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भारत दलाई लामा के जरिए चीन पर दबाव क्यों नहीं बनाता?

दलाई लामा को ‘भारत रत्न’ देकर ऐसा किया जा सकता है
अनिल जैन - 2020-07-10 10:20 UTC
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर पिछले दो महीने से जारी तनाव फिलहाल तो जैसे तैसे खत्म हो गया है, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं कि यह विवाद फिर से पैदा नहीं होगा। अतीत के अनुभव भी बताते हैं और भारत-चीन संबंधों पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का भी मानना है कि चीन अपने विस्तारवादी मंसूबों को अंजाम देने की दिशा में हमेशा चार कदम आगे बढा कर दो कदम पीछे हटने की रणनीति पर काम करता रहा है। चीन ऐसा सिर्फ भारत के साथ ही नहीं करता है, बल्कि जापान और विएतनाम जैसे पडोसियों से भी अक्सर उसकी तू-तू, मैं-मैं होती रहती है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि वह आने वाले समय में उससे सटे भारत के सीमावर्ती इलाकों में फिर गलवान या डोकलाम जैसी कोई कोई न कोई खुडपेंच करेगा।

कोविड की दूसरी लहर तेल की कीमतें गिरा सकती हैं

सरकार के पैसा कमाने के जोश पर पानी फिर सकता है
के रवीन्द्रन - 2020-07-09 15:52 UTC
इसे केवल दैविक हस्तक्षेप के रूप में वर्णित किया जा सकता है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृृद्धि का उपयोग करके पैसा बनाने की मोदी सरकार की योजना के शून्य होने की संभावना है। कोविड प्रकोप की दूसरी लहर की संभावनाएं तेल विश्लेषकों को एक वैकल्पिक मूल्य परिदृश्य पेश करने के लिए मजबूर कर रही हैं, जहां वर्ष के शेष हिस्से में कच्चे तेल की कीमत कम रहने की उम्मीद है।

सवाल क्रीमी लेयर का

ओबीसी के बीच सर्वे करवाए सरकार
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-07-08 11:04 UTC
ओबीसी के क्रीमी लेयर को लेकर सरकार एक बड़ी घोषणा करने जा रही है। क्रीमी लेयर की आर्थिक सीमा प्रति वर्ष 8 लाख रुपये सालाना आय से बढ़ाकर 12 लाख रुपये होने जा रही है। इस तरह की वृद्धि समय समय पर होती रही है। जब ओबीसी के आरक्षण को केन्द्र सरकार ने लागू किया था, तो यह सीमा एक लाख रुपये थी। यह 1993 की बात है। उसके 27 साल हो चुके हैं और इस बीच रुपये का भारी अवमूल्यन हुआ है। इसलिए 12 लाख की सालाना आय यदि सरकार कर देती है, तो उसमें कुछ भी गलत नहीं होगा। लेकिन इसके साथ साथ एक और बदलाव करने की सरकार की योजना है और उसके कारण विवाद हो सकता है। सच तो यह है कि यह विवाद शुरू भी हो गया है।

कितने महंगे होंगे पेट्रोल डीजल?

सरकारी खजाना भरने के लिए अर्थव्यवस्था को तबाह न करें
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-07-07 11:03 UTC
मोदी सरकार अप्रत्यक्ष टैक्सेसन में किए गए ऐतिहासिक बदलाव के लिए देश आर्थिक इतिहास में याद की जाएगी। जीएसटी लागू करने का श्रेय इसे ही है। टैक्स व्यवस्था में यह बदलाव बिना खून खराबे के नहीं हुआ है, उसके बावजूद हमारा अप्रत्यक्ष टैक्सेसन पूरी तरह से जीएसटी के दायरे में नहीं आ सकता है। पेट्रोलियम उत्पाद उसके दायरे से अभी भी बाहर है और उसका बाहर रहना भी एक नये किस्म के खून खराबे का गवाह बन रहा है। इन उत्पादों पर लगाया गया टैक्स केन्द्र के ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारों के भी राजस्व का एक बड़ा स्रोत है। केन्द्र सरकार का यह कितना बड़ा स्रोत है, इसका अंदाजा आप इसीसे लगा सकते हैं कि केन्द्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में इन पर लगाए गए टैक्सों से कुल 4 सौ 30 लाख करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया था, जो कुल उत्पाद शुल्क का 78 फीसदी था। शेष 22 फीसदी ही सेंट्रल जीएसटी सहित अन्य स्रोतों से प्राप्त हुए थे।

