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प्रशांत भूषण का मामला

लोकतंत्र कमजोर हुआ है
अजय कुमार - 2020-08-19 09:49 UTC
मैं आमतौर पर खुद को प्रशांत भूषण के विचारों के अनुरूप नहीं पाता हूं। मैंने हमेशा पीआईएल के विचार को नापसंद किया। एक रूढ़िवादी के रूप में, मैंने हमेशा एक ऐक्टिविस्ट अदालत के विचार को चिंताजनक कहा है।

नेहरू-पटेल ने आजादी की जल्दी क्यों दिखाई

आजादी में विलंब अराजकता पैदा करता
एल एस हरदेनिया - 2020-08-18 16:25 UTC
मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष ने कहा है कि भारत का विभाजन इसलिए हुआ क्योंकि नेहरूजी समेत कांग्रेस नेता सत्ता का भोग करने को उतावले थे। उनका यह कथन पूरी तरह से बेबुनियाद तो है ही, साथ ही इस बात का प्रतीक है कि संबंधित नेता उस समय के घटनाक्रम से पूरी तरह अवगत नहीं हैं।

ऐप्स पर भारत को दोहरा मानदंड नहीं अपनाना चाहिए

डिजिटल स्पेस की रक्षा के लिए पारदर्शिता बरतनी होगी
प्रबीर पुरकायस्थ - 2020-08-17 10:41 UTC
भारत की डेटा संप्रभुता की रक्षा करने के लिए चीनी ऐप्स पर भारत का प्रतिबंध उस समय संदेहास्पद हो जाता है, जब हमें अमेरिकी कंपनियों के साथ ऐसी कोई समस्या नहीं दिखती है, जबकि वे कंपनियां भारतीय नागरिकों के डेटा को देश से बाहर ले जा सकती हैं।

भगवा आक्रमण से भारत की आजादी को बचाने का समय

हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को मिटाया जा रहा है
डी राजा - 2020-08-14 09:55 UTC
हमारे देश ने औपनिवेशिक अधीनता की जंजीरों से खुद को दूर किया और 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की राह पर कदम बढ़ाया। यह गौरवशाली स्वतंत्रता संग्राम की परिणति थी जिसमें हमारे हजारों देशवासियों ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया और यह एक नई शुरुआत थी हमारे सपनों की पूर्ति के लिए। प्रथम प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 14 अगस्त 1947 की आधी रात को संसद के सेंट्रल हॉल में इस भावना को व्यक्त किया था जब उन्होंने कहा था “आज हम जो उपलब्धि मनाते हैं वह एक कदम है, अवसर की शुरुआत है, जो अधिक से अधिक विजय और उपलब्धियों का इंतजार करता है।’’

मोदी ने संघ के तीन में से दो एजेंडे को पूरा कर दिया

अगस्त 5 संघ के लिए महत्वपूर्ण दिवस बन गया है
कल्याणी शंकर - 2020-08-13 11:21 UTC
अगर 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस है और 9 अगस्त भारत छोड़ो दिवस है, तो तीसरी तारीख - 5 अगस्त - भाजपा के लिए एक ऐतिहासिक दिन बन गया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत करते हुए आज का स्वर्णिम इतिहास लिखा गया है। यह वास्तव में प्रधानमंत्री के लिए एक दोहरी जीत है कि रंगारंग मंदिर समारोह जम्मू कश्मीर के विभाजन की पहली वर्षगांठ पर आयोजित किया गया।

राम मन्दिर भूमि पूजन एक लंबी लड़ाई का हिस्सा है

भारत ने अनेक धार्मिक धाराओं को सोख लिया है
सागरनील सिन्हा - 2020-08-11 10:37 UTC
साम्राज्यवादी ब्रिटिश ताकतों से आजादी हासिल करने के बाद भारत की पहचान एक ऐसे देश के रूप में की गई है जिसने अपनी यात्रा नई नई शुरू की। भारतीय बुद्धिजीवियों के एक बड़े वर्ग में यह दृष्टिकोण हमेशा प्रमुख रहा है। हालाँकि, इस परिप्रेक्ष्य में भारतीयों के बहुमत के बीच ऐसी कोई लोकप्रियता नहीं मिली है।

अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस अभी भी दोराहे पर

सोनिया गांधी को परिवार मोह त्यागना होगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-08-10 08:48 UTC
एक साले से ज्यादा हो गया है, लेकिन कांग्रेस के अध्यक्ष का मसला अभी भी हल नहीं हुआ है। पिछले साल लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और वे चाहते थे कि पार्टी उनके परिवार से बाहर का अध्यक्ष चुन ले। अगला अध्यक्ष कौन हो, उसका नाम भी वे नहीं बता रहे थे। इसलिए संदेश जा रहा था कि वे नाटक कर रहे हैं और कांग्रेसियों से आरजू मिन्नत करवा कर कांग्रेस के पद पर बने रहेंगे। लेकिन वे न तो अध्यक्ष पद पर बने रहने के इच्छुक थे और न ही किसी को उस पर पद नामांकित करने को तैयार थे। लंबे इंतजार के बाद सोनिया गांधी को कांग्रेस कार्यसमिति ने अंतरिम अध्यक्ष घोषित कर दिया और तब से वे ही इस पद को संभाल रही है।

राम सत्ता के त्याग के प्रतीक हैं

लेकिन भाजपा के लिए सत्ता ही सबकुछ है
एल एस हरदेनिया - 2020-08-08 11:03 UTC
अब चूंकि राम मंदिर का शिलान्यास सबकी सहमति से हो चुका है इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि हम भगवान (राजा भी) राम के गुणों को, उनके व्यक्तित्व की विशेषताओं को पहिचाने और उनसे प्रेरणा लें। राम का सबसे महत्वपूर्ण गुण सत्ता के प्रति मोह का अभाव था। सच पूछा जाए तो वे सत्ता के त्याग के प्रतीक हैं।

आयुधशाला में हिंडू कार्ड

काँग्रेस और समजवादी पार्टी के युनाइटेड पार्टी से दबाव कम करने के लिए
प्रदीप कपूर - 2020-08-07 09:32 UTC
2022 में उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों पर नजर रखते हुए, विपक्षी दल भी 5 अगस्त को हुए अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन से संबंधित हिंदू कार्ड खेल रहे हैं।

राजस्थान में भाजपा नेतृत्व वसुंधरा को भी ठिकाने लगाना चाह रहा है

इसके कारण ही गहलोत ठिकाने नहीं लग पा रहे हैं
अरुण श्रीवास्तव - 2020-08-06 13:25 UTC
यदि भाजपा अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार को गिराने के मिशन पर काम कर रही होती तो वह अब तक का यह काम पूरा कर लेती। लेकिन भाजपा का मिशन सिर्फ इतना ही नहीं है। गहलोत को सत्ता से बाहर करने की इसकी रणनीति के कई आयाम हैं। प्राथमिक आयाम है भाजपा नेता वसुंधरा राजे सिंधिया के कद में ज्यादा से ज्यादा कटौती करना।