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केरल में कोरोना संक्रमितों में एकाएक इजाफा

विदेश से आने वालों के कारण हो रही यह वृद्धि
पी श्रीकुमारन - 2020-05-18 10:11 UTC
तिरुअनंतपुरमः सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के नेताओं के चेहरों पर चिंता की लकीरें वापस आ गई हैं। उनकी चिंता का कारण विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी के मद्देनजर कोविद के संक्रमण मामलों में अचानक आई बढ़ोतरी है।

महामारी से आहत लोगों के साथ कर्ज के पैकेज का छल

लोकतंत्र के मंत्र के साथ अलोकतांत्रिक इरादों पर अमल करना सरकार का मूल मंत्र
अनिल जैन - 2020-05-16 10:06 UTC
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह मान लिया है और बता भी दिया है कि कोरोना महामारी का स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर मुकाबला करने के लिए उनकी सरकार जितना कर सकती थी, वह कर चुकी है। अब इससे ज्यादा की अपेक्षा सरकार से न रखी जाए। आर्थिक पैकेज का एलान करने के लिए राष्ट्र से मुखातिब हुए प्रधानमंत्री का पूरा जोर ‘आत्मनिर्भरता’ पर रहा। यही वजह रही कि उनके पूरे भाषण में न तो ‘अस्पताल’ शब्द का जिक्र आया, न ‘इलाज’ शब्द का और न ही कोरोना वारियर्स अर्थात डॉक्टर, नर्स और अन्य लोगों का।

मोदी पैकेज जमीनी स्तर पर निरर्थक

दिवालिया हो चुके परिवारों को अभी और आत्मनिर्भर भारत का इंतजार करना होगा
ज्ञान पाठक - 2020-05-15 09:41 UTC
डर और असुरक्षा, निराशा और अनिश्चितता की भावना के साथ भारत धीरे-धीरे खुल रहा है। 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज मिला है, जो खाली है। जिन चीजों की हमें सबसे ज्यादा जरूरत है, वे पैकेज में नहीं हैं। यहां तक कि वर्तमान पैकेज का वास्तविक मूल्य केवल 13 लाख करोड़ रुपये है। इसकी कीमत को बड़ा दिखाने के लिए हमने पहले के पैकेजों को जोड़ दिया है जो पहले ही हमारे लोगों, हमारी अर्थव्यवस्था को विफल कर चुके हैं। लॉकडाउन के तीन चरण 17 मई 2020 को समाप्त हो जाएंगे। 18 मई से चौथा चरण शुरू हो जाएगा।

कोरोना वायरस ने ‘अन्य भारत’ के अस्तित्व को दिखाया

क्या मोदी का तोहफा वहां तक पहुंच पाएगा?
के रवीन्द्रन - 2020-05-14 09:37 UTC
कोविद -19 महामारी ने ‘अन्य भारत’ के अस्तित्व को प्रकट किया है, जो हमेशा अस्तित्व में रहा है, लेकिन अदृश्य बना रहा। ‘अन्य भारत’ में लाखों प्रवासी श्रमिक शामिल हैं, जो या तो उन शहरों या गांवों से संबंधित नहीं हैं, जहां से वे लंबे समय से उखड़े हुए थे। वे राजनेताओं, नीति नियोजकों और नौकरशाही के राडार पर नहीं दिखते हैं, ये सभी ज्यादातर अपने और अपने लोगों के वर्ग के साथ रहते हैं।

प्रधानमंत्री अब फिर पुरानी नीतियों की शरण में

विदेश नीति में भी बदलाव करना होगा
अंजन रॉय - 2020-05-13 09:46 UTC
राष्ट्र के लिए प्रधानमंत्री के संबोधन ने कोरोना वायरस महामारी के अनुभव और संभवतः वैश्विक अर्थव्यवस्था के आकार के संदर्भ में भारत के आर्थिक मॉडल को पूरी तरह से पुराने रूप में ले जाने की योजना तैयार की है।

कोरोना संकट और प्रवासी मजदूर

सरकारों का क्रूर चेहरा सामने आ रहा है
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-05-12 11:15 UTC
प्रवासी मजदूरों के साथ कोरोना संकट के दौर में जो व्यवहार किया जा रहा है, वह अत्यंत ही शर्मनाक है। अभी भी जहां तहां वे सड़कों पर चलते दिखाई पड़ रहे हैं और पुलिस का निशाना बन रहे हैं। कुछ दिन पहले ही 16 प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र में एक मालगाड़ी से कटकर मर गए। सरकार के अनुसार वे पटरी पर सोए हुए थे और मालगाड़ी काटते हुए उनके ऊपर से गुजर गई। वह दृश्य बेहद ही भयानक था। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने दुखों से आजीज आकर आत्महत्या कर ली, क्योंकि कोई रेल की पटरी पर क्यो सोएगा?