बगावत की कीमत वसूलने में कामयाब रहे सिंधिया

लेकिन क्या वे अपने सारे लोगों को चुनाव जिता भी पाएंगे?
अनिल जैन - 2020-07-06 11:02 UTC
महज साढे तीन महीने पहले कांग्रेस छोडकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश में भाजपा को सत्ता दिलाने की कीमत की ‘एक और बडी किस्त’ वसूल कर ली। लगभग 100 दिन पुरानी राज्य की शिवराज सिंह मंत्रिपरिषद के बहुप्रतीक्षित विस्तार में सिंधिया अपने 9 और समर्थकों को मंत्री बनवाने में कामयाब रहे। उनके दो समर्थक पहले ही मंत्री बनाए जा चुके हैं। इस प्रकार अब मुख्यमंत्री सहित 34 मंत्रियों में एक तिहाई मंत्री सिंधिया समर्थक हो गए हैं। उनके साथ कांग्रेस छोडने वाले जो विधायक मंत्री नहीं बन पाए हैं, उन्हें अब निगम और मंडलों का अध्यक्ष उपाध्यक्ष बना कर समायोजित किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का बढ़ता मनोबल

प्रियंका के लखनऊ आने से कार्यकर्ताओं में उत्साह
प्रदीप कपूर - 2020-07-04 12:10 UTC
लखनऊः प्रियंका गांधी वाड्रा के लखनऊ शिफ्ट होने के फैसले ने न केवल कांग्रेस पार्टी का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि उन्हें यूपी में ्रिवपक्षी राजनीति के केंद्र में भी ला खड़ा किया है।

आपदा में अवसर

अध्यादेश के सहारे ही चलेगा राजकाज?
अनिल जैन - 2020-07-03 09:23 UTC
भारत दुनिया का संभवतः एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ कोरोना महामारी के दौर में देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद पूरी तरह ठप है। संसद के ठप होने की वजह से देश का राजकाज अध्यादेश के जरिए चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा को अवसर बनाने की बात 12 मई के अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में कही थी लेकिन उनकी सरकार ने इस दिशा में पहले ही काम शुरू कर दिया था।

नेपाल का भारत भूमि पर दावा उसे ही भारी पड़ेगा

नई दिल्ली उसे समझदारी का पाठ अभी भी सिखा सकती है
बरुन दास गुप्ता - 2020-07-02 10:30 UTC
भारत-नेपाल संबंधों में हाल ही में खटास आई जब नेपाल सरकार ने दावा किया कि तीन भारतीय क्षेत्र उनके हैं - उत्तराखंड में कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा। उनका कुल क्षेत्रफल 335 वर्ग किलोमीटर है। नेपाली पक्ष ने न केवल इन भारतीय क्षेत्रों पर दावा किया, बल्कि इन क्षेत्रों को नेपाल में दिखाने वाला एक नया नक्शा प्रकाशित किया। मानचित्र को बाद में नेपाली संसद द्वारा अनुमोदित किया गया। नेपाल ने अपने दावों के समर्थन में 1816 में हस्ताक्षरित सुगौली की संधि का हवाला दिया। सुगौली की संधि एंग्लो-नेपाली युद्ध (नवंबर 1814 से मार्च 1816) के बाद नेपाल के लिए चंद्र शेखर उपाध्याय और राजगुरू गजराज मिश्र व ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच थी।

जोस के मणि गुट यूडीएफ से बाहर

भाजपा को मिला एक सुनहरा अवसर
पी श्रीकुमारन - 2020-07-01 09:57 UTC
तिरुअनंतपुरमः केरल कांग्रेस (मणि) में चल रही गुटबाजी के बीच जोस के मणि के नेतृत्व वाले गुट को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट से निकाल दिए जाने के बाद यूडीएफ का संकट और भी गहरा हो गया है।

बिहार की चुनावी सरगर्मी

क्या एनडीए में बिखराव होगा?
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-06-30 09:42 UTC
बिहार में चुनाव नजदीक आने के साथ ही चुनावी सरगर्मी भी बढ़ गई है। वहां भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए सत्ता में है, हालांकि प्रदेश स्तर पर एनडीए का नेतृत्व जदयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार कर रहे हैं। वे अभी मुख्यमंत्री तो हैं ही, उन्हें निर्विवाद रूप से चुनाव के दौरान अगले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित भी कर दिया गया है। मतलब कि उनके नेतृत्व में ही एनडीए वहां चुनाव लड़ेगा, इसे लेकर शक और संदेह की कोई गुंजायश नहीं रही। हालांकि कुछ महीने पर भाजपा के अन्दर एक ऐसा वर्ग भी था, जिसे लगता था कि पार्टी के अकेले दम पर चुनाव लड़ना चाहिए, क्योंकि प्रदेश में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के चेहरे पर भाजपा चुनाव जीत सकती है।