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बोधगया विस्फोट के बाद छपरा में स्कूली बच्चों की मौत

नीतीश कुमार की मुसीबतों का अंत नहीं
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-07-17 14:15 UTC
बोधगया के बम विस्फोटों के अपराधियों तक जांच कर रही एजेसिंयों के हाथ पहुंचने के पहले ही नीतीश कुमार सरकार को नाकामी का एक और तमगा हाथ लगा है। वह नाकामी है छपरा जिले के मशरफ प्रखंड के एक गांव में कम से कम 20 प्राइमरी स्कूली बच्चों की मौत। वह मौत स्कूल में मिड डे मील खाने के बाद हुई। जाहिर है, जो भोजन बच्चों को खिलाया गया, वह विषाक्त था। इसके कारण ही बच्चों की भारी संख्या में मौत हुई है। यदि स्वास्थ्य सेवा अच्छी रहती, तो बहुत से बच्चों को मरने से बचाया जा सकता था, पर इस घटना ने बिहार सरकार की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की भी पोल खोल दी है।

पंजाब में अब पासा पलट रहा है

अदालती आदेशों के बाद अकाली दल मुसीबत में
बी के चम - 2013-07-16 14:04 UTC
चंडीगढ़ः कहीं भी स्थितियां एक सी नहीं रहती हैं। पंजाब भी इसका अपवाद नहीं है। पिछली दो घटनाओं ने यहां की स्थिति भी बदल डाली है। पहली घटना तो बदल रहा राजनैतिक परिदृश्य है और दूसरी घटना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए कुछ आदेश।

न्याय की गति तेज करके ही राजनीति को साफ किया जा सकता है

सुप्रीम कोर्ट के प्रशंसनीय फैसले
हरिहर स्वरूप - 2013-07-15 18:20 UTC
सुप्रीम कोर्ट के एक के बाद एक आए दो फैसलों ने राजनीति को अपराधी तत्वों से मुक्त कराने की दिशा में कुछ आशावादी संदेश दिए हैं। इन फैसलों का उन सबने स्वागत किया है, जो राजनीति को साफ सुथरा रखना चाहते हैं। एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि सजा पाने वाले सांसदों और विधायकों की सदस्यता तो अपील पर फैसला आने तक अपने पदों पर बनाए रखा जाय। गौरतलब है कि अभी तक की व्यवस्था में यदि किसी सांसद अथवा विधायक को अदालत द्वारा दोषी करार दिया जाय, तो उसकी संसद या विधानसभा की सदस्यता नहीं समाप्त होती।

राकेश सिंह का दलबदल कांग्रेस के लिए झटका

राघवजी प्रकरण से डांवाडोल भाजपा को मिला सहारा
एल एस हरदेनिया - 2013-07-13 10:27 UTC
भोपालः अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के समय ही कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राकेश सिंह चैधरी का अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन पकड़ लेना मध्यप्रदेश कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा सदमा है। पार्टी इस स्थिति के लिए बिलकुल ही तैयार नहीं थी। खासकर जब आगामी विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों की दूरी पर हो, तो वैसी स्थिति में इस तरह का माहौल कांग्रेस लिए निश्चय ही बहुत चिंता का कारण है। इस तरह के माहौल में वह भाजपा का चुनाव में सामना कैसे कर पाएगी?

तेलंगाना मसले पर अब निर्णय लेना होगा

क्या कांग्रेस आलाकमान इसके लिए तैयार है?
कल्याणी शंकर - 2013-07-12 14:32 UTC
क्या तेलंगाना राज्य का निर्माण हो पाएगा? यदि कांग्रेस के अंदर का मूड कोई संकेत है, तो लगता है कि इस समस्या का समाधान शीघ्र ही होने वाला है। तेलंगाना के कांग्रेसी सांसद अबतक अपनी सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि इस मसले पर उसकी नीति एक कदम आगे चलने और दो कदम पीछे चलने की रही है। अब कांग्रेस नेतृत्व अपने इन सांसदों की और उपेक्षा नहीं कर सकता।

