बिहार विधानसभा चुनाव: नीतीश रहेंगे या जाएंगे?
- 2020-11-07 10:26 UTCबिहार विधानसभा चुनावों के लिए मतदान संपन्न हो गए और अगले 10 नवंबर को परिणाम भी सामने आ जाएंगे। चुनाव प्रचार के दौरान सभाओं में उमड़ी भीड़ को देखकर कोई भी कह सकता है कि तेजस्वी के नेतृत्व वाले कथित महागठबंधन की जीत होगी, लेकिन बिहार में ऐसे उदाहरण भी हैं कि सबसे ज्यादा भीड़ जुटाने वाली पार्टी हार भी गई थी। 2015 का विधानसभा चुनाव ही इसका सबसे ताजा उदाहरण है। उस साल हुए चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा में सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती थी। लालू यादव और नीतीश की सभा में कम लोग आते थे और सभाएं छोटी छोटी ही हुआ करती थी। हिलसा विधानसभा क्षेत्र में तो लालू की सभा में अपने तय समय पर 100 भी लोग एक बार नहीं जुटे थे और लालू राजद प्रत्याशी को लताड़कर बिना भाषण दिए वहां से चले गए थे, लेकिन वहां भी जीत राजद की ही हुई थी। उस चुनाव में मोदी की सभा में भारी भीड़ जुटाने वाली भाजपा की करारी हार हुई थी।