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भारत

नियमों को ताख पर रख कर किया गया था कुशाभाउ ठाकरे ट्रस्ट की जमीन का आवंटन

एस एन वर्मा - 2011-04-06 17:46 UTC
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आवंटन के नियमों की धज्जियां उड़ा कर कुशाभाउ ठाकरे ट्स्ट को जमीन का आवंटन किया गया था।उच्चतम न्यायालय द्वारा इस जमीन का आवंटन रद्द कर दिए जाने के बाद जो बातें खुल कर सामने आई है,उससे पता चलता है कि सत्ता में रहते हुए कोई भी पार्टी किस हद तक जनता की संपति केा हथियाने का षडयंत्र कर सकती है।भष्टाचार के आरोपों के कारण कांग्रेस में कोहराम मचा हुआ है। कांग्रेस ने मौके का लाभ उठाते हुए आज मध्यप्रदेश सरकार की इस करतूत की निंदा करते हुए बीजेपी को देश की जनता से माफी मांगने को कहा है।

क्या केरल में कमल खिल पाएगा?

भाजपा नेताओं का यही कहना है
पी श्रीकुमारन - 2011-04-06 10:31 UTC
तिरुअनतपुरमः अगले 13 अप्रैल को हो रहे चुनाव में क्या केरल में इस बार भाजपा अपना खाता खोल पाएगी? केरल के राजनैतिक पंडितों को तो इसमें संदेह है, पर भाजपा नेताओं को लगता है कि दक्षिण भारत के इस राज्य में इस बार उन्हें जरूर कुछ सीटें मिलेंगी।
भारत

समाजवादी पार्टी मायावती की मुख्य प्रतिद्वन्द्वी

मुलायम ने मायावती को जेल भेजने का वायदा किया
प्रदीप कपूर - 2011-04-05 09:31 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की आहटें सुनाई पड़ रही हें और उसी के साथ सत्ता के लिए संधर्ष तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी सत्तारूढ़ बसपा के सामने मुख्य राजनैतिक शक्ति के रूप में उभर चुकी है। भाजपा और कांग्रेस राज्य की राजनीति में हाशिए पर पहुंच गई हैं और यह साफ हो गया है कि जब भी विधानसभा चुनाव हो असली मुकाबला सपा और बसपा के बीच ही होगी।

केरल: एलडीएफ का चुनाव प्रचार जोरों पर

विजयन और अच्युतानंदन के संयुक्त प्रचार से सत्तारूढ़ मोर्चे की उम्मीदें बढ़ी
पी श्रीकुमारन - 2011-04-04 15:32 UTC
तिरुअनंतपुरमः इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि चुनाव प्रचार के मोर्चे पर सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने कांग्रेस के नतृत्व वाले यूडीएफ पर बढ़त हासिल कर ली है। जब एलडीएफ अपने चुनाव अभियान का पहला चरण पूरा कर रहा था, उस समय तक यूडीएफ अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने के लिए संधर्ष कर रहा था। यूडीएफ के घटकों के बीच तो सीटांे क बंटवारे क लिए घमासान मच ही रहा था, घटक पार्टियों के अंदर भी टिकट पाने के लिए मारामारी हो रही थी। पर इस तरह की समस्या एलडीएफ के सामने नहीं थी। उसके घटकों के बीच सीट बंटवारे को लेकर कोई खास जिच सामने नहीं आई और उम्मीदवारों के तय करने में भी किसी प्रकार की कोई बड़ी समस्या नहीं आई। सिर्फ मुख्यमंत्री अच्युतानंदन की उम्मीदवारी को लेकर संशय जरूर बना रहा। पहले उन्हें टिकट से वंचित किया गया और बाद में उन्हें टिकट दे दिया गया।
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आगामी चुनावों में लगेगा वामदलो को झटका

उनकी दुबारा वापसी में लगेगा समय
कल्याणी शंकर - 2011-04-03 05:47 UTC
पांच राज्यों के हो रहे विधानसभा चुनाव वामदलों के लिए खास मायने रखते हैं। कुड राज्यों में कांग्रेस वाम दलों के साथ सीधे संघर्ष में शामिल हैं, तो भाजपा की कहीं कोई खास भूमिका नहीं दिखाई पड़ रही है। देश के वाम आंदोलन के लिहाज से भी ये चुनाव महत्वपूर्ण हें। देश की राजनीति पर भीर इसका खासा असर पड़ने वाला है।
विकीलीक्स के खुलासे