अगर सरकार नहीं चेती तो छोटी-बडी गैस त्रासदियां होती रहेंगी

एक दिन में हुए चार औद्योगिक हादसों से हमें सबक लेनी चाहिए
अनिल जैन - 2020-05-11 09:35 UTC
आंध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम, तमिलनाडु में कुड्डालोर, महाराष्ट्र में नासिक और छत्तीसगढ में रायगढ़। ये उन जगहों के नाम हैं जहां 7 मई को हुए अलग-अलग भीषण औद्योगिक हादसों में कई लोग हताहत हुए हैं।

घातक साबित होगा मजदूरों के साथ किया जा रहा अनुचित व्यवहार

मजदूर हमारे राष्ट्रनिर्माता हैं इसका ध्यान रखें
सी श्रीकुमार - 2020-05-09 09:57 UTC
विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिक अब अपने गृह शहरों में जाने लगे हैं। घर लौटते समय ऐसे एक प्रवासी श्रमिक ने बताया कि वह खाली हाथ है। मुझे अपनी पांच साल की बेटी के लिए एक गुड़िया खरीदने के लिए भी पैसे नहीं हैं, मेरे बेटे और पत्नी के लिए भी और मेरे माता-पिता के लिए भी जो उत्सुकता से मेरा इंतजार कर रहे हैं। यह सभी प्रवासी श्रमिकों की कहानी है।

महाराष्ट्र में संकट टला लेकिन सवाल अब भी शेष हैं

आखिर मंत्रिमंडल की सिफारिश क्यों ठुकराई गई?
अनिल जैन - 2020-05-08 07:30 UTC
महाराष्ट्र में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के रवैये से जो राजनीतिक संकट खडा होता दिख रहा था, वह अब टल गया है। अब वहां मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को विधान मंडल का सदस्य बनने के लिए मनोनयन के जरिए विधान परिषद में जाने की जरुरत नहीं पडेगी। चुनाव आयोग ने अब वहां राज्य विधान परिषद की नौ रिक्त सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 21 मई को कराने का एलान कर दिया है। इन चुनावों के जरिए मुख्यमंत्री ठाकरे के विधान परिषद का सदस्य बनने का रास्ता साफ हो गया है। अब वे इस उच्च सदन के लिए निर्वाचित होकर छह महीने की निर्धारित समय सीमा में विधान मंडल का सदस्य बनने की संवैधानिक शर्त पूरी कर सकेंगे।

लाॅकडाउन की विफलता और उसके बाद

मोदी के पास अब सीमित विकल्प
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-05-06 13:19 UTC
भारत में लाॅकडाउन का यह तीसरा दौर चल रहा है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 मार्च को पहले दौर की घोषणा की थी, तो देश ने उसका भारी स्वागत किया था। स्वागत इस तथ्य के बावजूद किया था कि लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर जहां तहां अटक गए थे और लाॅकडाउन के दौरान उनका क्या होगा, इस पर कोई विचार मोदी सरकार ने नहीं किया था। उन्हें मोदीजी ने राम भरोसे छोड़ दिया था। उनका क्या हुआ, यह तो अलग बात है, लेकिन लाॅकडाउन से जो उम्मीद मोदीजी और पूरे देश ने की थी, वह पूरी नहीं हुई। उम्मीद थी कि लाॅकडाउन की समाप्ति के दिन आते आते स्थितियां बेहतर होती जाएंगी। कोरोना वायरस का प्रसार रुक जाएगा और इस बीच उस वायरस से इलाज का ढांचा भी तैयार हो जाएगा। यदि ऐसा हो पाता, तो फिर लाॅकडाउन समाप्त कर दिया जाता।