक पार्टियां या तो नहीं है या बहुत मामूली हैसियत रखती है। कांग्रेस की जगह लेने के लिए हाथ पैर मार रही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की भी कोई खास हैसियत इन राज्यों में नहीं है।

झारखंड का भाषा विवाद

नहीं संभला, तो हो सकते हैं हिंसक टकराव
उपेन्द्र प्रसाद - 2022-02-14 10:49 UTC
झारखंड में चल रहा भाषा विवाद बद से बदतर रूप लेता दिखाई पड़ रहा है। वहां के आदिवासी और दक्षिणी झारखंड में रहने वाले कुछ गैर आदिवासी भी एक ऐसी समस्या पैदा कर रहे हैं, जो निहायत ही हास्यास्पद है। यह हास्यास्पद तो है, लेकिन इस समस्या ने यदि विकराल रूप धारण किया, तो यह एक बड़ी समस्या बन जाएगी और यह सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रहेगी।