बेनकाब हो रहे नेताओं के पास कोई जवाब नहीं

उपेन्द्र प्रसाद - 2011-04-03 05:40 UTC

विकीलीक्स के खुलासे एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। इन खुलासों में हमारे देश के नेताओं का असली चेहरा सामने आ रहा है। पहले से ही राजनेताआंे और राजनीतिज्ञों की छवि हमारे देश में अच्छी नहीं है। इसके बावजूद कुछ नेता अपनी बेहतर लोक सम्पर्क कुशलता और मीडिया प्रबंधन से अपने बारे में अच्छी छवि बनाने मे सफल रहे हैं। राजनीतिज्ञों के बारे में बुरा राय रखने वाले कुछ अनेक लोग भी भ्रम वश उन्हें एक औसत राजनीतिज्ञ से बेहतर मानने की भूल कर लेते है। विकीलीक्स खुलासे निश्चय ही वैसे नेताओं के लिए एक बड़ा दुःस्वप्न साबित हो रहा है।

उत्तर प्रदेश में चुनाव की आहट

क्या कांग्रेस इसके लिए तैयार है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-03-31 09:27 UTC
देश के 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव हो रहे हैं और इसी बीच उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मायावती की राजनैतिक हलचलों से पता चलता है कि वहां भी शायद इसी साल चुनाव हो जाए। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में मिशन 2012 चला रखा है, जिसके तहत उस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही है, अब यदि चुनाव 2012 के बदले 2011 में ही हो जाए, तो क्या कांग्रेस आज इसके लिए तैयार है?

विकीलीक्स से भाजपा हो रही है शर्मिंदा

करात के बारे में अमेरिका का आकलन गलत
अमूल्य गांगुली - 2011-03-31 09:17 UTC
अमेरिकी दूतावास से भेजे गए गुप्त केबल संदेश लगभग सही साबित हो रहे हैं। उनके सच होने पर किसी को कोई संदेह नहीं हो सकता। अमेरिकी राजनयिकों ने भारत के नेताओं से बातचीत करने के बाद ही बातचीत से संबंधित बातें और उनसे उपजी अपनी राय को अपने विदेश विभाग को अमेरिका भेजा था। उन्होंने भाजपा और सीपीएम से जुड़े संदेश भी भेजे थे, जिनका अब खुलासा हो रहा है।

तृणमूल कांग्रेस के लिए असम में खतरा नहीं

मुस्लिम आधार को बनाए रखने पर सत्तारूढ़ दल की नजर
बरुण दास गुप्ता - 2011-03-29 12:57 UTC
कोलकाताः जब तृणमूल कांग्रेस ने यह घोषणा की कि वह असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारेगी, तो बहुत लोगों को आश्चर्य हुआ। इसका कारण यह है कि सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस भी कुल 118 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतार रही है। तृणमूल कांग्रेस का वहां न तो कोई संगठन है और न ही उसके किसी नेता की कोई पहचान है। उसके पास कोई कार्यकर्त्ता भी नहीं है। एक सर्वे में पाया गया कि वहां के लोग किसी भी तृणमूल नेता का नाम तक नहीं जानते। एक ने तो कहा कि यदि तृणमूल के उम्मीदवारों में से किसी एक की भी जमानत बच गई, तो उसे बहुत आश्चर्य होगा।

इस खुलासे पर आश्चर्य कैसा

केन्द्र सरकार को अपने दामन पर लगे दाग छुड़ाने चाहिए
अवधेश कुमार - 2011-03-28 11:42 UTC
जिन लोगों को लोकसभा में 22 जुलाई 2008 का दृष्य याद होगा उनके लिए विकिलिक्स के खुलासे पर आश्चर्य करने का कोई कारण नहीं है। उस दिन मनमोहन सिंह सरकार ने विश्वास मत जीत लिया था, लेकिन मतदान के पूर्व भाजपा के तीन सांसदों द्वारा लोकसभा की मेज पर एक हजार के नोटों से भरी अटैचियां रखने का शर्मनाक नजारा दुनिया के सामने आ चुका था। भारतीय संसद के इतिहास में वह इस किस्म का पहला कालादिन था। इसके पूर्व कभी ऐसा नहीं हुआ था।