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उत्तर प्रदेश में आदिवासी महिलाएं सुरक्षित नहीं

दलित नेता दारापुरी का दावा
प्रदीप कपूर - 2020-10-19 10:28 UTC
लखनऊः पूर्व आईजी और ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के नेता श्री एसआर दारापुरी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में आदिवासी महिलाएं सुरक्षित नहीं, क्योंकि आदिवासी महिलाओं पर अत्याचारों की संख्या और दर राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं।

अयोध्या के बाद काशी और मथुरा संघ के राडार पर

भगवा ब्रिगेड के अनुसार आस्था कानून से ऊपर
विनय विश्वम - 2020-10-17 09:45 UTC
आरएसएस द्वारा नियंत्रित बीजेपी सरकार बार-बार विफल सरकार साबित हुई है। जीवन के हर दौर में इसने अपने ही वादों को धोखा दिया है। समाज का हर वर्ग सरकार की प्रतिक्रियावादी नीतियों का विरोध करने के लिए युद्ध के मैदान में आने को मजबूर है। किसानों, श्रमिकों, छात्रों, महिलाओं और दलितों, सभी ने अपने अनुभव से सीखा है कि जीवित रहने का एकमात्र तरीका एकजुट होकर सरकार द्वारा किए गए अत्याचारी उपायों से लड़ना है। लोगों के गुस्से को भांपते हुए, आरएसएस के विचारकों ने लोगों के आक्रोश के बीच अपनी नौका पार लगाने की रणनीति तैयार की है।

विधानसभा उपचुनावों में बीजेपी ने सिंधिया को दरकिनार किया

सभी रैलियों में सिर्फ शिवराज ही दिख रहे हैं
एल एस हरदेनिया - 2020-10-16 12:05 UTC
भोपालः दो अप्रत्याशित घटनाक्रमों ने मध्यप्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य को नया आयाम दिया है। एक घटनाक्रम राज्य उच्च न्यायालय द्वारा राजनीतिक दलों, केंद्र सरकार और राज्य सरकार को दिए गए अत्यधिक विवादास्पद दिशा- निर्देश से संबंधित है। वास्तव में उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक बैठकें करने के बारे में नए दिशानिर्देशों को लागू करने से रोक दी है। केंद्रीय दिशानिर्देशों के प्रवर्तन को रोकते हुए राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी रैलियों के लिए 100 से अधिक व्यक्तियों को जुटाने की अनुमति दी, अदालत ने गृह मंत्रालय को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

कोश्यारी ने राज्यपाल पद की गरिमा नहीं रखी

वे राज्यपाल पद पर बने रहने के योग्य नहीं
अनिल जैन - 2020-10-15 11:23 UTC
संविधान की अनदेखी कर मनमाने तरीके से काम करने और अपने सूबे की सरकार के लिए नित-नई परेशानी खड़ी करने के लिए कुख्यात महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने एक बार फिर उद्दण्डता और निर्लज्जता का परिचय देते हुए साबित किया है कि वे राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बने रहने की न्यूनतम पात्रता भी नहीं रखते हैं। कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन के दौरान बंद किए गए मंदिरों को खोलने की अनुमति न दिए जाने पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल कोश्यारी ने सूबे के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को जिस बेहूदा लहजे में पत्र लिखा है, वह न सिर्फ मुख्यमंत्री का बल्कि देश के उस संविधान का भी अपमान है, जिसकी शपथ लेकर वे राज्यपाल के पद पर बैठे हैं।

कोविड-19 और हमलोग

कोरोनावायरस एक चुनौती है और संदेश भी
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-10-14 10:17 UTC
पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत भी कोरोनावायरस की चपेट में है। भारत इससे शेष दुनिया की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही पीड़ित है। सबसे ज्यादा संक्रमित संख्या वाला देश बनने की ओर यह अग्रसर है और वायरस के संक्रमण से ज्यादा खतरनाक इसे अपनी अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर हो रहा है। चारों ओर तबाही ही तबाही है। सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों से समस्या सुलझने के बदले और भी विकराल होती जा रही है। इस आपदा को अनेक निहित स्वार्थ अवसर में तब्दील करने पर लगे हुए हैं, जिससे जनत्रासदी और भी बढ़ रही है। दुर्भाग्य है कि उन स्वाथी तत्वों में हमारी सरकार भी शामिल हो गई है, जो इस आपदा के समय में आर्थिक नीतिगत मोर्चे पर ऐसे ऐसे बदलाव कर रही है, जिससे लोगों का शोषण और उत्पीड़न आने वाले समय में और बढ़ेगा। श्रम कानूनों को श्रमिकों के खिलाफ किया जा रहा है। अन्य कानूनों का भी यही हाल है।

