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भारत के लिए ढाका में उम्मीदें पहले से ज़्यादा मुश्किल

तुर्की और पाकिस्तान का बांग्लादेश में नया खेल शुरु
आशीष विश्वास - 2026-07-07 13:15 UTC
बांग्लादेश की राजनीति में अचानक एक नया मोड़ आया है। बदलाव के लिए यह तुर्की-पाकिस्तान धुरी के लिए एक पहेली की तरह है, जो बांग्लादेश में भारत के खिलाफ़ तेज़ी से मज़बूत भूमिका निभा रहा है। बांग्लादेशी मीडिया की भारत के बारे में आमतौर पर दुश्मनी वाली कवरेज के उलट, विश्लेषक बांग्लादेश में कट्टर इस्लामी ताकतों के साथ तुर्की के मौजूदा जुड़ाव के संदर्भ में उसके पिछले रिकॉर्ड और मौजूदा इरादों के बारे में ज़रूरी सवाल पूछ रहे हैं।

धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति की निगरानी धर्मनिरपेक्ष संस्थाओं द्वारा होनी चाहिए

सभी धार्मिक समूहों के लिए एक चेतावनी है अयोध्या राम मंदिर का मामला
के रवींद्रन - 2026-07-06 11:39 UTC
अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी ने एक पुराने सवाल को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है: जब आस्था, पैसा और सत्ता बिना पर्याप्त सार्वजनिक जवाबदेही के एक साथ आते हैं, तो धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति की सुरक्षा कौन करे?

सिर्फ नाम नहीं है बरकतउल्ला विश्वविद्यालय : इतिहास और पहचान के सवाल

नाम परिवर्तन से बड़ी हैं विश्वविद्यालयों की चुनौतियां
राजु कुमार - 2026-07-04 13:50 UTC
हाल के दिनों में भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' करने के प्रस्ताव ने मध्यप्रदेश में तीखी बहस छेड़ दी। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा पारित इस प्रस्ताव के खिलाफ भोपाल सहित प्रदेश के अनेक हिस्सों में विरोध हुआ। शिक्षकों, छात्रों, इतिहासकारों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसे एक स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद के सम्मान के प्रतिकूल बताया।

भरोसे के संकट से गुजर रहा है ग्रामीण लोकतंत्र

ग्राम सभाओं में कम भागीदारी से लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल
आर. सूर्यमूर्ति - 2026-07-02 12:29 UTC
भारतीय शासन व्यवस्था में लंबे समय से यह धारणा रही है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने का सबसे अच्छा तरीका प्रक्रियाओं का विस्तार करना है। अधिक बैठकें हों, अधिक सूचनाएं जारी हों, अधिक रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएं और अधिक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाए जाएं। लेकिन ग्राम सभाओं में लोगों की भागीदारी पर राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) की हाल ही में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट“ए नेशनल स्टडी ऑन लो पार्टिसिपेशन इन ग्राम सभा अक्रॉस द स्टेट्स एंड यूटीज“ यह संकेत देती है कि केवल प्रक्रियाएं बढ़ा देने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता।

क्या शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का आवाज बन पाएगी 'छात्रों की गूंज'

परीक्षा की निष्पक्षता, छात्रों का भविष्य और जवाबदेही का सवाल
राजु कुमार - 2026-07-02 02:05 UTC
देश की शिक्षा व्यवस्था आज केवल संसाधनों, पाठ्यक्रम या संस्थानों की चुनौतियों से नहीं जूझ रही है। सबसे बड़ा संकट उस भरोसे का है, जिसके आधार पर करोड़ों छात्र और उनके परिवार वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। जब बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, परिणामों पर विवाद और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो सवाल केवल किसी एक परीक्षा का नहीं रह जाता। यह उस पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न बन जाता है, जिस पर युवाओं का भविष्य टिका हुआ है।