कमजोर होता रुपया आर्थिक सुनामी साबित हो सकता है

चिदंबरम का अर्थ प्रबंधन कौशल कसौटी पर
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-07-11 13:12 UTC
रुपये की गिरती विदेशी विनिमय दर ने देश की अर्थव्यवस्था के सामने एक ऐसी चुनौती पेश कर दी है, जिसका यदि समय रहते सामना नहीं किया गया, तो यह हमारी भारी तबाही का कारण हो सकता है। पिछले कई साल से महंगाई से हमारे देश जूझ रहा है। दुनिया के किसी भी देश में मुद्रास्फीति की दर इतने लंबे समय से कायम नहीं है, जितना हमारे देश में देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में राजनैतिक दलों ने तैयारी तेज की

मोदी को रोकने के लिए सपा और बसपा प्रतिबद्ध
प्रदीप कपूर - 2013-07-10 13:33 UTC
लखनऊः नरेन्द्र मोदी और राजनाथ सिंह के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी आगामी लोकसभा का चुनाव जीतने के लिए आशावान दिखाई पड़ रही है। पर उनकी जीत का यह रास्ता उत्तर प्रदेश को सफलता पूर्वक पार किए बिना अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचता। और उत्तर प्रदेश में भाजपा जीत को कठिन बनाने के लिए मायावती के नेतृत्व में बसपा, मुलायम के नेतृत्व में सपा और राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस तैयार दिखाई पड़ रही है।

मध्यप्रदेश भाजपा के सामने दो चुनौतियां

चुनाव के ठीक पहले खराब हो रहा है माहौल
एल एस हरदेनिया - 2013-07-09 18:21 UTC
भोपालः पिछले दिनों की दो घटनाओं ने मध्यप्रदेश भाजपा के सामने बहुत बड़ी कठिनाइयां पेश कर दी हैं। आगामी नवंबर महीने में प्रदेश विधानसभा का आम चुनाव होना है। उसके ठीक पहले इन दोनों घटनाआंे ने भाजपा नेताओं की नींद हराम कर रखी है।

चुनाव बाद की स्थिति को लेकर वामदल चिंतित

कांग्रेस और भाजपा का विकल्प तैयार करना बड़ी चुनौती
हरिहर स्वरूप - 2013-07-08 13:23 UTC
कांग्रेस और भाजपा द्वारा राजनैतिक स्थितियों का किया जा रहा मूल्यांकन वामदलों द्वारा किए जा रहे मूल्यांकन से बिल्कुल अलग है। कांग्रेस को लगता है कि अपने बल पर सत्ता में आने मंे विफल रहने के बावजूद वह केन्द्र में सरकार बना लेगी, क्योंकि उसे सहयोगी दल मिल जाएंगे। खाद्य सुरक्षा अध्यादेश लाकर कांग्रेस गरीब लोगों का वोट पाने की उम्मीद पाल रही है। उसे लग रहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल होने और महंगाई के कारण उससे जनता में नाराजगी के बावजूद उसे इतनी सीटें मिल जाएंगी कि वह अपने सहयोगी दलों के साथ आराम से सरकार का गठन कर सके।

इशरत जहां मुठभेड़ पर गंदी राजनीति

राष्ट्रीय सुरक्षा को ही खतरे में डाल रही है सरकार
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-07-06 17:49 UTC
इशरत जहां के मुठभेड़ का मामला जिस तरह से केन्द्रीय एजेंसियों के बीच संघर्ष का मामला बन गया है, उससे राष्ट्रीय सुरक्षा के ही खतरे मे पड़ जाने का भय पैदा हो गया है। मनमोहन सिंह सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में अधिकांश मोर्चों पर विफल रही है। इसके दौरान सरकार के लोग अलग अलग स्वर में बोलकर सरकार की फजीहत तो करते ही रहे, लेकिन अब नौकरशाहों के बीच भी जंग छिड़ गई है। यह जंग राजनैतिक शाषकों के नियंत्रण से बाहर हो जाए, इसके पहले ही इस पर यदि लगाम नहीं लगाई गई तो यह देश की सुरक्षा को ही खतरे में डाल देगी।