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खालिदा जिया के भारत दौरे पर बांग्लादेश में विवाद

भारत के खिलाफ रुख नर्म कर रहा है विपक्ष
आशीष बिश्वास - 2012-11-06 12:20 UTC
कोलकाताः खालिदा जिया अपने भारत दौरे से बांग्लादेश लौटती, उसके पहले ही ढाका में विवाद शुरू हो गया। इस विवाद के केन्द्र में था ढाका का भारत और बांग्लादेश के संबंधों को लेकर बदलता नजरिया।

पुतिन की यात्रा से भारत रूस संबंधों को मिल सकता है नया आयाम

दो दशक की परस्पर उपेक्षा को खत्म करने का समय
अंजन राय - 2012-10-27 16:32 UTC
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन अगले 24 दिसंबर को भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। इस यात्रा ने भारत और रूस के संबंधों को फिर से मधुर बनाने की उम्मीदें जगा दी है। कभी भारत और रूस के संबंध बहुत ही अच्छे होते थे। संकट के समय में रूस भारत के साथ खड़ा दिखाई देता था। भारत पाकिस्तान के बीच जब युद्ध हुए थे, तो पाकिस्तान को अमेरिका को मिल रहे समर्थन को भारत रूस से मिल रहे समर्थन से संतुलित कर देता था। रूस का हाथ भारत के साथ होने के कारण अमेरिका बढ़चढ़कर पाकिस्तान का समर्थन नहीं कर पाता था।

चीन की सोच दुर्भाग्यपूर्ण, पर अस्वाभाविक नहीं

अब समाप्त हो रही है भारत की हिचक
अवधेश कुमार - 2011-11-22 12:48 UTC
इंडोनेशिया की राजधानी बाली में हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं चीन के प्रधानमंत्री वेन जिआबाओ के बीच बातचीत को चाहे जितना सौहार्द्रपूर्ण कहा जाए, भारत द्वारा पूर्व एवं उत्तरी क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का उसका विरोध कायम है। चीन के राष्ट्रीय समाचार पत्र पीपुल्स डेली ने भारत चीन सीमा पर सैनिक तैनाती के निर्णय को दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ाने वाला करार दिया है। पीपुल्स डेली ने भारत को गलत साबित करने के लिए तीन बातें कहीं हैं।

अमेरिका में अमीरों और गरीबों के बीच खाई चौड़ी हो रही है

घाटा कम करने में छूट रहे हैं संसद को पसीने
कल्याणी शंकर - 2011-11-18 12:16 UTC
गरीबों में से भी सबसे गरीब किसी भी देश की चिंता के कारण होते हैं। अमेरिका इसका अपवाद नहीं है। वैश्विक मंदी ने अमेरिकियों के बीच दो तरह की रिकवरी दिखाई है। जो अमीर हैं, वे तो मजे में हैं और विलासिता की अपनी जिंदगी को अभी भी पहले की तरह चला रहे हैं, जबकि जो अमीर नहीं हैं, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे लोगों की संख्या बहुत ही ज्यादा है। सपनों के इस देश में इस दूसरे अमेरिका की स्थिति निश्चय ही अच्डी नहीं हैं।

नेपाल के माओवादी गुटबाजी में उलझे

प्रचंड के गुट के दबाव में भट्टराई
शंकर रे - 2011-11-17 12:14 UTC
कोलकाताः जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़े नेपाल के प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई के लिए मौजूदा पद फूलों की सेज लेकर नहीं आया है, बल्कि कांटों का ताज बनकर आया है। नेपाल की उनकी माओवादी पार्टी में गुटबाजी बढ़ गई है और सिर्फ गुटबाजी ही नहीं, बल्कि पार्टी के एक नेता बालकृष्ण धुंगल की माफी का मामला भी उनके गले की हड्डी बन गया है। गौरतलब है कि श्री धुंगल संविधान सभा के सदस्य भी हैं और उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सुनाए अपने फैसले में 2004 में उज्जन श्रेष्ठ की हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