वीबी-जी राम जी के आठ नियमों पर उठे सवाल

मनरेगा हटने से ग्रामीण गरीबों को बड़ा नुकसान
सात्यकी चक्रवर्ती - 2026-07-01 03:38 UTC
देश के कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह लागू किए गए वीबी-जी राम जी अधिनियमके क्रियान्वयन के लिए जारी ड्राफ्ट आठ नियमों को वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि ये नियम ग्रामीण मजदूरों और मनरेगा श्रमिक संगठनों से बिना किसी परामर्श के बनाए गए हैं तथा नए कानून की कमियों को और बढ़ाते हुए श्रमिकों की आवाज तथा समस्याओं की पूरी तरह अनदेखी करते हैं।ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इन आठ नियमों के तहतपूरी योजना का संचालन प्रस्तावित है, जिसमें शामिल हैं - राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति नियम, शिकायत निवारण नियम, प्रशासनिक व्यय नियम, संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांज़िशनल प्रोविज़न्स) नियम, वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर आवंटन नियम, केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद नियम, मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते के भुगतान का तरीका नियम और अतिरिक्त खर्चों से जुड़े नियम।

मणिपुर में ताजा हत्याओं ने केंद्र के शांति बहाली के दावों पर खड़े किए सवाल

शांति के लिए सभी प्रमुख जातीय समूहों के साथ नए सिरे से संवाद जरूरी
कृष्ण झा - 2026-07-01 03:35 UTC
देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में पिछले तीन वर्षों से जारी जातीय हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। घात लगाकर हमले, अपहरण, हत्याएं और विरोध प्रदर्शन यहां की सामान्य स्थिति बन चुके हैं। राज्य कई जातीय प्रभाव क्षेत्रों में बंट चुका है और हाल की घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि संघर्ष अब और अधिक जटिल होता जा रहा है। कुछ दिन पहले ही नागा समुदाय के कई लोगों का अपहरण किया गया, जिनमें से दो के क्षत-विक्षत शव बरामद हुए।

क्या पश्चिम बंगाल में वामपंथ के लिए नई शुरुआत का अवसर है टीएमसी की हार

बदलते राजनीतिक परिदृश्य में वामपंथ को अपनानी होगी नई रणनीति
सोभनलाल दत्त गुप्ता - 2026-07-01 02:21 UTC
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। भारतीय जनता पार्टी को पश्चिम बंगाल में पहली बार स्पष्ट बहुमत मिला है, जबकि लंबे समय तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गई है। इस परिणाम को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा, भय और प्रशासनिक अव्यवस्था के खिलाफ मतदाताओं की तीखी प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है। चुनाव के बाद जिस तेजी से टीएमसी में टूट-फूट और राजनीतिक अस्थिरता दिखाई दी है, उसने पार्टी की संगठनात्मक कमजोरी को भी उजागर कर दिया है।

क्या प्रतिभा का सही आकलन कर पाती हैं नीट जैसी परीक्षाएं

परीक्षा प्रणाली में परीक्षार्थियों के अनुरूप बदलाव जरूरी
डॉ. अरुण मित्रा - 2026-06-25 14:14 UTC
लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी आग में कई विद्यार्थियों की दुखद मृत्यु हो गई और कई घायल हो गए।नीट पेपर लीक के बाद भी देश के कई हिस्सों से लगातार विद्यार्थियों की आत्महत्याओं की खबरें सामने आई हैं।देश के बड़े कोचिंग सेंटरकोटा से भी वर्ष दर वर्ष विद्यार्थियों की आत्महत्याओं की घटनाएं हो रही हैं। ये अत्यंत दुखद और चिंताजनक घटनाएं हैं, जिन पर समाज और सरकारों दोनों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उज्जैन भूमि प्रकरण : जमीन खरीदी का नहीं, पैटर्न का है सवाल

कारोबार और सत्ता के रिश्ते पर गहराती बहस
राजु कुमार - 2026-06-25 14:10 UTC
मध्यप्रदेश की राजनीति में समय-समय पर ऐसे विवाद सामने आते रहे हैं, जिन्होंने सत्ता और संपत्ति के रिश्ते पर सवाल खड़े किए हैं। अभी हाल ही में राष्ट्रीय दैनिक इंडियन एक्सप्रेस की विस्तृत जांच रिपोर्ट ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवार, करीबी रिश्तेदारों और उनसे जुड़ी कंपनियों ने पिछले दो वर्षों में उज्जैन और उसके आसपास बड़े स्तर पर भूमि खरीदी की है। रिपोर्ट में विशेष रूप से इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है कि इन खरीदों का एक बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों में दिखाई देता है, जहां सड़क परियोजनाएं, कॉरिडोर, बायपास, भूमि उपयोग परिवर्तन या अन्य विकास गतिविधियां प्रस्तावित अथवा क्रियान्वित हो रही हैं।यानी इस खरीदी में एक खास पैटर्न दिखाई देता है।