भारतीय अर्थव्यस्था अब पटरी पर आती दिख रही है

सरकार को कोविड काल में इसे नई गति देने के लिए तैयार रहना चाहिए
नंतू बनर्जी - 2020-10-13 10:10 UTC
यह अच्छा है कि देश का जीएसटी संग्रह मार्च के बाद पहली बार विकास की पटरी पर लौटा है। आर्थिक गतिविधियों का क्रमिक सामान्यीकरण और लॉकडाउन प्रतिबंधों से बाहर निकलना और एक पूरे इलाके या एक विशेष घर के लिए आवास परिसर पर प्रतिबंध क्षेत्रों की परिभाषा को बदलना मुख्य रूप से देश की आर्थिक स्थिति में थोड़ी सुधार के लिए जिम्मेदार हैं। इससे सरकार के उपभोक्ता कर संग्रह को बेहतर बनाने में मदद मिली है।

सिर्फ विज्ञापन चोरी का मामला नहीं है टीआरपी घोटाला

यह देश और समाज को मानसिक रूप से बीमार करने का मामला भी है
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-10-12 10:16 UTC
टीवी चैनलों के टीआरपी घोटाले की चर्चा भले आज बहुत तेज हो गई हो, लेकिन यह कोई नया घोटाला नहीं है। 2000 ईस्वी से टीआरपी की सिस्टम अस्तित्व में आई थी। तब कोई टैम नाम का संगठन इसे संचालित करता था। उसने देश के मात्र 2000 घरों में अपनी मशीन लगा रखी थी और मात्र 2000 घरों में देखे जा रहे प्रोग्राम्स या न्यूज के आधार पर वह तय कर देता था कि देश के करोड़ों लोगों में सबसे कितने करोड़ ने किस चैलन को देखे।

बज चुका है मध्यप्रदेश में उपचुनाव का बिगुल

कमलनाथ और सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है
एल एस हरदेनिया - 2020-10-10 10:03 UTC
भोपालः कांग्रेस और भाजपा दोनों द्वारा उम्मीदवारों की सूचियों की घोषणा के साथ, 28 विधानसभा क्षेत्रों में युद्ध की रेखाएँ खींच दी गई हैं। 3 नवंबर, 2020 को जनता मतदान करने वाली हैं।

रामविलास पासवान का निधन और बिहार चुनाव

करवट ले सकती है बिहार की राजनीति
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-10-09 08:35 UTC
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच रामविलास पासवान का निधन एक बड़ी घटना है, जिसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। वैसे उनकी मौत कोई अकाल मौत नहीं है, जिसके कारण एक सहानुभूति लहर दौड़ जाती है। वे बहुत दिनों से बीमार थे और एक महीने से भी ज्यादा समय से अस्पताल में गंभीर हालत में भर्त्ती थे। दस साल से भी पहले उन्हें एक बार हार्ट अटैक आया था और उसके बाद से ही वे लगातार इलाज में चल रहे थे। इस बार उनकी तबियत कुछ ज्यादा ही खराब थी। हृदय रोग के साथ साथ उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी और अन्य महत्वपूर्ण अंग भी सही तरीके से काम नहीं कर रहे थे। लिहाजा, उनकी यह मौत आकस्मिक नहीं है। उनके समर्थकों को भी लग रहा था कि कुछ अप्रिय हो सकता है।

भारत के चौबोलों के पास सबकुछ है

प्रभावी ट्रस्ट वॉचडॉग की आवश्यकता है
के रवीन्द्रन - 2020-10-08 09:54 UTC
राहुल गांधी के लिए मोदी को कोसना एक पसंदीदा शगल है। वह नीरस लगने की बात की हद तक दैनिक दिनचर्या के रूप में ऐसा कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने मोदी सरकार के बारे में कुछ जमीनी सच्चाइयाँ कही हैं, जो दुर्भाग्यवश इस पर लोगां का ध्यान नहीं गया है। इसका कारण यह है कि राहुल गांधी में एक ही बात को दुहराते रहने की आदत है।