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क्या शरीफ भारत पाक संबंधों को बेहतर बना सकते हैं?

उन्हें भारत विरोधी ताकतों पर लगाम लगाना होगा
अशोक बी शर्मा - 2013-06-19 11:22 UTC
नवाज शरीफ के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद दुनिया भर में माथापच्ची हो रही है कि वे अपने देश को कौन सी दिशा में ले जाते हैं, क्योंकि उनके देश के सामने आज चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है।

मनमोहन सिंह की जापान यात्रा से चीन को क्यों मिर्ची लगी?

वह प्रशांत और हिंद महासागर में अपना एकछत्र राज चाहता है
नंतू बनर्जी - 2013-06-01 09:59 UTC
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिह जापान दौरे के दौरान चीन की प्रतिक्रिया बहुत ही तीखी रही। भारत और जापान दोनों के रिश्ते बेहतर हों, यह दोनों का आपसी मामला है, पर चीन नहीं चाहता कि दोनों एक दूसरे के ज्यादा करीब आए और वह भारत को इसके लिए चेतावनी दे रहा है। यह तो एक किस्म की दादागिरी है, जो भारत के लिए बहुत ही आपत्तिजनक होनी चाहिए।

चीन का सामना कैसे करें?

आर्थिक हथियार ही सबसे बेहतर है
नन्तू बनर्जी - 2013-05-07 15:17 UTC
चीन ने अपनी सेना लद्दाख से हटा ली है और अब दोनों देशों के बीच सीमा पर बना हुआ तनाव फिलहाल समाप्त हो गया है। पर सीमा पर चीन द्वारा इस तरह का तनाव पैदा करने का यह न तो कोई पहला मौका था और न ही अंतिम। इस तरह की हरकतें चीन करता ही रहता है। आने वाले दिनों में भी वह कुछ ऐसी ही हरकतें करेगा। सवाल उठता है कि भारत चीन की इन हरकतों का कैसा जवाब दे और चीन को अपनी सीमा में रखने के लिए वह क्या कुछ करे?

यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार क्षेत्र संधि के लिए समय सही नहीं

भारत को अपने हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए
अंजन राय - 2013-04-21 02:08 UTC
पिछले सप्ताह जब भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जर्मनी में थे, तो यूरोपीय संघ की ओर से उनपर लगातार दबाव पड़ रहा था कि भारत उसके साथ मुक्त व्यापार क्षेत्र संधि पर दस्तखत को जल्द से जल्द अंजाम पर पहुंचाए। यूरोपीय वाइन और स्कॉटिश व्हिस्की के उत्पादक, जर्मनी के मोटर उत्पादक और यूरोप के वित्तीय सेवा प्रदान करने वाले मुक्त व्यापार क्षेत्र संधि को जल्द से जल्द संपन्न करने के लिए खासतौर पर बेकरार दिख रहे थे। वे सभी भारत में अपने उत्पादों के लिए कर मुक्त प्रवेश चाहते हैं। बदले में वे भारत से चाहते हैं कि यहां बौद्धिक संपत्ति अधिकारों के कानून सख्त बनाए जाएं। वे यूरोप के अपने बाजार को भारत के कृषि उत्पादों के लिए खोलना भी नहीं चाहते हैं और आई टी सेवा प्रदान करने वाले भारतीयों के यूरोप में मुक्त विचरण की इजाजत भी नहीं देना चाहते।

लंका विरोधी प्रस्ताव में लिट्टे की ज्यादतियों का जिक्र नहीं

तमिल संकट पर अपने स्वार्थ की रोटियों सेंक रहा है डीएमके
हरिहर स्वरूप - 2013-03-25 09:39 UTC
लिबरेशन टाइगर्स आफ तमिल एलम (लिट्टे) अब तक का सबसे अधिक भयावह आतंकवादी संगठन रहा है। दुनिया का किसी अन्य आतंकवादी संगठन ने मानवाधिकारों को उस तरह नहीं कुचला है, जितना लिट्टे ने। अपने 26 साल के इतिहास में इसने न केवल श्रीलंका को बल्कि भारत को भी गहरे जख्म दिए हैं। श्रीलंका के गृहयुद्ध में एक लाख से ज्यादा नागरिकए 22 हजार से ज्यादा जवान और 30 हजार से ज्यादा लिट्टे विद्रोही मारे गए। सुसायड बेल्ट का ईजाद भी लिट्टे ने ही किया।

भारत और इटली के रिश्ते बिगड़े

प्रधानमंत्री संबंधों की समीक्षा पर अड़े
अशोक बी शर्मा - 2013-03-19 10:39 UTC
नई दिल्लीः जमानत पर छोड़े गए अपने दो जलसैनिकों को भारत दुबारा भेजने से इटली द्वारा इनकार किए जाने के बाद भारत के साथ उसके रिश्ते अब सामान्य नहीं रह गए हैं। इन दोनों सैनिकों पर केरल के दो मछुआरों की हत्या का मुकदमा भारत की एक अदालत में चल रहा है।

भारत को श्रीलंका के खिलाफ मतदान करना चाहिए

श्रीलंका के युद्ध अपराधी बेनकाब हो चुके हैं
कल्याणी शंकर - 2013-03-16 10:43 UTC
इस महीने के अंत में जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की बैठक होने जा रही है। उस बैठक में श्रीलंका के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया जाना है। भारत की यूपीए सरकार के ऊपर इसके एक घटक डीएमके के दबाव है कि वह इस प्रस्ताव के पक्ष में यानी श्रीलंका के खिलाफ वहां मतदान करे। डीएमके और तमिलनाडु की अन्य पार्टियां ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी ने भी संसद में इस मसले पर इसी तरह का रवैया अपनाया था।

इस्लामी कट्टरवाद बनाम बंगाली राष्ट्रवाद

शाहबाग ने की इतिहास दुरुस्त करने की मांग
अमूल्य गांगुली - 2013-02-27 10:17 UTC
ढाका के शाहबाग चैक पर पिछले 8 फरवरी को उदारवादी मुसलमानों और कट्टरपंथी इस्लामी तत्वों के बीच जो टकराव हुआ उसका परिणाम चाहे जो भी हो, वह सिर्फ बांग्लादेश की सीमा तक सीमित नहीं रह सकता।

क्या बांग्लादेश बड़ी ताकतों के खेल का मैदान बन गया है?

पश्चिमी देशों ने हमेशा इसके मामलों में दखल दी है
आशीष बिश्वास - 2013-02-25 11:56 UTC
ढाका के राजनैतिक क्षेत्रों में आजकल इस बात को लेकर बहुत ही हलचल है कि अमेरिकी एजेंसी फेडरल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन या किसी अन्य एजेंसी का वहां दफ्तर खुलने वाला है। अमेरिकी अधिकारियों की अनेक यात्राओं के बाद इस तरह का प्रस्ताव आने की खबर है।

म्यान्मार से संबंध सुधारने के मामले में भारत की प्रगति धीमी

’’पूरब की ओर देखो’’ की नीति सिर्फ कागजों पर
आशीष बिश्वास - 2013-02-24 04:26 UTC
कोलकाताः भारतीय अर्थव्यवस्था को म्यान्मार के लिए खोलने के मसले पर बहुत लंबी-चैड़ी बातें की गई थीं। लेकिन उससे संबंधित इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओ पर लगभग नही के बराबर प्रगति हुई है।
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