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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव

देश के राजनैतिक भविष्य के लिए ये निर्णायक होंगे
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-03-02 09:47 UTC
पांच राज्यों में हो रहे चुनाव न केवल उन राज्यों की सरकारों का गठन करेंगे, बल्कि वह देश के राजनैतिक भविष्य के भी नियंता होंगे। इसका कारण यह है कि वे चुनाव इतिहास के एक बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रहे हैं। केन्द्र की सरकार अंधाधुध सार्वजनिक संपत्तियों को ही नहीं बेच रही है, बल्कि उसने ऐसी नीतियां अपनानी शुरू की हैं, जिनसे निजी संपत्तियों का केन्द्रीकरण भी कुछ निजी हाथों में ही होता चला जाएगा और देश में भयंकर आर्थिक विषमता का राज हो जाएगा। इस तरह का राज लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होगा। इसके कारण देश के लोकतंत्र के समाप्त हो जाने या सिर्फ नाममात्र के रह जाने का खतरा है।

पांच राज्यों के चुनाव कार्यक्रम

यह चुनाव आयोग है या सरकार का रसोईघर?
अनिल जैन - 2021-03-01 09:37 UTC
चुनाव आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव का जो कार्यक्रम घोषित किया है, उससे एक बार फिर जाहिर हुआ है कि केंद्र सरकार ने अन्य संवैधानिक संस्थाओं की तरह चुनाव आयोग की स्वायत्तता का भी अपहरण कर लिया है। चुनाव आयोग पिछले लंबे समय से सरकार का रसोईघर बना हुआ है और उसमें मुख्य चुनाव आयुक्त रसोइए की भूमिका निभाते हुए वही पकाते हैं जो केंद्र सरकार और सत्ताधारी पार्टी चाहती है। इसलिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा अन्य विपक्षी नेताओं का घोषित हुए चुनाव कार्यक्रम पर बिफरना चुनाव आयोग की नीयत पर सवाल उठाना स्वाभाविक ही हैं।

सरकार के आर्थिक दर्शन में ही छिपा है महंगे डीजल-पेट्रोल का राज

कोविड काल में जो मालामाल हो रहे हैं, उनपर टैक्स बढ़ाना बेहतर विकल्प था
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-02-27 10:23 UTC
पेट्रोल और डीजल लगातार महंगे होते जा रहे हैं। आने वाले समय में इसे और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल और भी महंगा हो सकता है। कोविड के कारण कच्चे तेल की बढ़ रही कीमतें थम गई थीं। थम क्या गई थीं, उनमें और गिरावट आ गई थी, लेकिन विश्वव्यवापी टीकाकरण के कारण कोरोना का विश्वव्यापी प्रकोप कम होगा और आर्थिक गतिविधियां फिर से रफ्तार पकड़ेंगी। आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार पेट्रोल, डीजल व अन्य प्रकार के इंधन ही देते हैं। जाहिर है, विश्व बाजार में डीजल व पेट्रोल की मांग बढ़ेगी और उसके साथ कच्चे तेल की कीमतें भी।

मोदी सरकार का निजीकरण अभियान सार्वजनिक संपत्तियों की लूट है

आत्मनिर्भरता के नाम पर देश को बेचा जा रहा है
प्रकाश कारत - 2021-02-26 12:01 UTC
केंद्रीय बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण नीति की घोषणा को कॉर्पोरेट मीडिया और अर्थशास्त्रियों द्वारा सही बताया गया है। ‘मोदी बदल गए हैं’, ‘असाधारण रूप से बोल्ड’ और ‘अंतिम रूप से वास्तविक सुधार’, इन मंडलियों की कुछ टिप्पणियां थीं।

निषाद समुदाय को जीतने की प्रियंका की कोशिश

अन्य पार्टियां भी उन्हें लुभाने में लगीं
प्रदीप कपूर - 2021-02-25 09:54 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए पिछड़ी जाति निषाद समुदाय पर जीत हासिल करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की महासचिव प्रियंका गांधी गंभीर प्रयास कर रही हैं।