ओबामा के लिए मुश्किलों भरा दिन

अर्थसंकट मुख्य चुनौती है
कल्याणी शंकर - 2011-11-11 12:56 UTC
वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए 2012 में चुनाव होना है। सवाल पूछा जा रहा है कि क्या राष्ट्रपति बराक ओबामा एक बार फिर चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बन पाएंगे? इतिहास तो यही कहता है कि आर्थिक मंदी से निजात न दिलाने वाला राष्ट्रपति हमेशा चुनाव हारता रहा है। पर क्या ओबामा उस इतिहास को झुठलाते हुए एक नया इतिहास बना पाएंगे?

भारत के मसले पर नेपाली माओवादी दो फाड़

भट्टराई पर कट्टरवादियों का हमला
शंकर रे - 2011-11-08 13:03 UTC
कोलकाताः पिछले 3 नवंबर को यूनाइटेड सीपीएन (माओवादी) की केन्द्रीय समिति की बैठक अफरातफरी में आयोजित की गई थी। उस बैठक में नेपाली माओवादियों का विभाजन साफ नजर आया। पार्टी के वाइस चेयरमैन मोहन वैद्य ने अपने 10 बिंदुओं को विरोधपत्र जारी किया। चेयरमैन पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पार्टी में मतभेद अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया है। बैठक के एक रोज पहले वाइस चेयरमैन मोहन वैद्य उर्फ किरणजी ने पार्टी द्वारा नेपाल की अन्य पार्टियों के साथ सात सूत्री शांति समझौते का विरोध किया था। उस समझौते का एक महत्वपर्ण बिंदु है माओवादियों की जन मुक्ति सेना का नेपाल की सेना में विलय।

राष्ट्रमंडल सम्मेलन को विफल मानना उचित नहीं

पर्थ में मिले हैं इसके भविष्य के लिए कुछ सार्थक संकेत
अवधेश कुमार - 2011-11-03 13:01 UTC
राष्ट्रमंडल देशों के पर्थ में आयोजित सरकार प्रमुखों के 22 वें शिखर सम्मेलन के अंत में जब मेजबान अध्यक्ष ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जुलिया गिलार्ड परंपरागत पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करने आईं तो उन्हें उठने वाले प्रश्नों का आभास था। वस्तुतः सम्मेलन के पूर्व से ही इस बात पर व्यापक बहस आरंभ हो चुकी थी कि सदस्य देशों के मुखिया सुधारों की दिशा में आगे बढ़ते हैं या नहीं और बढ़ते हैं तो कितना। सम्मेलन के एजेंडे में सुधार सबसे ऊपर था।

कियानी ने अमेरिका को नाभिकीय ताकत का भय दिखाया

पाकिस्तान के पास अब विकल्प ही क्या रह गया है?
अवधेश कुमार - 2011-10-24 12:14 UTC
पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल परवेज अशफाक कियानी का जो मंतव्य सामने आया है उससे पूरी दुनिया में सनसनी फैलना स्वाभाविक है। सबसे पहले तो पाकिस्तान कभी अमेरिका को ऐसी सख्त चेतावनी देगा इसकी सहसा कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। किंतु यहां जनरल कियानी की भंगिमा केवल चेतावनी तक सीमित नहीं है। द्वितीय विश्वयुद्धोत्तर काल में उत्तर कोरिया के बाद दूसरी बार किसी देश ने नाभिकीय अस्त्र की धौंस दिखाई है।

खाद्य पदार्थों की कीमतों पर नियंत्रण- वक्‍त की मांग

डॉ. जगदीप सक्सेना/शिव शंकर शर्मा - 2011-10-16 17:55 UTC
दुनियाभर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से इजाफा हो रहा है। इससे कईं विकासशील देशों के गरीब लोगों के सामने जीवनयापन का संकट पैदा गया है। इस संकट ने कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा की है। यदि दुनियाभर में स्थिरता को बनाए रखना है तो खाद्य पदार्थों की कीमतों पर काबू रखने की जरूरत है।
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