श्री लंका के राष्ट्रपति गोतबाया स्वतंत्र नीति पर चलने की कोशिश कर रहे हैं

भारत को चीन से संबंधित उनके कदमों पर ध्यान रखना होगा
बरुण दास गुप्ता - 2021-02-24 09:50 UTC
गोतबाया राजपक्षे के कार्यकाल में भारत- श्रीलंका संबंधों का की निगेहवानी दिलचस्प होगी। यह याद किया जा सकता है कि जब नवंबर 2019 में गोतबाया श्रीलंका के राष्ट्रपति बने थे, तब साउथ ब्लॉक में बेचैनी थी। वे और उनके भाई महिंद्रा (पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान प्रधान मंत्री) दोनों ही चीन समर्थक झुकाव के लिए जाने जाते हैं। गोताबया ने पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना द्वारा किए गए लोकतंत्र समर्थक सुधारों को पूर्ववत करने और सरकार के राष्ट्रपति के रूप को पेश करने के अपने इरादे की घोषणा की थी । सिरीसेना श्रीलंका के संविधान में राष्ट्रपति को दी गई व्यापक शक्तियों को रोकना चाहते थे और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को प्रतिबंधित कर दिया था।

हिमालय में अनेक पनबिजली परियोजनाओं पर भूस्खलन के खतरे

भारत की पनबिजली क्षमता लगातार बढ़ रही है
नंतू बनर्जी - 2021-02-23 11:05 UTC
उत्तराखंड के जोशीमठ में हाल ही में हुए विनाशकारी ग्लेशियर के प्रकोप ने इस क्षेत्र की कम से कम चार पनबिजली परियोजनाओं सहित जीवन और संपत्ति को बड़ा नुकसान पहुंचाया है, लेकिन इससे देश की भारी क्षमता का दोहन करने के लिए सरकार और उद्योग की बोली धीमा होने की संभावना नहीं है। भारत 2022-23 के अंत तक 225 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। पनबिजली विद्युत परियोजनाओं से इस क्षमता में काफी योगदान होने की उम्मीद है। हालांकि, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) अधिक सतर्क होगा और नई बिजली परियोजनाओं को सख्ती से दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए कि हिमनद झील के प्रकोप के कारण होने वाली आपदाओं से कैसे निपटें।

किसान आंदोलन को बदनाम करना पंजाब में भाजपा को महंगा पड़ा

नगर निकायों के चुनावों में भगवा पार्टी की करारी हार
अनिल जैन - 2021-02-22 10:27 UTC
पहले हरियाणा, फिर राजस्थान और अब पंजाब! करीब तीन महीने से जारी किसान आंदोलन के दौरान इन तीनों राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को लगातार हार का मुंह देखना पडा है। इसमें भी पंजाब के नतीजे तो उसके लिए किसी सदमे से कम नहीं हैं। किसान आंदोलन में अहम भूमिका निभा रहे पंजाब में भाजपा को ही नहीं, बल्कि कृषि कानूनों की मुखालिफत करते हुए भाजपा का साथ छोडने वाले अकाली दल को भी सूबे में सत्तारुढ कांग्रेस के मुकाबले करारी हार का सामना करना पडा है। यही नहीं, बहुत उम्मीदों के साथ पहली बार स्थानीय निकाय चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी के लिए भी ये चुनाव नतीजे बेहद निराशाजनक रहे।

जस्टिस पी बी सावंत प्रेस की आजादी के पक्के समर्थक थे

कानून के अपने कैरियर में उन्होंने कमजोर वर्गों की लड़ाई लड़ी
एल एस हरदेनिया - 2021-02-20 10:19 UTC
भोपालः श्री जस्टिस पी बी सावंत, जिनका कुछ दिनों पहले पुणे में निधन हो गया, एक अद्वितीय न्यायाधीश थे, जो संविधान में निहित मूल्यों के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे। उनके निर्णयों ने संविधान की नींव को मजबूत करने में मदद की। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के दो-कार्यकाल के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कई फैसले दिए, जिससे स्वस्थ मीडिया को सरकार और असामाजिक और आतंकवादी तत्वों द्वारा हमले से लड़ने में अपना रास्ता बनाने में मदद मिली।

पुदुचेरी का राजनैतिक संकट

भाजपा प्रदेश के सत्ता केन्द्र पर ही हल्ला बोल रही है
एस सेतुरमन - 2021-02-19 10:33 UTC
सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक अप्रैल-मई के विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी जीत हासिल करने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। अपनी योजनाओं और वोट-पाने वाले उपकरणां के साथ प्रचंड प्रचार का सहारा ले रहा है। और इसी बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पूरा आक्रामकता के साथ मोर्चे पर आ जुटे हैं। वे धड़ाघड़ निवेश परियोजनाओं की घोषणा किए जा रहे हैं। इस तरह पूरा तमिलनाडु चुनावी मोड में आ गया है।